भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना पर न्यायालय का न्याय जनता के विश्वास की जीत – गणेश तिवारी

कवर्धा :- नगर के भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना मर्यादित राम्हेपुर पर संचालक मंडल का गठन निर्वाचन के अंतर्गत 30/06/2017 को हुवा था जिसमे अध्यक्ष के पद पर भेलीराम चंद्रवंशी और उपाध्यक्ष के रूप में गणेश तिवारी निर्वाचित होकर सोसायटी के सदस्यों तथा काश्तकारों के प्रति निष्ठा और समर्पणपूर्वक अपने दायित्वों का निर्वाह कर रहे थे, तथा किसान और उनके हित के लिए हर संभव प्रयासरत थे l सफलतम पंचवर्षीय सञ्चालन के संकल्प से ओतप्रोत मंडल के सदस्यों को जिले के समस्त किसान भाइयो का समर्थन और सहयोग भी भरपूर प्राप्त हो रहा था, किसानो की समस्याओं के निराकरण से लेकर कारखाने के विकास को उत्तरोत्तर बढ़ाते हुवे संचालक मंडल की कार्यशैली को काफी सराहा भी गया l संचालक मंडल की दूरदर्शी कार्यशैली बढती लोकप्रियता और विश्वसनीयता कदाचित राजनीति दल को रास नही आई और 28 मई 2020 को पंजीयक सहकारी संस्था रायपुर द्वारा अनधिकृत होते हुए भी राजनितिक और व्यक्तिगत द्वेष के चलते संचालक मंडल के सदस्यों को पद से पृथक कर दिया गया था, भीषण कोरोना महामारी के मध्य किसी को कुछ समझने और वार्ता और बचाव पक्ष में अपना मत रखने का अवसर भी नही दिया गया था , जिसके लिए मंडल सदस्यों द्वारा के साथ- साथ किसानो और कर्मचारियों द्वारा भी उक्त आदेश का पुरजोर विरोध किया गया l

