कन्वर्जन के विरोध में सर्व समाज ने निकाली जन आक्रोश रैली, कड़ी कार्रवाई की मांग की
अर्जुन झा
जगदलपुर। बस्तर संभाग के कांकेर जिले के दुर्गूकोंदल ब्लॉक में धर्म परिवर्तन गतिविधियों के विरोध में आदिवासियों और सर्व समाज ने जन आक्रोश रैली निकाल कर प्रदर्शन किया।रैली में शामिल लोगों ने धर्मांतरण के खिलाफ नारेबाजी की और प्रशासन से इस मुद्दे पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की।

प्रदर्शन के बाद कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में ईसाई धर्म परिवर्तित परिवार के शव को निर्धारित ईसाई कब्रिस्तान में दफनाने एवं कन्वर्जन में उपयोग किए जाने वाले चर्च को हटाने की मांग की गई है। कहा गया है कि ब्लाक दुर्मूकोंदल में ईसाई धर्मान्तरित परिवार सदस्यों की मृत्यु उपरांत उनके शवों को निर्धारित ईसाई कब्रिस्तान में ही दफनाया जाए, कहीं भी गांव में दफनाने नहीं दिया जाएगा।

रमेश बघेल वर्सेस स्टेट ऑफ छत्तीसगढ़ और अन्य के केस में सर्वोच्च न्यायलय द्वारा दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि दुर्गुकोंदल आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और भारत के संविधान के पांचवी अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जहां पेसा अधिनियम 1996 लागू है जिसके अंतर्गत ग्रामसभा के माध्यम से रूढ़ीगत परम्परा एवं प्रथा के अनुसार अपने ग्राम में स्वशासन का अधिकार है। पूर्व में ग्राम दुर्दूकोंदल में स्थापित चर्च धार्मिक सद्भावना के मद्देनजर किसी प्रकार का गांव के द्वारा विरोध नहीं किया गया था लेकिन वर्तमान में कुछ समय से दुर्गुकोंदल में स्थापित चर्च का धर्मान्तरण क्रियाकलाप में उपयोग किया जा रहा है। वहां पर भोले भाले लोगों को दुःख निवारण का झांसा देते हुए उनका धर्म बदलने का कार्य किया जा रहा है। इससे दुर्दूकोंदल क्षेत्र में आदिवासियो की संस्कृति एवं सांस्कृतिक पहचान को खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गुकोंदल के चर्च पर नियंत्रण रखा जाए, कोई भी प्रलोभन देकर अवैध धर्मान्तरण का कार्य न हो। यदि क्षेत्र में चर्च द्वारा पुनः झांसा देकर धर्मान्तरण का कार्य किया गया तो हम ग्रामसभा दुर्मूकोंदल के माध्यम से प्रस्ताव तहसील कार्यालय को गांव से बाहर कर देंगे। ज्ञापन मेंजिला पंचायत सदस्य देवेन्द्र टेकाम, शिवप्रसाद नरेटी, धरम सिंह नरेटी, रमेश दुग्गा,झाडू राम, रामचंद्र समेत अन्य लोगों के हस्ताक्षर हैं।
