पेड़ों के साथ इंद्रावती नदी को भी लील रहे हैं लकड़ी माफिया!
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों की नाक के नीचे संभाग मुख्यालय जगदलपुर से लगी ग्राम पंचायत आसना के आश्रित ग्राम तामाकोनी में इंद्रावती नदी के किनारे स्थित सागौन के पेड़ों की धड़ल्ले से कटाई हो रही है।इस स्थान पर वन विभाग द्वारा कुछ वर्षों पूर्व सागौन एवं अन्य प्रजाति के पौधों का प्लांटेशन किया गया था बड़े भू भाग पर लगे हुए पौधे अब पेड़ों का आकार ले चुके हैं। यही पेड़ अब तस्करों द्वारा काटे जा रहे हैं।
इन पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग की है, लेकिन विभाग यह जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहा है। वर्तमान में बड़ी संख्या में हरे भरे सागौन के पेड़ों पर मानों किसी की नजर लग गई है। ये पेड़ सुरक्षा के अभाव के चलते लगातार कटते चले जा रहे हैं। अब तक सैकड़ो की संख्या में पेड़ों की कटाई तस्करों के द्वारा की जा चुकी है बावजूद इसके वन विभाग की लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही है।

नदी तटों का तेजी से कटाव
इंद्रावती नदी में जगह-जगह बन चुके एनीकेट्स के चलते नदी का प्राकृतिक बहाव लगातार प्रभावित हो रहा है साथ ही नदी की चौड़ाई भी असामान्य रूप से बढ़ रही है। नदी के किनारे हुए पूरे प्लांटेशन क्षेत्र में पेड़ों के चलते नदी में आने वाली बाढ़ के बीच भी यह हरे भरे पेड़ मिट्टी का कटाव रोकने में बड़ी भूमिका निभाते आए हैं। यही वजह है कि पूरे प्लांटेशन वाले क्षेत्र में नदी के अन्य भाग की अपेक्षा मिट्टी कटाव कम हो पाया है। अगर यह पूरे पौधे पेड़ों का आकार लिए होते तो वन विभाग के लिए भी राजस्व प्राप्ति का बड़ा जरिया बनते परंतु यह विडंबना है कि वन विभाग की लापरवाही के चलते ही लगातार पेड़ों की संख्या कम हो रही है। वर्षाकाल के दौरान कटे हुए पेड़ों के कूपों से निकले पतले शाखों को भी वन विभाग की लापरवाही के चलते ग्रामीण काटकर लगातार ले जा रहे हैं।
बाड़ भी चुरा ले गए लोग
पूरे प्लांटेशन एरिया को सुरक्षित रखने वन विभाग के द्वारा कंटीले तारों की फेंसिंग कराई गई थी। अब तारों की यह बाड़ भी चोरी हो चुकी है। बावजूद इसके वन विभाग लापरवाही बरत रहा है यही वजह है कि पेड़ लगातार कट रहे हैं।
वन विभाग को राजस्व क्षति
बड़ी संख्या में हुए सागौन प्लांटेशन की सुरक्षा के अभाव के चलते कट रहे पेड़ों से विभाग को लाखों के राजस्व के नुकसान की संभावना भी बढ़ गई है।
अगर समय रहते इन पेड़ों की सुरक्षा पर ध्यान न दिया जाए तो वह दिन भी दूर नहीं की पूरा इलाका मैदानी क्षेत्र में तब्दील होता हुआ दिखेगा।
