सबके लिए प्रेरक हैं स्वामी विवेकानंद के आदर्श : मनोज शंकर



जगदलपुर :- स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता। हर आत्मा ईश्वर से जुड़ी है, करना ये है कि हम इसकी दिव्यता को पहचाने अपने आप को अंदर या बाहर से सुधारकर इट्स आल इन द माइंड मतलब कि सबकुछ आपके दिमाग में है। इस थीम का मकसद लोगों को यह समझाना है कि अगर व्‍यक्ति मन में कुछ ठान ले, तो ऐसा कुछ नहीं है, जिसे वो पूरा नहीं कर सकता। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र के समक्ष प्राचार्य मनोज शंकर ने दीप प्रज्वलन एवं पूजा अर्चना कर की। कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिक्षिका सुकृति ठाकुर ने युवा दिवस व इस वर्ष के विषय आल इन माइंड के बारे में चर्चा की। शिक्षिका सुप्रिया डे ने विवेकानंद जी की जीवनी के बारे में बच्चों को बताया। प्राचार्य ने बच्चों एवं शिक्षकों को विवेकानंद जी द्वारा अपने जीवन काल में किए गए अच्छे कार्यों के बारे में बताते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के वक्तव्य का आम जनमानस और खासकर युवाओं के मनो मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता था। शिकागो में दिए गए उनके भाषण से बेहतर उदाहरण नहीं मिल सकता। 11 सितंबर 1893 को जब शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म पर अपने प्रेरणात्मक भाषण की शुरुआत उन्होंने मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों के साथ की, तो बहुत देर तक तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही।स्वामी विवेकानंद सही अर्थ में युवाओं के प्रेरणास्त्रोत और आदर्श हैं। उन्हें उनके ओजस्वी विचारों और आदर्शों के कारण ही जाना जाता है। इस तरह के विभिन्न उदाहरण रखते हुए प्राचार्य मनोज शंकर ने विद्यार्थियों को सदमार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्य के उद्बोधन पश्चात सभी बच्चों एवं शिक्षकों ने स्वामी विवेकानंद की विचारधारा को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

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