संज्ञान में हो की पर्ची के प्रिंट से सम्बंधित जो आरोप लगाये गये थे वे प्रबंधक और मुख्य गन्ना अधिकारी की देखरेख वाले विभाग है तथा उपरोक्त विभाग से सम्बंधित समस्त आदेश और दस्तावेज़ तैयार करने की सम्पूर्ण जवाबदारी दोनों अधिकारी के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं अस्तु उत्तर देने हेतु इन्हें सम्यक उपस्थित होना इनका नैतिक कर्तव्य बनता हैं l आई टी सेक्टर के विशेषज्ञों से विधिवत व् विशेष जाँच पडताल पर सत्य सामने आया की इस प्रकार के कोई भी पर्ची प्रिंट सम्बन्धी आदेश कार्य उपाध्यक्ष गणेश तिवारी जी द्वारा दिए ही नही गये थे l आश्चर्य की बात यह हैं की इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में छानबीन पूछताछ करने पर पता चला विभिन्न विभागों में लम्बे समय से कार्यरत शासकीय कर्मचारियों व् तकनीकी विभाग के जानकारों की माने तो किसी ने आर्थिक अनियमितता व् शक्कर की रिकव्हरी से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कमी के सम्बन्ध में कभी भी संस्था के उपाध्यक्ष तिवारी जी को दोषी नही माना और ना ही इसके लिए उनको को उत्तरदायी ठहराया l फिर कैसे सदस्यों को तथ्यहीन और बिना प्रमाण और न्यायालयीन सुचना के आदेश जारी करते हुए उन्हें पद से पृथक कर देने के पीछे क्या मंसा होगी यक्ष प्रश्न हैं ? मंडल सदस्यों द्वारा दस्तावेजों का मांग किया गया ताकि आरोपों की बारीकी से अध्ययन किया जा सके , कुछ दस्तावेज़ असंगत के आधार अस्वीकार आधारहीन तरीके से किया जाना शेष अन्य दस्तावेजों को कब प्रदाय किया गया हैं आदेश पत्र में स्पष्ट उल्लेख नही हैं l न्यायालय ने कहा की बचाव से वंचित करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हैं l विचारण न्यायालय द्वारा स्वयं आरोप लगाकर स्वयं के द्वारा आदेश पारित करना भी नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का सर्वथा उल्लंघन हैं l सहकारी पंजीयक संस्थान नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पालन न करते हुए क्षति और आर्थिक नुकसान जैसे गंभीर आरोप में खुद मनगढ़ित आदेश पारित करना विधि सम्मत नही हैं l न्यायिक प्रक्रिया के तहत न्यायालयीन आदेश पारित न कर कार्यालयीन (प्रशासनिक) आदेश पारित करना भी विधि सम्मत न होने से आदेश को निरस्त किया जाता हैं l तथा भारतीय संविधान में 97 संसोधन के फलस्वरूप सहकारी और सोसायटी अधिनियम 1960 के प्रावधानों के अंतर्गत सहकारी संस्था के किसी निर्वाचित पदाधिकारी को पांच वर्ष के पूर्व अपने निर्वाचित पद से मिथ्या आरोप के आधार पर नही हटाया जा सकता हैं l मंडल के सदस्यों द्वारा जिलाधीश महोदय से लेकर पंजीयक, कारखाना संचालक व् रजिस्टार को पुनः अपने-अपने पद पर प्रतिष्ठित करने सम्बन्धी आवश्यक प्रक्रिया को पूर्ण किया जा रहा हैं l न्यायालय द्वारा समस्त आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया की स्पष्ट है गलत मनसूबे से उपाध्यक्ष तिवारी जी की छवि को किसानो और जनता के मध्य धूमिल करने के प्रयास से यह सब तथ्यहीन भूमिका रची गयी हैं, यहाँ तक ऐसा प्रतीत होता हैं की पंजीयक ने बंद आँखों से बिना अभ्यावेदन व् दस्तावेजो का अवलोकन किये बगैर जाँच अधिकारी के प्रतिवेदन को साक्ष्य मानते हुवे आदेश पारित कर दिया l किसानो के मध्य निर्वाचित मंडल की छवि ख़राब करने के उद्देश्य से किसानो को बरगलाने जैसे तथ्यों को आपसी रंजिस कहते हुवे न्यायालयीन प्रक्रिया में उसे सिरे से खारिज करते हुवे आधारहीन बताया क्योकि जाँच प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार के साक्ष्य फर्जीवाडा के नही मिले l वही संचालक मंडल के सदस्यों से मिडिया की विशेष वार्ता में उपाध्यक्ष गणेश तिवारी द्वारा इसे न्याय की जीत व् सत्य को “परेशान किया जा सकता हैं परास्त नही” कहकर ह्रदय से विधि न्यायपालिका का आभार किया गया, जिन्होंने दूध का दूध और पानी का पानी कर विपरीत भाव रखने वालो के कलुषित मनसूबे को समुचित उत्तर दिया हैं l गणेश तिवारी जी ने पुनः प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष उन किसानो भाइयों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने पुरे इस जांच प्रक्रिया से लेकर निर्णय आने तक उन पर विश्वास कायम करने और उनके प्रति अपना सद्भाव बनाया रखा l वहीँ न्यायलय के आदेश आने के बाद इसे सत्य की विजय के प्रतीक के रूप में गणेश निलयम निवास और कार्यालय में लोगो के बधाई सन्देश और शुभचिंतको के मिलने वालों की खासी भीड़ ने एक बार फिर तिवारी जी के प्रति समर्पित और विश्वास रखने वालो की नीव को सुदृढ़ करने का कार्य किया हैं l विशाल किसान समुदाय द्वारा लगातार अपने चहेते गणेश तिवारी जी को भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना मर्यादित के उपाध्यक्ष के पद पर सत्य के विजय रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए अनुरोध किया जा रहा हैं ताकि उनके हित और अधिकार के लिए लड़ने वाले शख्शियत को पुनः सम्मान और अधिकार दिला सके l

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