कलेक्टर साहब, रोकिए 15वें वित्त आयोग मद की राशि की डकैती को
-अर्जुन झा-
बकावंड। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायतों में सरपंच, सचिवों द्वारा 15वें वित्त आयोग मद की राशि में जमकर डाका डाला जा रहा है। इस राशि से गांवों में जन सुविधाएं उपलब्ध न करा कर सरपंच और सचिव अपनी तिजौरियां भर रहे हैं। वहीं ग्रामीण प्रशासन और कलेक्टर से गुहार लगा रहे हैं कि कलेक्टर साहब, इन डकैतों को रोकिए, जेल भेजिए, वरना सरकार का खजाना ये डकैत खाली कर देंगे।

बकावंड विकासखंड के सभी सरपंच भ्रष्ट नहीं हैं।. कई सरपंच ईमानदारी के साथ जनसेवा कर रहे हैं। ज्यादातर सरपंच भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार की राह पर चल पड़े हैं और इसमें सबसे बड़े खिलाड़ी की भूमिका वे सचिव निभा रहे हैं, जो सालों से यहां कार्यरत हैं और भ्रष्टाचार में महारत हासिल कर चुके हैं। यहां सर्वाधिक भ्रष्टाचार 15वें वित्त आयोग की राशि में हो रहा है। इसमें जनपद पंचायत के इंजीनियर और कुछ बाबुओं की भी बड़ी भूमिका है। सचिवों और सरपंचों ने 15वें वित्त आयोग मद की राशि को हड़पने के अजब गजब तारकीबें खोज निकाली हैं, मगर कहते हैं न अपराधी कितना भी शातिर और चलाक क्यों न हों, कोई न कोई चूक कर ही जाता है। भ्रष्टाचार के तरीकों के आविष्कार के मामले में लगातार रिकॉर्ड बना रहे बकावंड ब्लॉक के सरपंच और सचिव मेडिकल स्टोर संचालक से पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र भवन की मरम्मत करा लेते हैं, स्टेशनरी दुकान संचालक से नालियों की सफाई करा लेते हैं, किसी दुकान से दो सौ रुपल्ली का जार खरीद लाते हैं और उसे 40 हजार रुपए का वाटर फिल्टर बता देते हैं, तो कभी इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स बेचने वाली फर्म से तालाब की सफाई करा डालते हैं। अब ऐसा ही एक नया मामला सामने आया है ग्राम पंचायत जुनवानी से, जहां कृषि केंद्र दुकान संचालक से हैंडपंप की मरम्मत कराने का कार्य शो कर लगभग 50 हजार रुपए हजम कर लिए गए हैं। जुनवानी पंचायत में 24 सितंबर 2025 को हैंडपंप मरम्मत के नाम पर 45 हजार 800 रुपए का भुगतान मां दंतेश्वरी कृषि केंद्र को किया जाना दर्शाया गया है।
ऐसा है मामला
नियमानुसार हैंडपंप मरम्मत का सामान हार्डवेयर, सैनिटरी वेयर की दुकानों, बोरवेल डीलरों या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की तकनीकी शाखा में मिलता है। लेकिन यहां के सचिव ने कृषि केंद्र से हैंडपंप का सामान खरीद लिया का चमत्कार कर दिखाया है।
भुगतान हैंड पंप मरम्मत के नाम पर हुआ है और काम किया गया नल जल योजना के घरेलू स्टैंड पाइप का।पंचायत पोर्टल पर भुगतान तो हैंडपंप मरम्मत का कार्य दर्शाया गया है, लेकिन अपलोड की गई फोटो घरेलू नल जल योजना के स्टैंड की है। जब हैंड पंप का सामान कृषि केंद्र में मिलता ही नहीं, तो 45 हजार 800 रुपये का भुगतान उस फर्म को क्यों और कैसे किया गया? और हैंड पंप के नाम पर नल जल स्टैंड की मरम्मत क्यों? ग्रामीणों का कहना है कि यह “भ्रष्टाचार” है या “आविष्कार”, इसका जवाब अब संबंधित विभाग के अधिकारियों को देना होगा।
