“ग्रेसियस नर्सिंग कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस की धूम”

कवर्धा,,,भारतीय स्वतंत्रता दिवस की 78वीं वर्षगांठ पर नेवारी ग्राम में स्थित ग्रेसियस नर्सिंग कॉलेज में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया।मुख्य अतिथि के रूप में जिला चिकित्सालय कवर्धा की मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर अनुशिका यदु,कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में सेवा निवृत्त राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त व्याख्याता एवं पुरातत्वविद् श्री आदित्य कुमार श्रीवास्तव तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त व्याख्याता एवं पर्यावरण से जुड़े श्री पंकज सिंह ठाकुर शोभायमान रहे।सभी अतिथियों का कॉलेज परिवार ने तिलक लगाकर आरती और पुष्पवर्षा से स्वागत किया।

झण्डारोहण और राष्ट्रगान के पश्चात् कॉलेज के स्थानीय व्यवस्थापक श्री राजेश कुमार पांडेय ने स्वागत उद्बोधन दिया और संस्था की जानकारी दी।छात्राओं ने स्वागत नृत्यगीत प्रस्तुत किया।अपने संबोधन में विशिष्ट अतिथि श्री पंकज सिंह ठाकुर ने स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ.अनुशिका यदु ने अपने चिकित्सा शिक्षा से संबंधित जानकारी देकर विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “चिकित्सा कार्य में नर्सों के योगदान को भुलाया नही जा सकता,इनके बिना एक डॉक्टर अधूरा है,आपलोग सेवा के पर्याय हैं।”कार्यक्रम केअध्यक्ष श्री आदित्यकुमार श्रीवास्तव ने संबोधित करते हुए कहा कि “झण्डा फहराना और झण्डारोहण करना कब और क्यों होता होता है यह प्रत्येक व्यक्ति को जानना चाहिए।साथ ही आपने बताया कि 55वर्ष पूर्व कवर्धा में स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाए जाते थे।प्रभातफेरी और गीत “भारत देश हमारा प्राणों से प्यारा” के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता था।
हर्ष और उल्लास का दौर जब प्रारंभ हुआ तो तालियों की गूंज से हॉल उत्साह से भर गया क्योंकि छात्र भाषण देते गए और छात्राएं देशभक्ति गीत, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को अपने नृत्य गीत के माध्यम से आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को प्राचार्य (नर्सिंग)श्री सैमुअल एवं प्राचार्या (फार्मेसी) श्रीमती स्वाति दुबे ने स्मृति चिन्ह भेंट किया।आभार प्रदर्शन प्राचार्या(फार्मेसी) श्रीमती स्वाति दुबे ने किया।एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम के अंतर्गत 11 पेड़ अतिथियों और स्टाफ ने रोपित किए।कार्यक्रम को सफल बनाने में शाश्वत पांडेय, मनीषा, भारत साहू के साथ साथ नर्सिंग और फार्मेसी स्टाफ के सभी सदस्यों की प्रमुख भूमिका थी।

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