देवस्नान चंदन जात्रा पूजा के साथ बस्तर गोंचा महापर्व शुरू
जगदलपुर। रियासत काल से चले आ रहे बस्तर गोंचा महापर्व का शुभारंभ आज सोमवार को श्री जगन्नाथ मंदिर जगदलपुर में देवस्नान चंदन जात्रा पूजा विधान के साथ श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में हुआ। इस अवसर पर भगवान श्रीजगन्नाथ, देवी सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी का पंचामृत, चंदन तथा इंद्रावती नदी के पवित्र जल से विधि-विधान से परंपरानुसार वैदिक मत्राेचार के बीच देवस्नान महाभिषेक किया गया।

महाभिषेक से पहले परंपरा के अनुसार ग्राम आसना से भगवान शालीग्राम काे लाकर श्रीजगन्नाथ मंदिर में स्थापित किया गया। तत्पश्चात 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के ब्राह्मण इंद्रावती नदी से पवित्र जल लेकर मंदिर पहुंचे। भगवान शालिग्राम का पंचामृत एवं चंदन से अभिषेक करने के बाद इस बार देवस्नान की पूरी प्रक्रिया का विस्तार कर भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी के विग्रहों का मंदिर के गर्भगृह के बाहर मंदिर प्रांगण में मंच स्थापित कर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवस्नान-महाभिषेक संपन्न कराया गया। इससे पहले मंदिर के र्गभगृह के बाहर इस प्रक्रिया काे संपन्न करवाया जाता रहा है। इसका विस्तार पहली बार किया गया है। पूजा-अर्चना के उपरांत भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा एवं बलभद्र के 22 विग्रहों को मुक्ति मंडप में स्थापित कराया गया। इसके साथ ही भगवान का अनसर काल प्रारंभ हो गया है, जो 14 जुलाई तक चलेगा। इस अवधि में श्रद्धालुओं के लिए भगवान के दर्शन वर्जित रहेंगे। अनसर काल में भगवान काे विशेष औषधियुक्त भोग अर्पित किया जाएगा, जिसका प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा। 360 घर आरण्यक ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष वेद प्रकाश पांडे ने बताया कि बस्तर गोंचा पर्व के 619 वर्षों से अनवरत चली आ रही रियासतकालीन परंपरा के अनुसार समस्त पूजा विधान संपन्न किए जाएंगें। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। आगामी 15 जुलाई को नेत्रोत्सव पूजा विधान के साथ प्रभु जगन्नाथ के दर्शन होंगे। 16 जुलाई को श्रीगोंचा रथ यात्रा पूजा विधान के साथ ही भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी जनकपुरी सिरहासार भवन में नौ दिनों तक श्रृद्धालुओं के दर्शनार्थ विराजित रहेंगें। इस दौरान समस्त श्रृद्धालुओं को पुण्य लाभ का पावन अवसर प्राप्त होगा। बस्तर गाेंचा समिति के संरक्षक एवं ब्राम्हण समाज के पूर्व अध्यक्ष ईश्वर खंबारी ने बताया कि बस्तर गोंचापर्व 2026 में देव स्नान पूर्णिमा चंदन जात्रा पूजा विधान 29 जून से प्रारंभ हाे गया है।
अब होंगे ये कार्यक्रम
तय कार्यक्रम के अनुसार भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी का अनसर काल 30 जून से प्रारंभ होकर 14 जुलई तक जारी रहेगा। 15 जुलाई काे नेत्रोत्सव पूजा विधान के साथ भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी, देवी सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी के दर्शन लाभ श्रृद्धालुओं को श्री मंदिर के बाहर होगें । 16 जुलाई काे श्री गोंचा रथयात्रा, 19 जुलई काे प्रातः 10 बजे से अखंड रामायण पाठ प्रारंभ हाेगा, 20 जुलाई काे हेरा पंचमी पूजा विधान हाेगा, 21 जुलाई काे छप्पन भोग अर्पण, 23 जुलाई काे सामूहिक उपनयन संस्कार, 24 जुलाई काे बाहुड़ा गोन्या रथयात्रा एवं कपाट फेड़ा पूजा विधान हाेगा। 25 जुलाई काे एकादशी के साथ बस्तर गाेंचा पर्व का आगामी वर्ष के लिए परायण के साथ समापन हाेगा। बस्तर गोंचा महापर्व समिति के अध्यक्ष मुक्तेश्वर पाण्डे ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंदन जात्रा पूजा विधान के पश्चात भगवान श्री जगन्नाथ का 15 दिवसीय अनसर काल की अवधि होती है । इस दौरान भगवान श्री जगन्नाथ अस्वस्थ होते हैं, भगवान के अस्वस्थता के चलते दर्शन वर्जित होते हैं। भगवान श्री जगन्नाथ के स्वास्थ्य लाभ के लिए औषधियुक्त भोग का अर्पण कर भगवान जगन्नाथ की सेवा 15 दिनों के अनसर काल में 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के सेवादारों एवं पंडितों के द्वारा किया जाएगा। औषधियुक्त भोग के अर्पण के पश्चात इसे श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। विशेष औषधियुक्त प्रसाद का पुण्य लाभ श्रद्धालु अनसर काल के दौरान श्रीजगन्नाथ मंदिर में पहुंचकर प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन दर्शन वर्जित होगा।
इनकी रही उपस्थिति
आज के कार्यक्रम में 360 घर आरण्यक ब्राम्हण समाज के पदेन पाणिग्रही राधाकांत पाणिग्रही, पदेन पाढ़ी उमाशंकर पाढ़ी, पूर्व अध्यक्ष ईश्वरनाथ खंबारी, हेमंत पांडे, रजनीश पाणिग्रही, सुदर्शन पाणिग्रही, देवशंकर पंडा, आत्माराम जोशी, नरेंद्र पाणिग्रही, बसंत पांडा, गजेंद्र पाणिग्रही, महेश्वरी पांडे रविंद्र पांडे, चिंतामनी पांडे, विजय पांडे, दिलेश्वर पांडे, मिथलेश पाणिग्रही, बनमाली पाणिग्रही, विम्भाधर पांडे, प्रशांत पाणिग्रही, महेंद्रनाथ जोशी, आशू आचार्य, मोहन जोशी, मिनेश पाणिग्रही, अनुज पांडे, खिरेंद्र पांडे, सरिता जोशी, डाकेश्वरी पांडे, नीतू पांडे, सुनीता पांडे, उर्मिला पांडे, खिरेंद्री पाढ़ी, चंदा पांडे, धीरज जोशी, रजनी पाणिग्रही, गीतांजलि पाणिग्रही, सुषमा जोशी, कविता पांडे, गुरुनारायण पाणिग्रही, चुम्मन पांडे, हर्ष पाणिग्रही, शिवांश पाणिग्रही, रजत पाणिग्रही, यशवंत पाणिग्रही, मुकेश जोशी, बसंत जोशी, गीतेश पाणिग्रही, चोखेलाल पाणिग्रही एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
