इस वर्ष भी बस्तर सम्भाग के प्रथम मेले को लगा कोरोना का ग्रहण, नही भर पाया इतिहासिक कोदई माता मेला, क्षेत्रवासी हुए मायूस

कोविड नियमों का पालन करते भक्तों ने किये माता के दर्शन, यही से होती है बस्तर में मेले-मड़ई की शुरूआत

बीजापुर :- जिला मुख्यालय से लगे ईटपाल पंचायत के जैतालूर में मंगलवार को मां कोदई माता का दरबार भक्तों के जयकारे से गूंज उठा। प्रतिवर्ष आयोजित इस अनुष्ठान में मां कोदई माता की पूजा-अर्चना के साथ तीन दिनों तक मेला भरने की परंपरा है, हालांकि कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामलों के मद्देनजर इस वर्ष जैतालूर में ऐतिहासिक मेला भर नहीं पाया। जिसे लेकर भक्तों में उदासी छायी रही, हालांकि माता के दरबार में मत्था टेकने भक्त जरूर पहुंचे थे।

विदित हो कि बीजापुर जिला मुख्यालय से लगे जैतालूर गांव में कोदई माता का एक प्राचीन मंदिर स्थित है। जहां प्रतिवर्ष तीन दिनों का मेला भरता है। यह मेला बस्तर अंचल में आयोजित मेलों-मड़ई में सर्वप्रथम है। जैतालूर मड़ई के साथ ही बस्तर में मेलो-मड़ई का आगाज हो जाता है। सालों से देवी के पुजारी का काम भोयर परिवार के वंशजों के द्वारा ही किया जाता है। मान्यता है कि भक्त माता के दरबार में जो मन्नत रखते हैं, वह पूरी होती है। मेला कुल तीन दिनों का होता है। पहले और दूसरे दिन कोदई माता के छत्र को ग्राम भ्रमण कराया जाता है। मेले से जुड़ी कई रस्में हैं, जिनका निर्वहन उल्लास के साथ किया जाता है, परंतु कोविड संक्रमण के खतरे के चलते इस वर्ष आयोजन को भव्य रूप नहीं दिया जा सका। मंदिर परिसर में भक्तों का पहुंचने का सिलसिला सुबह से जारी था, इसे देखते हुए पुलिस कर्मियों द्वारा बारम्बार कोविड नियमों का पालन करने की समझाइश दी गई।

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