तीन साल भी नहीं टिकी लाखों खर्च कर बनाई गई बाउंड्री




बकावंड (अर्जुन झा) :- केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं के तहत प्राप्त राशि की किस कदर अफरा तफरी की जाती है, इसके अनेक उदाहरण बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायतों में उपलब्ध हैं। अधिकारियों, सरपंचों, सचिवों और ठेकेदारों ने दोनों सरकारों की योजनाओं को कमाई का जरिया बना लिया है। काम के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। करोड़ों के कार्य लाखों में और लाखों के कार्य हजारों में निपटा दिए जाते हैं और बड़ी रकम की बंदरबांट कर ली जाती है। ऐसा ही कारनामा ग्राम पंचायत गिरोला के सरपंच, सचिव और जनपद पंचायत के अधिकारियों ने कर दिखाया है।

बकावंड जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत गिरोला के आश्रित ग्राम डुरकाबेड़ा में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक शाला स्कूल में राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत कराए गए बाउंड्री वॉल का निर्माण में जमकर धांधली की गई है। इस शाला में अहाता का निर्माण ग्राम पंचायत द्वारा तीन वर्ष पूर्व कराया गया था। इसके लिए केंद्रीय मद से कई लाख रुपए स्वीकृत हुए थे। बाउंड्री वॉल बनाने में जमकर अनियमितता बरती गई थी। टेढ़े मेढ़े और नुकीले पत्थरों से शाला परिसर के चारों ओर लगभग चार फीट ऊंची दीवारें खड़ी कर दी गईं। पत्थरों की मजबूत जोड़ाई नहीं की गई और दीवारें भी आड़ी तिरछी बना दी गई हैं। दीवारें कई जगह से टूट फूट चुकी हैं और ढहने की कगार पर पहुंच गई हैं। गेट का तो अता पता ही नहीं है। दीवारों का प्लास्टर भी नहीं कराया गया है। दीवारों के नुकीले पत्थरों से टकराकर बच्चे घायल होते रहते हैं। यह बाउंड्री वॉल तीन साल भी नहीं टिक पाई। बाउंड्री वॉल की ऊंचाई कम रहने, गेट न होने के कारण स्कूल के विद्यार्थी बाहर निकलकर सड़क पर खेलते रहते हैं। सड़क से गुजरने वाले वाहनों के कारण नौनिहालों की जान पर हमेशा खतरा बना रहता है।

अनजान हैं सीईओ और पीओ
बाउंड्री वॉल निर्माण में सरपंच सचिव ने बड़ा खेल कर दिया और अधिकारियों को कानों कान भनक तक नहीं लग पाई! क्या आधुनिक युग में ऐसा संभव है? अधिकारी तो यही जताने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें बाउंड्री वॉल के बारे कोई जानकारी नहीं है। राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के परियोजना अधिकारी (पीओ) ने साफ कह दिया कि उन्हें बाउंड्री वॉल की कोई खबर ही नहीं है। वहीं जनपद पंचायत बकावंड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने भी इस बारे में अनभिज्ञता जता दी। ग्राम पंचायत के सचिव गिरजा कश्यप से संपर्क करने पर उन्होंने तो मौन धारण कर लिया और कोई जवाब नहीं दिया। अधिकारियों की तथाकथित अनभिज्ञता और सचिव का मौन यह साबित करते हैं कि सबकुछ मिलजुल कर किया गया है। यहां यह बताना लाजिमी है कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत स्वीकृत किसी भी कार्य को परियोजना अधिकारी की सहमति के बगैर अंजाम नहीं दिया जा सकता। ऐसे में बकावंड के परियोजना अधिकारी का डुरकाबेड़ा स्कूल में बाउंड्री वॉल निर्माण से अनजान बने रहना समझ से परे है।

पता करवाता हूं
डुरकाबेड़ा स्कूल के बाउंड्री वॉल के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। पता करवाता हूं कि माजरा क्या है।
-एसएस मंडावी,
सीईओ, जनपद पंचायत बकावंड

मुझे कोई जानकारी नहीं
ग्राम पंचायत गिरोला के डुरकाबेड़ा की प्राथमिक शाला में निर्मित बाउंड्री वॉल के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। निरीक्षण करूंगा।
-कौस्तुभ वर्मा,
परियोजना अधिकारी,
मनरेगा.

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