गटक गए अमृत सरोवर योजना के 100 करोड़ रुपए, अब जांच में लीपापोती
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले की कोंटा जनपद के दो दर्जन से अधिक पंचायतों में वर्ष 2021 से 2023 के दौरान अमृत सरोवर तालाब निर्माण एवं अन्य कार्यों में फर्जीवाड़ा कर 100 करोड़ रूपये से अधिक के भ्रष्टाचार के मामले में अब केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय एक्शन मोड में आ गया है। इस खेल को पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के करीबी अधिकारियों ने अंजाम दिया है। मनरेगा के तहत पहले से बनाए गए तालाबों को अमृत सरोवर योजना के तहत निर्मित बताकर करीब सवा अरब रुपयों की बंदरबांट कर ली गई है। केंद्र सरकार की इन दोनों योजनाओं में हुए इस बड़े भ्रष्टाचार को जयराम पोयाम और एक अन्य तकनीकी सहायक तथा एक पंचायत सचिव की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतों से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि इन तीनों कर्मचारियों को इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी थी, इसीलिए उनकी हत्या करा दी गई।
मामले की शिकायत कोंटा जनपद में पदस्थ रहे तकनीकी सहायक जयराम पोयाम के परिजनों ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव शैलेंद्र सिंह से की है। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय सचिव ने छत्तीसगढ़ के मनरेगा आयुक्त को जांच कराने के निर्देश देते हुए रिपोर्ट तलब की है। मनरेगा आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा ने सुकमा कलेक्टर को जांच के आदेश दिए हैं। खबर है कि पूर्व आबकारी मंत्री के करीबी अधिकारी को बचाने जांच में खानापूर्ति कर रिपोर्ट भेजे जाने की तैयारी है।शिकायतकर्ता ने आरोप
में दो तकनीकी सहायकों एवं एक पंचायत सचिव की हत्या कराए जाने का भी आरोप लगाया है। इन हत्याओं के तार पंचायतों में हुए कार्यों के मूल्यांकन और इस बड़े भ्रष्टाचार से जुड़े होने की बात कही जा रही है। कोंटा जनपद पंचायत के पूर्व सीईओ और जिला पंचायत में पदस्थ एक सहायक परियोजना अधिकारी की संलिप्तता का आरोप भी लगाया गया है। इतने गंभीर आरोपों के बाद भी जांच में खानापूर्ति कर ऐसे अधिकारियों को जिले से बाहर नहीं किया जाना अधिकारियों और नेताओं की संलिप्तता की ओर इशारा करता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोंटा में तकनीकी सहायक रहे स्व. जयराम पोयाम के परिजनों ने 25 नवंबर 2024 को भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव से कोंटा जनपद में अमृत सरोवर योजना के नाम पर वर्ष 2021 से 2023 तक कागजों पर कार्य दिखाकर भ्रष्टाचार किए जाने के शिकायत की गई है। मामले में केंद्रीय लोक शिकायत निवारण निगरानी प्रणाली के अंतर्गत 19 मई 2025 को शिकायत दर्ज की गई है। केंद्रीय सचिव ने छग शासन के मनरेगा आयुक्त को पत्र भेज जांच के निर्देश दिए थे। उच्च अधिकारी से मिले आदेशों को पालन करते हुए मनरेगा आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा ने 21 मई 2025 को सुकमा कलेक्टर को पत्र भेजकर जांच के आदेश दिए थे। मनरेगा आयुक्त के निर्देशों पर कलेक्टर सुकमा ने मामले की जांच के लिए जिला पंचायत सीईओ को निर्देशित किया है। मनरेगा कार्यपालन अभियंता द्वारा मामले की जांच की जा रही है। बयान के लिए शिकायतकर्ता को 8 जुलाई को सुकमा जिला पंचायत कार्यालय में तलब किया गया।
दो दर्जन पंचायतों में फर्जीवाड़ा
सुकमा जिले के कोंटा जनपद क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक पंचायतों में अमृत सरोवर (तालाब) निर्माण के नाम पर राशि की जमकर बंदरबांट की गई है। पूर्व में मनरेगा के तहत निर्मित तालाबों को कई स्थानों पर अमृत सरोवर योजना का तालाब होना बताकर राशि की बदरबांट की गई है। जिसमें मजदूरों के नाम पर नगद भुगतान करने का बड़ा खेला किया गया है। इन पंचायतों में गुमोड़ी, एलमपल्ली, मेहता, बुरकलंका, कुंदेड़ जगरगुंडा, कामाराम, मुकरम, मिसमा, सामसेठी, एर्राबोर, गोगुंडा, केरलापेंदा, पुनपल्ली, नागराम, एलमागुंडा, पोलमपल्ली, डब्बाकोंटा चिंतागुफा, बंडा, पोटकलपल्ली, मुलाकिसो, मोरपल्ली आदि पंचायतों में भ्रष्टाचार का खुला खेल हुआ है।
जांच में खानापूर्ति
केंद्रीय सचिव से मिले आदेश के बाद भी जांच के नाम पर महज औपचारिकता निभाई गई है। इसकी सही मायने में जांच हुई तो कोंटा जनपद के पूर्व सीईओ के कारनामे खुल सकते हैं और भ्रष्टाचारियों का चेहरा बेनकाब किया जा सकता है। खास बात है कि पूर्व मंत्री के करीबी अधिकारी को बचाने जांच में औपचारिकता बरती गई है। फर्जीवाड़ा करने वाले अधिकारी के संरक्षण में ही दफ्तरों में जांच रिपोर्ट तैयार की गई औपचारिकता पूरी किए जाने की खबर है।जिम्मेदार अफसर चुप्पी साधे हुए हैं और कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जबकि कई पंचायतों की जांच रिपोर्ट उनके टेबल पर पड़ी है। पूर्व सरकार के मंत्री के करीबी को बचाने की खातिर एक्शन लेने से अधिकारी बच रहे हैं। जिन लोगों की संलिप्तता उन फाईलों से जुड़ी है ऐसे अधिकारी आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यही कारण है कि जांच रिपोर्ट फाईलों में ही कैद होकर रह गई है।
दोषियों पर होगी कार्रवाई
मनरेगा आयुक्त छत्तीसगढ़ शासन तारन प्रकाश सिन्हा ने बताया कि मामले की शिकायत केंद्रीय सचिव से की गई है, जिसकी जांच के लिए सुकमा कलेक्टर को निर्देशित किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी संलिप्त पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
लखमा तो गयो, पर ये रह गयो
पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा भले ही करोड़ों रुपयों के आबकारी घोटाले के मामले में अभी जेल में हैं, मगर उनके गृह जिले सुकमा में उनके भक्त अधिकारी आज भी जमे हुए हैं। ये अधिकारी अब भी भ्रष्टाचार को उसी अंदाज में अंजाम दे रहे हैं, जैसा कि लखमा की छत्रछाया में देते रहे थे। तत्कालीन मंत्री कवासी लखमा के संरक्षण में ही अधिकारियों ने सौ करोड़ के खेला को अंजाम दिया है। इसके बावजूद ये अधिकारी अभी भी सुकमा जिले में ही जमे हुए हैं। इससे लोगों में अब भ्रम है कि वर्तमान भाजपा सरकार भी इन दोषियों को बचा रही है।
