श्मशान में बिखरे पड़े प्रचीन शिव-मंदिर के अवशेष


पुरातत्व विभाग की उपेक्षा बरकरार


भोपालपटनम् :- तहसील मुख्यालय भोपालपटनम् में बड़े तालाब के पीछे प्रचीन शिव-मंदिर के अवशेष बिखरे पड़े हैं।इन दिनों अपने गृहनगर भोपालपटनम् में प्रवास कर रहे सुप्रसिद्ध साहित्यकार और जनजातीय संस्कृति के अध्येता-लेखक लक्ष्मीनारायण पयोधि ने बताया कि जंगल में श्मशान के रूप में चिह्नित जमीन पर शिवलिंग,नंदी,यक्षणियों,बुद्ध और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ पड़ी हुई हैं।श्री पयोधि के अनुसार इस स्थल पर या इसके आसपास अवश्य कोई प्रचीन शिव-मंदिर अथवा अन्य किसी देवता का भव्य मंदिर रहा होगा।

श्री पयोधि ने बताया कि बचपन से ही बुज़ुर्गों से सुनते रहे हैं कि बड़े तालाब के पीछे कुछ प्राचीन प्रतिमाएँ पड़ी हुई हैं।कुछ मूर्तियाँ वहाँ से उठाकर गुल्लापेटा और भोपालपटनम् के शिव-मंदिर में भी रखी गयी थीं,जो अब भी देखी जा सकती हैं।बड़े तालाब की मेड़ पर एक जटाधारी शैव-प्रतिमा,जिसके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में डमरू है,आधी धँसी हुई है।मेड पर मंदिर की कुछ शिल्प-संरचनाएँ ऊपर सीधी और कुछ उल्टी मिट्टी में दबी हुई दिखायी दीं।देखी जा सकने वाली प्रतिमाओं में शिवलिंग, नंदी,नाग-युगल,यक्षिणी,विशेष मुद्रा में देवी और कुछ मूर्तियों के खंडित शीश और अधोभाग प्रमुख हैं।इसी क्षेत्र में भोपालपटनम् ज़मींदार-परिवार की दो भव्य छतरियाँ भी हैं,जो देखरेख के अभाव में अब जीर्णशीर्ण हो रही हैं।
श्री पयोधि ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के पुरातत्व विभाग द्वारा इस स्थल अपने संरक्षण में लेकर खुदायी करायी जानी चाहिये,ताकि यहाँ दबे पुरातात्विक धरोहर को प्रकाश में लाकर उसे पर्यटन-स्थल के रूप में विकसित भी किया जा सके।श्री पयोधि के अनुसार इस खोज से निश्चततौर पर भोपालपटनम् के गौरवशाली प्राचीन इतिहास के नये पृष्ठ खुलेंगे।श्री पयोधि के इस खोजी अभियान में जिला पंचायत और छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद् के सदस्य बसंत राव ताटी और वरिष्ठ पत्रकार नारायण ताटी भी साथ थे।

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