“माहरा” आदिवासी जनजाति समुदाय को अनुसूचित जनजाति वर्ग में सम्मिलित करने की मांग
जगदलपुर। आज मुरिया दरबार, जगतूगुढ़ा में “माहरा” आदिवासी जनजाति समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन अपर कलेक्टर के माध्यम से सौंपा गया।
ज्ञापन में यह मांग की गई कि “माहरा” आदिवासी जनजाति समुदाय को संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में संशोधन कर अनुसूचित जनजाति वर्ग (Scheduled Tribe) में शामिल किया जाए।
समुदाय के अध्यक्ष महेश स्वर्ण “एबोरिजिनल ट्राइब्स” ने बताया कि “माहरा” जनजाति देश की प्राचीन Aboriginal Tribes में से एक है, जिसका उल्लेख अंग्रेज शासनकाल की जनगणना रिपोर्टों, जिला गज़ेटियरों और ऐतिहासिक अभिलेखों में मिलता है।
उन्होंने कहा कि —
> “हमारी भाषा, संस्कृति, परंपरा और भौगोलिक स्थिति अन्य अनुसूचित जनजातियों के समान है। बावजूद इसके, 1950 के राष्ट्रपति आदेश में हमारी जनजाति को शामिल नहीं किया गया। यह ऐतिहासिक अन्याय अब दूर किया जाना चाहिए।”
ज्ञापन में केंद्र एवं राज्य सरकार से अनुरोध किया गया है कि माहरा आदिवासी जनजाति समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थिति का गंभीरता से अध्ययन कर, अनुसूचित जनजाति में सम्मिलित करने हेतु अनुशंसा की जाए।
इस अवसर पर समाज के अनेक प्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे जिन्होंने समुदाय की एकता और अधिकार की आवाज बुलंद की।
कार्यक्रम के अंत में समाज प्रमुखों ने यह भी कहा कि अगर सरकार शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं करती, तो प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
मांग पत्र सौपे जाने के दौरान महेश स्वर्ण “एबोरिजिनल ट्राइब्स”
अध्यक्ष, माहरा आदिवासी जनजाति समुदाय
बस्तर संभाग, जगदलपुर (छत्तीसगढ़)चाचरी बघेल, संजय पंत कश्यप,फूलसिंह कश्यप हकचंद बघेल, गुड्डी मंडावी कमला दीदी,
एस. एन. सिंह चौहान ,सोनसाय नाग, प्रवीण कुमार बघेल, रमेश कश्यप एवं समुदाय के अन्य गणमान्य लोगों उपस्थित रहे।
