बैंक की लापरवाही से गुम हो गया जीवन प्रमाण पत्र



जगदलपुर। बैंक प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा बेकसूर पेंशनरों को किस तरह भुगतना पड़ता है इसकी बानगी पेंशनर अब्दुल सत्तार खान के मामले में देखने को मिली है। मामला सेंट्रल बैंक मुख्य शाखा जगदलपुर का है। तुर्रा यह कि बैंक प्रबंधन न तो पेंशनरों से सीधे मुंह बात करने को तैयार रहता है और न ही अपनी गलती स्वीकार करने को। हताश, परेशान पेंशनर जब अपने संघ के संपर्क में आते हैं तब मामला तूल पकड़ता है।
पेंशनर्स संघ ने कहा है कि बैंक प्रबंधन अपने रवैये में तत्काल सुधार करे, अन्यथा पेंशनर सेंट्रल बैंक से खाते हटाकर अन्य बैंक में खोलने के लिए बाध्य हो जाएंगे। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ बस्तर संभाग के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय मंत्री रामनारायण ताटी ने कहा है कि पेंशनरों को प्रत्येक वर्ष नवंबर माह में जीवितता प्रमाण पत्र जमा करना होता है। अब्दुल सत्तार खान जो संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, उन्होंने भी नियमानुसार बैंक में जीवितता प्रमाण पत्र जमा किया था। किंतु बैंक प्रबंधन की लापरवाही से अब्दुल सत्तार खान का जीवितता प्रमाण पत्र गुम हो गया। प्रमाण पत्र गुम होने पर बैंक की जिम्मेदारी यह थी कि तत्काल संबंधित पेंशनर को इसकी सूचना दे जो नहीं दिया गया। 27 अप्रैल 2026 को बैंक से अब्दुल सत्तार खान के पास फोन आता है कि आपका जीवितता प्रमाण पत्र न होने के कारण आपका पेंशन बैंक खाते में जमा नहीं हो रही है, आप फौरन बैंक पहुंचकर जीवितता प्रमाण पत्र जमा करें। अब्दुल सत्तार खान ने पुनः जीवितता प्रमाण पत्र जमा किया। इसके बाद भी अप्रैल माह के अंत में अन्य पेंशनरों के साथ अब्दुल सत्तार खान की पेंशन बैंक खाते में जमा नहीं हुई। मामला संगठन के संज्ञान में लाए जाने पर संगठन की ओर से श्री ताटी ने सेंट्रल बैंक पहुंचकर शाखा प्रबंधक से इसका कारण जानना चाहा। उन्होंने जीवितता प्रमाण पत्र जमा न होने का कारण बताया। श्री ताटी ने कहा कि अब्दुल सत्तार खान ने समय पर जीवितता प्रमाण पत्र जमा कर दिया था, बैंक से मिसिंग हुआ तो उसकी सजा अब्दुल सत्तार खान क्यों भुगते? इस पर प्रबंधक ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया। श्री ताटी ने कहा देखिए जीवितता प्रमाण पत्र जमा करने के लिए जितनी जिम्मेदारी पेंशनर की है, उतना ही जिम्मेदारी बैंक की भी है। यदि कोई पेंशनर अत्यंत बुजुर्ग है, अशक्त है या लंबी बीमारी से ग्रसित है तो इन परिस्थितियों में बैंक की जवाबदारी बनती है कि वह अपने कर्मचारी को पेंशनर के घर भेजकर जीवितता प्रमाण पत्र ले। मगर आप लोग प्रायःऐसा नहीं करते। जिसका खामियाजा बेकसूर पेंशनरों को भुगतना पड़ता है। श्री ताटी स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब्दुल सत्तार की पेंशन आखिर कब आएगी?प्रबंधक ने मई माह के अंत में जमा करने का भरोसा दिलाया। श्री ताटी ने कहा यह रवैया ठीक नहीं है अपने रवैये में सुधार करें, अन्यथा संघ से जुड़े सभी पेंशनर सेंट्रल बैंक से खाते हटाकर अन्य बैंक में खोलने के लिए बाध्य हो जाएंगे। संघ के आरएन ताटी, किशोर जाधव, अब्दुल सत्तार खान, शिव कुमार मिश्रा, रमापति दुबे, एलएस नाग, एसडी माझी, पीएस ठाकुर ,एमडी राठौर, सुरेश कुमार दलाई, बीएस नेताम, धरम सिंह मंडावी, अनिता राज करमजीत कौर, सरिता पांडे, सुषमा झा, जयमनी ठाकुर, शुभ्रा कुंडू, उषा चिखलीकर, रेखा सेन, के. बेलसरिया एवं जय ईशाक ने भी बैंक प्रबंधन के रवैए को गैरजिम्मेदाराना बताया है।

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