399 जवानों के बलिदान से नक्सलमुक्त हुआ सुकमा



-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर
यूं ही नक्सलमुक्त नहीं हुआ है। इसके लिए हमारे जवानों ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं। बस्तर क्षेत्र वर्ष 1980 के दशक से माओवाद के आतंक एवं हिंसक घटनाओं से प्रभावित रहा है। दशकों तक माओवादी हिंसा ने क्षेत्र के विकास, शांति एवं सामान्य जनजीवन को बंधक बना लिया था। परंतु सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा एवं सर्वोच्च बलिदान और सरकारों की दृढ़ इच्छाशक्ति के परिणाम स्वरूप सुकमा जिला और बस्तर ने इतिहास रचते हुए नक्सल मुक्त सुकमा, नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प को डेड लाइन 31 मार्च 2026 के अंतिम क्षणों आख़िरकार पूर्ण कर ही लिया।
बस्तर का सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिला सुकमा भी अब नक्सल मुक्त हो गया है। इसके पीछे उन जवानों का सर्वोच्च बलिदान निहित है जो अपना घर परिवार छोड़कर बस्तर और छत्तीसगढ़ की माटी की सेवा करने आए थे। कुल 399 जवानों ने अपने प्राणों की आहूति देकर सुकमा को नक्सलमुक्त बनाने में बड़ा योगदान दिया है। इन वीर जवानों का बस्तर सदैव ऋणी रहेगा। सुकमा जिले में शांति, सुरक्षा एवं विकास स्थापित करने के इस लंबे संघर्ष में सुरक्षा बलों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, लगातार माओवादी हमलों, घात लगाकर किए गए आक्रमणों एवं आईईडी विस्फोटों का डटकर सामना किया। इस संघर्ष के दौरान विभिन्न माओवादी घटनाओं में डीआरजी, डीईएफ, एसटीएफ, कोबरा और सीआरपीएफ के 399 वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया तथा लगभग 547 जवान घायल हुए। इन वीर सपूतों के त्याग, समर्पण एवं अदम्य साहस ने आज सुकमा को भयमुक्त और विकास की राह पर अग्रसर किया है। आज जिन क्षेत्रों में कभी माओवादी हिंसा का प्रभाव था, वहां अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, प्रशासनिक सेवाएं एवं विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। यह उपलब्धि केवल सुरक्षा की सफलता नहीं, बल्कि उन अमर शहीदों की प्रेरक गाथा है, जिन्होंने देश की एकता, अखंडता एवं आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।
सुकमा जिला पुलिस ने सभी अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की है तथा उनके परिजनों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है। शहीदों का बलिदान सदैव प्रेरणा देता रहेगा और सुरक्षित, शांत एवं विकसित सुकमा ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। सन 1980 से 31 मार्च 2026 तक सुकमा जिले में कुल 469 मुठभेड़ें और 142 आईईडी
ब्लास्ट घटनाएं हुई। इनमें कुल 399 जवान शहीद हुए तथा 550 जवान घायल हुए।

इन घटनाओं में हुई थी शहादत
गोलापल्ली थाना क्षेत्र में रामन्ना दलम के सशस्त्र नक्सलियों द्वारा पालाचलमा स्थित एसएएफ पोस्ट पर हथियार लूटने और जवानों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से यह हमला किया गया था। जगरगुंडा क्षेत्र के चिन्तलनार से दोरनापाल के बीच पेट्रोलिंग से लौट रही पुलिस टीम पर ग्राम कांकेरलंका नाका के पास नक्सलियों ने हमला किया। इस गोलीबारी में एपीसी तारासिंह, चालक आरक्षक सुरेंद्र और आरक्षक राजकुमार घायल हुए। एसडीओपी कोंटा के नेतृत्व में जा रहे बल के वाहन को नक्सलियों ने इंजरम-भेजी मार्ग पर लैंडमाइन विस्फोट से उड़ा दिया। विस्फोट के बाद नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसका पुलिस ने कड़ा जवाब दिया इस घटना में 6 जवान शहीद हुए थे। थाना गोलापल्ली क्षेत्र में गोलापल्ली से दंतेवाड़ा की ओर जा रहे पुलिस वाहन को नक्सलियों ने लिगनपल्ली के पास बम विस्फोट कर उड़ा दिया। इस भीषण हमले में 18 जवान शहीद हुए और 2 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए। घटना के बाद नक्सली हथियार लूट ले गए थे।चिंतागुफा थाना क्षेत्र के पिड़मेल पोस्ट से साप्ताहिक बाजार की सुरक्षा हेतु जा रही पुलिस पार्टी पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया। नक्सलियों ने सुरंग बिछाकर विस्फोट किया और फायरिंग की, जिसमें 1 जवान शहीद एवं 1 घायल हुए। ग्राम इंजरम के बंडा नाला में नक्सलियों के शक्तिशाली बारूदी सुरंग विस्फोट और फायरिंग में सहायक सेनानी सहित 6 जवान शहीद हो गए थे।
