धोबीगुड़ा पंचायत में गजब फर्जीवाड़ा, तालाब सफाई के नाम पर नाली की फोटो अपलोड कर निकाले हड़पे 49 हजार रुपए
–अर्जुन झा-
बकावंड। 15वें वित्त आयोग मद की राशि की बकावंड जनपद की ग्राम पंचायतों में जमकर लूट मची है। सरपंच-सचिवों के लिए यह मद कारु का खजाना साबित हो रहा है। किसी फकत दो चार सौ रुपए के जार को वाटर फिल्टर बताकर 40 हजार रुपए हड़प लिए जाते हैं, तो कहीं बगैर तालाब सफाई कराए नाली की तस्वीरें अपलोड ब्लॉक कर तालाब सफाई के नाम पर 50 हजार रुपए की अफरा तफरी कर दी जाती है।ऐसा ही अजब गजब मामल ग्राम पंचायत धोबीगुड़ा से सामने आया है।
विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत धोबीगुड़ा में 15वें वित्त आयोग वर्ष 2023-24 की राशि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि कमारपारा के तालाब की सफाई के नाम पर 49 हजार 500 रुपए हजम कर लिए गए हैं। जबकि मौके पर ऐसा कोई कार्य कराया ही नहीं गया है। तथाकथित तालाब आज भी अपनी पुरानी हालत में इस भ्रष्टाचार की गवाही दे रहा है। यहां सरकारी पोर्टल पर नाली की फोटो अपलोड कर राशि निकाली गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कमारपारा के तालाब की सफाई का कार्य धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहा। उक्त राशि सीमांचल बघेल के नाम से भुगतान किए जाने का उल्लेख सरकारी दस्तावेजों में किया गया है। सोचने वाली बात है कि एक अकेला आदमी पूरे तालाब की सफाई कैसे कर सकता है? उल्लेखनीय है कि 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग पंचायतों में मूलभूत सुविधाएं, पेयजल एवं स्वच्छता जैसे कार्यों के लिए किया जाता है। गाइड लाइन के अनुसार हर कार्य की जीओ-टैग फोटो, माप पुस्तिका मेजरमेंट बुक में दर्ज करना और भौतिक सत्यापन अनिवार्य है। तालाब की जगह नाली की फोटो लगाकर भुगतान करना सीधे तौर पर फर्जीवाड़ा माना जा रहा है।
अधिकांश पंचायतों में गड़बड़ी
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी बकावंड ब्लॉक की गोटीगुड़ा पंचायत में महज 200 या 400 रुपए का साधारण जार खरीद कर उसे वाटर फिल्टर बता 40 हजार रुपए हजम कर लिए गए हैं। छोटे देवड़ा पंचायत में फर्नीचर के नाम पर 45 हजार रुपए आहरित करने जैसे कई मामले सामने आ चुके हैं। लगातार सामने आ रहे गड़बड़ी के ऐसे मामलों से सचिवों और सरपंचों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। धोबीगुड़ा के मामले को लेकर जब पंचायत सचिव से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि संभवतः तालाब की बजाय नाली की सफाई का कार्य किया गया होगा। हालांकि पोर्टल पर कार्य का नाम “तालाब सफाई” ही दर्ज है और उसी नाम से भुगतान हुआ है।अगर सचिव के अनुसार मान भी लें कि नाली की ही सफाई कराई गई होगी, तो कहीं भी नाली की सफाई में 49 हजार 500 रुपए खर्च नहीं हो सकते। सबसे बड़ी बात तो यह है कि राशि आहरण के लिए जिन नालियों की तस्वीरें अपलोड की गई हैं, वह भी गंदगी और मलबे से भरी नजर आ रही हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित सचिव एवं सरपंच के खिलाफ धोखाधड़ी की कार्रवाई की जा सकती है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से पूरे ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त के कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
