बंगाल में झालमुरी और बस्तर में पानी की बोतल का जादू
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। हाल के दिनों में हमने देखा था कि बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक दुकान से खरीदी गई दस रुपए की झालमुरी ने बंगाल विधानसभा चुनाव की दिशा ही बदल दी थी, वहां दस रुपए की झालमुरी भाजपा के लिए जादुई करिश्मा साबित हुई। वैसा ही नजारा बस्तर में भी देखने को मिला है। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के एक सुदूर गांव की एक छोटी सी किराना दुकान से प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दस रुपए की पानी की बोतल क्या खरीदी, उस पानी की स्नेहिल फुहार का जादू पूरे बस्तर में चल गया है। दरअसल मुख्यमंत्री ने जिस दुकान से पानी बोतल खरीदी, उसके मालिक आत्मसमर्पित नक्सली दंपत्ति हैं। मुख्यमंत्री को जब पता चला कि दुकान मालिक पहले नक्सली थे, उनके मुंह से ये बोल फूट पड़े- यही है बदलते बस्तर और नए बीजापुर की असल तस्वीर ।

प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल स्थित ग्राम कोंडापल्ली पहुंचे थे। जन चौपाल के लिए जा रहे मुख्यमंत्री का काफिला अचानक एक छोटी सी किराना दुकान के सामने रुक गया। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य दुकान थी। लेकिन उसके भीतर संघर्ष, साहस और बदलाव की एक असाधारण कहानी छिपी थी। यह दुकान आत्मसमर्पित दंपत्ति मासा तामो और जयमोती की थी। मुख्यमंत्री दुकान के भीतर पहुंचे दोनों से आत्मीयता से बातचीत की और उनके जीवन में आए बदलाव के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने दुकान से पानी की बोतल खरीदी और दोनों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। मासा तामो का बचपन गरीबी और अभावों में बीता। बचपन में पिता का साया उठ गया और पढ़ाई का अवसर कभी नहीं मिला। वर्ष 2007 में परिस्थितियों के कारण वह नक्सली संगठन से जुड़ गया। उधर जयमोती की कहानी भी संघर्षों से भरी रही। बचपन में माता-पिता का निधन हो गया और जीवन की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें भी उसी रास्ते की ओर धकेल दिया। संगठन में दोनों की मुलाकात हुई और वर्ष 2021 में उन्होंने विवाह कर लिया। लेकिन समय के साथ दोनों ने महसूस किया कि हिंसा का रास्ता उनके भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए उचित नहीं है। अक्टूबर 2025 में उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
पुनर्वास केंद्र में नए जीवन का आगाज
बीजापुर पुनर्वास केंद्र पहुंचने के बाद दोनों के जीवन में नया अध्याय शुरू हुआ। पहली बार उन्हें अक्षर ज्ञान मिला, कौशल विकास का प्रशिक्षण मिला और शासन की विभिन्न योजनाओं से उन्हें जोड़ा गया। राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाता और अन्य आवश्यक दस्तावेज बनवाए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत जयमोती को एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इसी सहायता से कोंडापल्ली में उनकी छोटी सी किराना दुकान शुरू हुई। मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान मासा और जयमोती ने बताया कि अब वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर रहे हैं। दुकान से होने वाली आय से परिवार की जरूरतें पूरी हो रही हैं। भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी हैं। दंपत्ति ने कहा कि कभी उन्होंने नहीं सोचा था कि जीवन में ऐसा बदलाव आएगा। लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति और प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान दी है।
नए बस्तर की जीवंत तस्वीर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मासा और जयमोती की कहानी केवल दो व्यक्तियों की कहानी नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की कहानी है। यह इस बात का प्रमाण है कि अवसर, विश्वास और सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जी सकता है। कोंडापल्ली की उस छोटी सी दुकान पर कुछ मिनटों का यह संवाद सुशासन तिहार का सबसे भावनात्मक पल बन गया। यह दृश्य बता रहा था कि बस्तर अब भय और हिंसा की नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और नई उम्मीदों की धरती बन रहा है। मासा तामो और जयमोती आज उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो अंधेरे से निकलकर उजाले की राह चुनना चाहते हैं। उनकी कहानी संदेश देती है कि वापसी का रास्ता हमेशा खुला होता है और एक नया जीवन हमेशा संभव होता है।