ग्राम कोत्ताचेरू में रोड ओपनिंग ड्यूटी पर तैनात नागा आर्म्स फोर्स के वाहन को आईईडी विस्फोट से उड़ा दिया गया, जिसमें 9 जवान शहीद हुए और 9 घायल हुए थे। ग्राम मेटागुड़ा में एक ट्रक को बम ब्लास्ट से उड़ाने और फायरिंग की घटना में 4 नागा जवान, 2 एसपीओ और ट्रक चालक व परिचालक सहित 08 लोग शहीद हुए थे। उपलमेटा पहाड़ी पर फोर्स और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में जिला बल, सीआरपीएफ और एसपीओ सहित कुल 23 जवान शहीद हुए थे।ताड़मेटला में नक्सलियों के एम्बुश में फंसने और अंधाधुंध फायरिंग के कारण थाना प्रभारी हेमंत कुमार सिंह सहित 12 जवान शहीद हो गए थे। तारलागुड़ा नाला के पास पुलिस पार्टी पर नक्सलियों के हमले और जवाबी कार्रवाई के दौरान 12 जवान शहीद हुए थे।
मुरलीगुडा के पास बिजली सुधरवाने जा रही पार्टी पर हुए एम्बुश हमले में प्रधान आरक्षक दशरू राम भोगामी और 3 एसपीओ सहित कुल 8 जवान शहीद हुए थे। मिनपा जंगल में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में सीआरपीएफ के उप सेनानी सहित 10 अधिकारी एवं कर्मचारी शहीद हुए थे।आसिरगुडा मुख्य मार्ग पर आईईडी विस्फोट में सीआरपीएफ के 2 जवान, 5 एसपीओ और 4 ग्रामीणों सहित कुल 11 लोगों की मृत्यु हुई थी। ग्राम कोकावाड़ा में नक्सलियों द्वारा ट्रक को बारूदी विस्फोट से उड़ाने की घटना में सीआरपीएफ के 11 जवान शहीद हुए थे।सिंगनमड़गू में ‘ऑपरेशन रेड हंट’ के दौरान हुई मुठभेड़ में कोबरा बटालियन और जिला बल के 6 जवान शहीद हुए थे। ताड़मेटला पहाड़ी पर हुई बड़ी नक्सली मुठभेड़ और बुलेट-प्रूफ वाहन के विस्फोट में सीआरपीएफ के 75 और जिला पुलिस बल के एक समेत कुल 76 जवान शहीद हुए थे। चिंगावरम पुलिया पर यात्रियों से भरी बस को आईईडी विस्फोट से उड़ाने की घटना में 11 आरक्षक, 1 एसएसबी फील्ड असिस्टेंट, 4 एसपीओ सहित 16 जवान और 15 नागरिक शहीद हुए थे। ग्राम बोरगुड़ा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आईईडी विस्फोट में 07 जवान शहीद हो गए थे।
टाहकवाड़ा में आरओपी ड्यूटी के दौरान हुए हमले और मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 11 और जिला बल के 4 जवान सहित 15 जवान शहीद हुए थे और 1 नागरिक की मृत्यु हुई थी। ग्राम कसालपाड़ में स्पेशल अभियान के दौरान नक्सलियों द्वारा की गई अंधाधुंध फायरिंग में सीआरपीएफ के उप कमांडेंट सहित 14 जवान शहीद हुए थे। पिड़मेल जग्गावरम में पुलिस और नक्सलियों के बीच लंबे समय तक चली मुठभेड़ में 7 जवान शहीद हुए थे। भेजी कोत्ताचेरू रोड निर्माण सुरक्षा के दौरान हुए आईईडी विस्फोट और मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हुए थे।बुरकापाल चिंतागुफा में नक्सलियों द्वारा किए गए हमले और अंधाधुंध फायरिंग में सीआरपीएफ 74 वाहिनी के 25 जवान शहीद हुए थे। कांसाराम नाला के पास एंटी लैंडमाइन वाहन को आईईडी विस्फोट से उड़ाने की घटना में 9 जवान शहीद हुए थे। मिनपा चिंतागुफा हमले में 17 जवान शहीद हो गए थे टेकलगुडेम हमले में 22 जवानों की शहादत हुई थी।
जगरगुंडा आश्रम के पास हुए हमले में 3 जवान शहीद हो गए थे। टेकलगुडम कैंप स्थापना दौरान हमले में 3 जवान शहीद हुए थे।पोकलेन आगजनी सूचना पर कार्रवाई के दौरान एएसपी आकाश राव आई ईडी ब्लास्ट में शहीद हो गए थे। इन अमर शहीदों का बलिदान ही नक्सल मुक्त सुकमा की नींव है। उनका त्याग सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *