उद्योग के लिए वन विभाग ने तोड़ा कानून!



अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग में कुछ अधिकारी अपने स्वार्थ के लिए नियम कायदों की धज्जियां उड़ाने से भी नहीं चूकते। ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आया है बस्तर के कांकेर जिले से। जहां वन विभाग के अधिकारियों ने एक निजी उद्योग को फायदा पहुंचाने के लिए न सिर्फ वन अधिनियम को ताक पर रख दिया, बल्कि शासन प्रशासन को भी अंधेरे में रखा।
मामला भानुप्रतापपुर पूर्व वनमंडल से जुड़ा है। इस वन मंडल के दुर्गकोंदल क्षेत्र में मेसर्स श्री बजरंग पॉवर एंड इस्पात लिमिटेड रायपुर की माइनिंग लीज में वन संरक्षण अधिनियम 1980 और राज्य सरकार के सुरक्षा निर्देशों के घोर उल्लंघन का एक गंभीर मामला सामने आया है। वन विभाग के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार के साथ मिलकर नियम-विरुद्ध तरीके से ‘भू-प्रवेश’ की अनुमति जारी की, जिससे भ्रष्टाचार और आपराधिक मिलीभगत का संदेह उत्पन्न होता है।शिकायतकर्ता ने इस संबंध में सचिव, वन विभाग छत्तीसगढ़ शासन को शिकायत भेजी है, जिसमें उन्होंने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी और दण्डात्मक कार्रवाई की मांग की है। वन मंडलाधिकारी, उप वन मंडलाधिकारी और परिक्षेत्र अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने माइनिंग प्रकरण में मेसर्स श्री बजरंग पॉवर एंड इस्पात लिमिटेड को नियम विरुद्ध तरीके से भू-प्रवेश की अनुमति दिलाने के लिए वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और विभागीय निर्देशों का गंभीर उल्लंघन किया है। यह मामला तब उजागर हुआ जब उप वन मंडलाधिकारी, पूर्व भानुप्रतापपुर ने कलेक्टर खनिज शाखा को पत्र क्र. 7137, दिनांक 22, 09, 2025 के माध्यम से नियम के विपरीत भू-प्रवेश की अनुमति के लिए झूठी अनुशंसा की।

नियमों की अनदेखी ‘भू-प्रवेश’ की अनुमति जारी करने से पहले यह अनिवार्य था कि विच्छेदित काष्ठ (कटे हुए पेड़ की लकड़ी) का परिवहन पूर्ण हो जाए।आरोप है कि वन अधिकारियों ने जानबूझकर यह तथ्य छुपाया कि मौके से लकड़ी का परिवहन नहीं हुआ है, और गलत निरीक्षण प्रतिवेदन दिया गया। इस तरह कलेक्टर कार्यालय को गुमराह करते हुए, अवैध रूप से नियत समय से पूर्व भू-प्रवेश की अनुमति दिला दी गई। नियमों के इस घोर उल्लंघन के बावजूद, कलेक्टर कार्यालय ने पत्र क्र. 2302, दिनांक 17/ 10/ 2025 द्वारा मेसर्स श्री बजरंग पॉवर एंड इस्पात लि. के लिए भू-प्रवेश की अनुमति जारी कर दी।

विभाग पर उठे गंभीर सवाल
शिकायतकर्ता ने इस घटना को वन और खनिज विभाग के कर्मचारियों के भ्रष्ट मंसूबों का स्पष्ट उदाहरण बताया है। उन्होंने सवाल उठाया है आखिर किस आधार पर वन विभाग अधिकारियों ने नियमों के विपरीत जाकर भू-प्रवेश की अनुशंसा की गई? विच्छेदित काष्ठ के परिवहन पूर्ण होने की गलत जानकारी देकर कलेक्टर कार्यालय को गुमराह करने का उद्देश्य क्या था?
क्या यह कृत्य स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार और ठेकेदार के साथ आपराधिक मिलीभगत की ओर इशारा नहीं करता है। वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी? यह पूरा मामला वन भूमि की सुरक्षा से समझौता, नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही, मिलीभगत का है, जिस पर त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है।

कड़ी कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने इस गंभीर वैधानिक उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। विशेष जांच टीम का गठन कर पूरे मामले की सूक्ष्मता से जांच करा कर सभी संलिप्त अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और मामले की जांच एक विशेष जांच दल द्वारा जल्द पूरी की जाए, ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न होने पाए। कलेक्टर खनिज शाखा द्वारा जारी की गई भू-प्रवेश की अनुमति को तत्काल रद्द किए जाए जब तक कि स्वतंत्र नोडल अधिकारी द्वारा विच्छेदित काष्ठ के पूर्ण परिवहन की पुष्टि न कर दी जाए। दोषी अधिकारियों के विरुद्ध वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा-3 ए के तहत सख्त दण्डात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह शिकायत पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर वैधानिक उल्लंघन का मामला है, जिस पर त्वरित और न्यायोचित निर्णय की प्रतीक्षा की जा रही है।

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