पुष्पा से लेकर मंगल श्रीनु तक हर किरदार है यहां,लाल चंदन की तर्ज पर सागौन की अवैध कटाई और तस्करी का बड़ा खेल, सीमापार होती है लकड़ियां,सौदा तय करते हैं लोकल तस्कर

बीजापुर (रंजन दास):- हाल में भोपालपट्नम के तीन फर्नीचर व्यवसायियों के ठीकानों से भारी मात्रा में बेशकीमती सागौन लकड़ियों की जप्ती से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सागौन तस्करी का मामला फिर से तुल पकड़ने लगा है। बड़े पैमाने पर सागौन की अंतरराज्यीय तस्करी का यह रैकेट हाईप्रोफाइल है। वन कर्मियों के पहरे के बाद भी उनके नाक तले सागौन गोले कैसे भोपालपट्नम नगर तक पहुंचते हैं और फिर उन्हें बार्डर पार कराने तक एक पूरा चैनल काम करता है। सूत्र बताते हैं कि सागौन वृक्षों की अवैध कटाई मद्देड़ से लेकर पट्नम इलाके तक विस्तारित जंगल में होती आ रही है। जिसमें पेड़ों को स्थानीय लोगों की मदद से कटवाया जाता है। सूत्रों की मानें तो पेड़ कटाई के लिए 42 समूह बने हैं और प्रत्येक समूह में 6 लोग शामिल है। इन्हें 300 रूपए मजदूरी की दर से तस्कर काम पर लगाते हैं। जंगल से लगे कुछ ग्रामीण इलाकों में ही आरा मशीन भी मौजूद होती है। जहां गोले चिरान तैयार किए जाते हैं। यह भी बताया गया है कि चिरान-गोलों की खेफ ना सिर्फ भोपालपट्नम नगर के कुछ ठीकनों तक पहुंचाई जाती है बल्कि सीमावर्ती राज्य से पहुंचने वाले सागौन के सौदागर पेड़ काटने वाली टीमों से संपर्क कर सीधे उनसे चिरान का सौदा करते हैं, इसके अलावा जो लकड़ियां पटनम तक पहुंचाई जाती है, उन्हें रात के अंधेरे में बैलगाड़ियों में लाद कर पहुंचाया जाता है। पेड़ काटने से लेकर बैलगाड़ियों में लादकर पहुंचाने तक अलग-अलग रेट फिक्स होता है। वैसे मद्देड़ से लेकर पटनम के फॉरेस्ट रेंज लम्बे समय से बेशकीमती सागौन वृक्षों की बेतहाशा कटाई का सिलसिला लंबे समय से जारी है। इस पर नकेल कसने में वन अमला कभी कामयाब नहीं रहा। इस दफा बड़ी मात्रा में लकड़ियां बरामद जरूर हुई है, लेकिन कार्रवाई के बाद खुद वन विभाग की कार्यशैली पर उंगलियां उठ रही है।

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