विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष की लड़ाई में नगर के प्रतिष्ठित व्यापारी परेशान -नंदकिशोर राणा

बीजापुर – जिला मुख्यालय के नया बस स्टैंड के समीप में नव निर्माण कॉम्प्लेक्स (46 दुकान)की नीलामी को एक बार फिर रद्द कर दिया गया। गुरुवार को नगर पालिका परिषद द्वारा दुबारा नव निर्मित दुकानों की नीलामी की जा रही थी जिसे पार्षदों ने आकर उस बोली को रुकवा कर नीलामी को स्थगित कर दिया । जिसके बाद नगर पालिका परिषद के अंदर इन दुकानों की नीलामी को लेकर नगर अध्यक्ष और पार्षदो के बीच नीलामी की बहस होता रहा उसके बाद व्यापारियों के बीच भी माहौल गरमाया रहा। नगर अध्यक्ष का कहना है कि बार-बार व्यवसायियों को बुलाकर स्थगित करना ठीक नहीं है। कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि छोटे व्यापारियों के लिए छोटी दुकानों का व्यवस्था किया जा रहा है ।

नीलामी की बार-बार स्थगित होने की वजह से व्यापारी भी आहत होकर नगर पालिका में होने वाली आगामी नीलामी में भाग नहीं लेने के साथ अमानत राशि वापस लेने की बात कह रहे हैं । व्यापारियों ने कहा कि स्थगित की सूचना कम से कम पहले दे देना चाहिए। इस तरह बिना पूर्व सूचना के दूसरी बार नीलामी की बोली को स्थगित कर दिया गया है जोकि न्यायोचित नहीं है ।

वहीं नगर पालिका के पार्षद नंदकिशोर राणा ने आरोप लगाते हुए कहा विधायक और नगरपालिका अध्यक्ष के बीच की लड़ाई का खामियाजा हमारे व्यापारी भाइयों को भुगतना बार-बार पड़ रहा है ।करोड़ों की लागत से बने दुकानों का निर्माण को लेकर नगर पालिका परिषद ने लाखों रुपए के बैनर पोस्टर के साथ रोड़ में बड़े-बड़े होर्डिंग विज्ञापन लगाकर जनता का पैसा का दुरुपयोग कर रहे हैं । दुकानों की शासकीय बोली 36 लाख रखा गया है इतनी बड़ी रकम होने से स्थानीय व्यापारी और आदिवासी बेरोजगार इन दुकानों से वंचित रह जाए। यह पूरी तरह से साजिश के तहत आदिवासी व्यापारियों को नीलामी से दूर रखने कर लिए किया गया है। क्षेत्रीय विधायक और नगर पालिका अध्यक्ष अपने चहेते लोग को दुकान दिलाने के लिए बार-बार दुकानों की नीलामी स्थगित करा रहे हैं। साथ ही नन्द किशोर राणा ने आरोप लगाया कि स्थानीय व्यापारी और बेरोजगारों ने विधायक विक्रम शाह मंडावी और नगर पालिका अध्यक्ष के पास में इन दुकानों की शासकीय बोली 36 लाख को लेकर अपनी समस्या रखी थी किन्तु विधायक ने इनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया। चार बड़े दुकानों की नीलामी में भी आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया जा रहा है इसकी वजह से अन्य वर्गों को इसका फायदा नहीं मिलेगा ।

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