बीजापुर जिले के 12 हजार तेंदूपत्ता श्रमिकों ने कमाए 12 करोड़ रुपए



जगदलपुर वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि प्रदेश की विष्णु देव साय सरकार वनाश्रित परिवारों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में तेंदूपत्ता संग्राहकों को संग्रहण पारिश्रमिक का भुगतान तेजी से किया जा रहा है। बीजापुर जिले में प्रथम चरण के तहत 12 हजार 379 संग्राहकों के बैंक खातों में 12 करोड़ रुपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई है।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि तेंदूपत्ता केवल एक वनोपज नहीं, बल्कि बस्तर और वनांचल क्षेत्रों के लाखों परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। सरकार ने संग्राहकों के हित में प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक दर बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए की है, जिससे उन्हें उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल रहा है। साथ ही चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ कर संग्राहकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया गया है। वन मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि बीजापुर जिले की 28 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के 45 लॉटों में 40 हजार 716 संग्राहकों द्वारा 65 हजार 430.359 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया है। इसके लिए जिले में कुल 35.99 करोड़ रुपए का पारिश्रमिक भुगतान किया जाना है। शेष राशि का भुगतान भी सत्यापन और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होते ही शीघ्र किया जाएगा।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार केवल पारिश्रमिक भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि संग्राहकों के सामाजिक सुरक्षा कवच को भी मजबूत किया गया है।

सुरक्षा कवच भी है तेंदूपत्ता
500 गड्डी से अधिक तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले संग्राहकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके तहत सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये तथा दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में गुडमा समिति के 1 हजार 912 संग्राहकों को 1.95 करोड़ रुपये, कुटरू समिति के 937 संग्राहकों को 1.29 करोड़ रुपये, तोयनार समिति के 961 संग्राहकों को 1.20 करोड़ रुपए तथा बरदेला समिति के 1 हजार 23 संग्राहकों को 1.11 करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में भेजे गए हैं। इसके अलावा संतोषपुर, भैरमगढ़, माटवाड़ा, कोडोली, नैमेड़, भद्रकाली और चेरपल्ली सहित अन्य समितियों के संग्राहकों को भी ऑनलाइन भुगतान किया गया है।

खेती किसानी को मिलेगी गति
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मानसून के आगमन से ठीक पहले पारिश्रमिक राशि का भुगतान वनाश्रित परिवारों के लिए बड़ी राहत है। इस राशि का उपयोग किसान और संग्राहक खाद-बीज की खरीद, खेती की तैयारियों, बच्चों की पढ़ाई तथा घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति में कर सकेंगे।उन्होंने कहा कि सरकार की पारदर्शी डीबीटी व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार वनवासियों, आदिवासियों और तेन्दूपत्ता संग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का लक्ष्य केवल वनोपज संग्रहण नहीं, बल्कि वनाश्रित परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना है।

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