क्या छत्तीसगढ़िया प्रोफेसर्स कुलपति बनने लायक नहीं हैं: पीसीसी सचिव दुर्गेश राय

जगदलपुर। प्रदेश कांग्रेस के सचिव दुर्गेश राय ने एक बयान जारी कर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, सच ये है कि तथाकथित ‘सर्च कमेटियों’ के अस्तित्व में होने के बाद भी अधिकतर कुलपतियों के चयन का आधार मेरिट न होकर कुछ और हो गया है। यही वजह है कि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर के कुलपति शैक्षणिक पदों की भर्ती में भारी भ्रष्टाचार करने के बाद भी बचे हुए हैं और सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। जबकि राज्य शासन को इसके लिए विशेष अधिकार प्राप्त है।
कांग्रेस नेता दुर्गेश राय ने सरकार से सवाल किया है कि जगदलपुर विवि के कुलपति मनोज श्रीवास्तव को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? उन्होंने कहा यही वजह है कि इस तरह के कुलपतियों को अब एजेंट की तरह उपयोग कर उन्हीं के माध्यम से अन्य प्रदेशों से आयातित लोगों को एक के बाद एक कर प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह तरीका छत्तीसगढ़ के योग्य बुद्दिजीवी प्राध्यापकों के अपमान जैसा है। बावजूद आश्चर्य है कि साय सरकार मूकदर्शक बन कर तमाशा देख रही है। उन्होंने इस पूरे मामले में क्रिकेट के एक चर्चित खिलाड़ी से मिलता-जुलता नाम जडेजा का उल्लेख करते हुए कहा- इस व्यक्ति की भूमिका को लेकर जगदलपुर में भी चर्चा खूब हो रही है। जिसे यह सरकार प्रतिनियुक्ति में बाहर से ला रखी है, तो क्या मनोज श्रीवास्तव को इसका संरक्षण तो नहीं है, जो बचा ले रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बिलासपुर के एक विश्वविद्यालय में हाल ही में एक नया बाहरी खिलाड़ी लाया गया है वह भी इसी के द्वारा चयनित खिलाड़ी तो नहीं? इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। प्रदेश कांग्रेस सचिव दुर्गेश राय आज अन्य प्रदेश के लोगों को छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों में लगातार एक के बाद एक कुलपति बनाए जाने को लेकर काफी मुखर नजर थे। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि कुलपति की नियुक्तियों में अनावश्यक विलंब कर भ्रष्टाचार का रास्ता ढूंढा जा रहा है। उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है, जब विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति 10-10 माह बीत जाने के बाद भी कुलपतियों की नियुक्ति नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साय सरकार में उच्च शिक्षा को हाय लग गई है और भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि साय सरकार में विश्वविद्यालय का कुलपति ही भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं हैं बल्कि कुलपतियों की नियुक्ति में ही भ्रष्टाचार समाहित है। उन्होंने कहा कि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर के कुलपति द्वारा विवि में किए गए शैक्षणिक पदों में भ्रष्टाचार के किस्से व सबूत जिसमें लेन देन की बातें भी आ रही है, पिछले कई महीनों से जगदलपुर से लेकर विधानसभा तक छाया रहा।जबकी सरकार के पास कार्रवाई करने विशेष अधिकार भी प्राप्त है। बावजूद सरकार जांच-जांच में उलझी हुई है। उन्होंने सवाल किया कि कुलपति को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है? राजभवन का तो नहीं? इसलिए साय सरकार नतमस्तक है? दुर्गेश राय ने कहा कि बुद्धिजीवियों के बीच कुछ महीनों से इस बात की खूब चर्चा है कि प्रदेश में एक नया खिलाड़ी जडेजा का पदार्पण हो गया है, जिसने पूरे सिस्टम को हाइजेक कर लिया है। उन्होंने बताया यह खिलाड़ी अहमदाबाद के फील्ड का खिलाड़ी है, पर सरकार की मेहरबानी से नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर प्रशासनिक पद पर नियुक्त है। उन्होंने पूछा सरकार क्या इस बात की भी जांच कराएगी की जो फील्ड का व्यक्ति है, उसे प्रसाशनिक पद ओएसडी बनाये जाने का मकसद ही कुलपतियों की नियुक्तियों को प्रभावित करने से था।प्रदेश कांग्रेस सचिव दुर्गेश राय ने कुलपतियों की नियुक्ति में प्रदेश के प्रोफेसरों की घोर उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक रैकेट है, जो इसके पीछे काम कर रहा है। उन्होंने संभावना व्यक्त करते हुए कहा- उन्हें जो सूचना मिल रही है उसके मुताबिक अन्य प्रदेश के आयातित केंडिडेट से कुलपति नियुक्त करने के एवज में एक मोटी रकम ली जा रही है और यही चलन विश्वविद्यालय में कुलपतियों द्वारा भ्रष्टाचार करने का कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तो प्रदेश में भाजपा के सबसे बड़े नेता हैं और उन्हीं के 15 साल के मुख्यमंत्री रहते अधिकांश विवि अस्तित्व में भी आए, ऐसे में उन्हें निश्चित तौर पर आज भी उच्च शिक्षा के विकास को लेकर चिंता होती होगी, उन्हें भी प्रदेश के प्राध्यापकों को कुलपति के रूप में देखने कि इच्छा होती होगी। ऐसे में जब धड़ल्ले से आगरा के लोगों को यहां कुलपति नियुक्त किया जा रहा है तो इसका वे विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं? उन्हें यह भी इनपुट मिल रहा होगा कि इस पूरे घटनाक्रम में बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा है। बावजूद चुप हैं। उन्होंने मांग की है कि साय सरकार इसमें अंकुश नहीं लगा सकती या जांच नहीं करा सकती है तो प्रदेश के उन तमाम प्रोफेसरों की सूची उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा से जारी करा दे कि कृपया आप कुलपति पद के योग्य नहीं हैं इसलिए आवेदन न करें। दुर्गेश राय ने दावे के साथ कहा कि प्रदेश में आज सामान्य और पिछड़ा वर्ग तो छोड़िए अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के ऐसे कई योग्य प्रोफेसर हैं, जिनके सामने अन्य प्रदेश के प्रोफेसर कहीं नहीं टिकते। बावजूद इस वर्ग की प्रतिभाओं को छत्तीसगढ़ में कभी अवसर नहीं मिला।

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