बस्तर में स्थानीय आरक्षण समाप्त करने से आदिवासी युवाओं में आक्रोश, युवा प्रभाग ने खोला मोर्चा



जगदलपुर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर 100 प्रतिशत स्थानीय आरक्षण समाप्त किए जाने से बस्तर संभाग के आदिवासी युवाओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग जिला बस्तर के अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने बयान जारी कर शासन व प्रशासन को खुली चेतावनी दी है।
जारी बयान में लखेश्वर कश्यप ने कहा है कि बस्तर आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। हमारे पुरखों ने जिस जल, जंगल और जमीन के लिए हूल और भूमकाल जैसे बलिदान दिए, आज उसे छीनने की साजिश हो रही है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर हमारा 100 प्रतिशत स्थानीय आरक्षण खत्म होना सीधे हमारे भविष्य पर हमला है। उन्होंने चिंता जताई कि आरक्षण खत्म होने से बस्तर के अनुसूचित क्षेत्रों की सरकारी नौकरियों पर बाहरी लोगों का कब्जा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर आज हम चुप रहे, तो हमारा पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगार भटकेगा और आने वाली पीढ़ियां मजदूरी करने को मजबूर होंगी।

दरी बिछाने के लिए नहीं हैं हम
युवा प्रभाग अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने युवाओं से भावुक अपील करते हुए सवाल उठाते हुए कहा है कि बस्तर के युवाओं, क्या हम केवल दरी बिछाने और झंडे उठाने के लिए हैं? अब चुप रहने का वक्त नहीं है।” उन्होंने इसे केवल नौकरी ही नहीं बल्कि अस्मिता और वजूद की लड़ाई भी बताया। लखेश्वर कश्यप ने हुंकार भरते हुए कहा कि उठो, एकजुट हो जाओ, शासन और प्रशासन को बता दो कि बस्तर का युवा अब हक की भीख नहीं मांगेगा। अपना अधिकार छीनकर लेना जानता है। जब तक हमारा हक नहीं मिलता, हमारा संघर्ष नहीं थमेगा।

क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ की तत्कालीन सरकार ने 2019 में बस्तर और सरगुजा के अनुसूचित क्षेत्रों के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर 100 प्रतिशत स्थानीय आरक्षण का प्रावधान किया था। इसका उद्देश्य स्थानीय आदिवासी युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना था। हालांकि, 2023 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 प्रतिशत आरक्षण की अधिकतम सीमा का उल्लंघन मानते हुए रद्द कर दिया था। कोर्ट के फैसले के बाद से ही बस्तर में इसका कड़ा विरोध हो रहा है। आदिवासी संगठनों का तर्क है कि अनुसूचित क्षेत्रों के लिए संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून, 1996 के तहत विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही इस मुद्दे पर संभाग स्तरीय बैठक बुलाकर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। संगठन का कहना है कि वे संवैधानिक दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखेंगे, लेकिन हक मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *