कुम्हार पारा स्थित DV गैस एजेंसी में ,घेरुल और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बेवजह किया जा रहा है,परेशान, उज्जवला योजना के हितग्राहियों से किया जाता है, दुर्व्यवहार


जगदलपुर। जहां सरकार और जिला प्रशासन गैस की कमी न होने का दावा के रहे हैं ,वहीं उनके नाक के नीचे जगदलपुर के कुम्हार पारा स्थित DV गैस एजेंसी के संचालकों द्वारा लगातार गैस उपभोक्ताओं को बेवजह परेशान किया जा रहा है। गैस बुकिंग और DAC नंबर आने के बाद भी गैस की होम डिलीवरी नहीं की जा रही है । वहीं जब उपभोक्ता गैस एजेंसी पहुंचते हैं तो ,उनके साथ वहां के कर्मचारियों द्वारा बदतमीजी और दुर्व्यवहार किया जाता है । गैस एजेंसी संचालक द्वारा जानबूझकर होम डिलीवरी नहीं दी जाती है ,जिससे एजेंसी में भीड़ लग रही है और लोगों में हर दिन अफरा तफरी की स्थिति निर्मित हो रही है।
विगत 30 मार्च को कलेक्टर आकाश छिकारा ने आदेश जारी किया था कि गैस की नियमित होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाए और एजेंसी में भीड़ न हो ,कलेक्टर ने ऐसे एजेंसियों पर कार्रवाई की बात कही थी ,लेकिन खाद्य विभाग के अधिकारियों के द्वारा एजेसिंयों को निगरानी न किए जाने की वजह से गैस एजेंसी संचालक मनमानी कर रहे हैं । दरअसल इस गैस एजेंसी संचालक का राजनीतिक कनेक्शन होने की वजह से इन पर उचित कार्रवाई नहीं हो पाती । यहां तक कि उपभोक्ता भी खुलकर बोलने से डरते हैं ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को धुंए से मुक्ति दिलाने के लिए प्रधानमंत्री उज्जवला योजना लाई थी,DV गैस एजेंसी के द्वारा उज्जवला योजना के हितग्राहियों के साथ बहुत ही घटिया व्यवहार किया जाता है, बुकिंग होने और DAC नंबर आने के बाद भी उन्हें पर्ची नहीं दी जाती और न ही होम डिलीवरी की सुविधा दी जाती है।
DV गैस एजेंसी के संचालक का कहना कि उज्जवला योजना के हितग्राहियों को गैस शहरी उपभोक्ताओं के बाद सबसे अंतिम में दिया जायेगा और उज्जवला योजना के हितग्राहियों को होम डिलीवरी देने का प्रावधान नहीं है।
यह भी एक कारण है कि उज्जवला योजना की रिफिलिंग दर कम है ।क्योंकि महिलाओं को पहले एजेंसी में परेशान किया जाता है ,फिर सबसे आखरी में उनकी पर्ची काटी जाती है , तब तक गैस ही खत्म हो जाता है । महिलाएं कहां इस झंझट में फंसेंगी??!
केंद्र सरकार की इस महती योजना में पतीला लगाने का कार्य DV गैस एजेंसी के द्वारा किया जा रहा है । हालांकि निराश महिलाओं ने कलेक्टर जन दर्शन में एजेंसी के विरुद्ध शिकायत की बात कही । महिलाओं का कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि यदि इस विषय में हस्तक्षेप करते तो उन्हें इतना भटकना नहीं पड़ता ।

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