छत्तीसगढ़ में 53 से 58 सीटें जीतेगी कांग्रेस
फिलहाल भाजपा के खाते में रहेंगी महज 28 सीटें
बसपा को 2 और जनता कांग्रेस को 1 सीट, आप काटेगी दो तरफा वोट
नए मतदाता कर सकते हैं नतीजों में भारी उलटफेर
गांवों में कांग्रेस को, तो शहरों में भाजपा को बढ़त
रायपुर :- छत्तीसगढ़ विधानसभा के चौथे चुनाव में 90 में से 68 सीटें जीतकर इतिहास रचने वाली कांग्रेस आज की स्थिति में पांचवें चुनाव में आसानी से बहुमत हासिल कर रही है। सीटें कम अवश्य हो जाएंगी, लेकिन कांग्रेस सम्मानजनक तरीके से सरकार बना सकती है। राष्ट्रीय समाचार एजेंसी आरएनएस के सर्वे के अनुसार मौजूदा हालात में कांग्रेस 53 से 58 सीटें जीतने की स्थिति में है। वहीं भाजपा को 25 से 28 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। बहुजन समाज पार्टी 2 और जनता कांग्रेस 1 सीट की उम्मीद कर सकती है। यदि कोई तगड़ा राजनीतिक दांवपेंच सामने आया तो जनता कांग्रेस का खाता खुलने में संशय की स्थिति से इंकार नहीं किया जा सकता। छत्तीसगढ़ में इस बार आम आदमी पार्टी का शोर बहुत सुनाई दे रहा है, लेकिन ठोस धरातल पर कोई संकेत नहीं है कि यह पार्टी विधानसभा में अपना कोई नुमाइंदा भेज पाएगी। इतना जरूर है कि आप दोतरफा वोट काटेगी। करीबी मुकाबले वाली सीटों पर आप की मौजूदगी उलटफेर का कारण बन सकती है।
छत्तीसगढ़ की जनता की तासीर ऐसी है कि वह कांग्रेस और भाजपा को छोड़कर किसी तीसरे विकल्प के बारे में नहीं सोचती। आम आदमी पार्टी और सर्व आदिवासी समाज की अपना राज पार्टी का फोकस आदिवासी पट्टी में ज्यादा है, किंतु आदिवासी बेल्ट में कांग्रेस बहुत मजबूत है। यदि आप और सर्व आदिवासी समाज की पार्टी ने कांग्रेस का बड़ा नुकसान किया, तो भाजपा को इसका फायदा मिल सकता है। वैसे वन्य प्रांतर और ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस के प्रति जरा भी मोहभंग नहीं हुआ है। इन क्षेत्रों में पौने पांच साल में कांग्रेस के प्रति भरोसा बढ़ा है क्योंकि कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ग्रामीण छत्तीसगढ़ की कसौटी पर एकदम खरी उतरी है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली तमाम योजनाओं का असर ग्रामीण इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। इसके विपरीत शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस का आकर्षण फीका पड़ गया है। राज्य के पांचवें चुनाव के लिए अब आचार संहिता जल्द ही लागू होने वाली है। चुनाव की सभी व्यवस्थाएं पूरी की जा चुकी हैं। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हो गया है। छत्तीसगढ़ में साढ़े अठारह लाख से अधिक नए मतदाता कांग्रेस- भाजपा में से जिसके लिए वरदान साबित होंगे, वह पार्टी सिकंदर साबित होगी।
हर सीट पर 18 सौ वोटर्स का टटोला गया मन
आरएनएस की सर्वे टीम ने बीते तीन सप्ताह में राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न वर्गों के 18 सौ मतदाताओं का मन टटोला। इनमें महिला, युवा, बुजुर्ग, किसान, मजदूर और निर्धन वर्ग के मतदाताओं के साथ वे नव मतदाता भी शामिल हैं, जो पहली बार अपनी सरकार चुनने तैयार बैठे हैं। सर्वे रिपोर्ट में ऐसे विचार शामिल नहीं हैं, जो स्पष्ट नहीं थे। साफ राय को ही इसमें शामिल है। 51 फीसदी महिलाएं कांग्रेस सरकार को बेहतर मान रही हैं, लेकिन 49 प्रतिशत महिलाएं प्रधानमंत्री मोदी के काम से प्रभावित हैं। तब भी राज्य के स्तर पर उन्हें कांग्रेस पर ज्यादा भरोसा है। युवाओं में मिला जुला प्रभाव है। इनका मानना है कि युवाओं के लिए जितना काम होना चाहिए, उतना न तो भाजपा ने किया और न ही कांग्रेस ने। अभी बेरोजगारी भत्ता मिलना शुरू होने पर युवा संतुष्ट नहीं हैं। 53 फीसदी युवा चाहते हैं कि भत्ता नहीं रोजगार के अवसर मिलना चाहिए। किसानों के बीच कांग्रेस का जबर्दस्त प्रभाव देखा गया। 57 प्रतिशत किसानों ने कांग्रेस सरकार के कामकाज पर संतुष्टि जाहिर की है। खास बात यह भी है कि ग्रामीण इलाकों के गरीब कांग्रेस के अधिक करीब हैं, तो शहरी इलाकों के गरीब कांग्रेस से निराश हैं।
नए वोटर्स में जोश भी, रोष भी
नए मतदाताओं में जोश और रोष दोनों ही नजर आ रहा है। इनकी उम्मीदें ज्यादा हैं, तो शिकायतें भी कम नहीं हैं। कांग्रेस और भाजपा लगभग बराबरी से इसके दायरे में हैं। तब भी 52 फीसदी नए शहरी मतदाता कांग्रेस की सरकार से नाराज हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के 56 प्रतिशत युवा कांग्रेस के पक्ष में हैं।
सीधे सवाल, सीधे जवाब
आरएनएस के सर्वे में सीधे सवाल किए गए और सर्वे में शामिल मतदाओं ने खुलकर सीधे सीधे जवाब भी दिए। सवालों में 5 साल के कार्यकाल पर संतुष्टि, असंतुष्टि, विकास, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्थिति, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं, विधायक का प्रदर्शन, सरकार के नवाचार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे शामिल रहे।
