अरविंद नेताम के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने पर तूफान; दीपक बैज के बयान पर मंत्री केदार कश्यप का पलटवार

रायपुर। आरएसएस मुख्यालय में पूर्व कांग्रेस नेता अरविंद नेताम के उद्बोधन पर सियासत शुरू हो गई है। एक तरफ छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि अरविंद नेताम आरएसएस की भाषा बोल रहे हैं, तो दूसरी ओर साय सरकार में मंत्री केदार कश्यप ने पलटवार करते हुए कहा कि बैज ने पांच साल बस्तर में चर्च खुलवाने में लगा दिए।
दिग्गज आदिवासी नेता अरविंद नेताम के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर मुख्यालय में दिए गए उद्बोधन ने छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि आरएसएस के संपर्क में आने के बाद अरविंद नेताम की बोली बदल गई है। उन्होंने कहा कि आरएसएस कभी भी आदिवासियों के पक्ष में नहीं रही। संघ की विचारधारा बस्तर के आदिवासी कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

नेताम की बातों में गहराई
वहीं दूसरी ओर मंत्री केदार कश्यप ने दीपक बैज पर अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान बस्तर में चर्च खुलवाने के साथ लगातार धर्मांतरण को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब कार्रवाई करनी थी, उस समय कांग्रेस सरकार और दीपक मुंह में दही जमाए बैठे थे। कांग्रेस अवैध धर्मांतरण करने वालों के साथ खड़ी रहती थी। संघ राष्ट्रीय भावनाओं को लेकर काम करती है। सामाजिक रूप से सभी चाहते हैं कि अवैध धर्मांतरण रुकना चाहिए। अरविंद नेताम की बातों में दम और गहराई है।

धर्मांतरण बड़ी समस्या
बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय में आयोजित कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए धर्मांतरण को सबसे बड़ी समस्या बताया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ मिलकर इसका समाधान निकालने की बात कही थी।
नेताम ने कहा “मैं संघ और सरसंघचालक को आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि मुझे मुख्य अतिथि के रूप में सम्मान दिया। मैं पहली बार आया हूं। यहां मुझे बहुत कुछ समझने के लिए मिला। संघ का शताब्दी वर्ष है। संघ ने देश की एकता अखंडता और समरसता के लिए बहुत बड़ा काम किया है। मेरी नज़र में संघ ही एकमात्र ऐसी संस्था है जो धर्मांतरण रोकने में हमारी मदद कर सकती है, क्योंकि संघ यह काम कई वर्षों से कर रहा है।हम सभी यहीं के हैं, इसी माटी के हैं, कोई बाहर का नहीं है।

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