6 बेटों ने पूरी की अपने पिता की अंतिम इच्छा, गांव में बनवाया भगवान जगन्नाथ का मंदिर

दंतेवाड़ा। मां दंतेश्वरी की पावन नगरी दंतेवाड़ा के पातररास में सोमवार को धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। नव निर्मित सिद्धेश्वर धाम प्रभु श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि विधान के साथ संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक आयोजन में जिले भर से आए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और पूरा क्षेत्र जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह शक्तिपीठ मां दंतेश्वरी मंदिर में विशेष पूजा अर्चना और दर्शन के साथ हुआ। परंपरा के अनुसार मां दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी हरेंद्र नाथ जिया के साथ सुकमा राजपरिवार के कुमार जयदेव बाबा को सत्तारूढ़ किया गया। इस दौरान कुमार जयदेव बाबा और कुमार विजित देव ने मां दंतेश्वरी का दर्शन कर विधिवत पूजा अर्चना की और समूचे बस्तर की सुख समृद्धि व खुशहाली की कामना की। इसके बाद बाजे गाजे, शंख ध्वनि और भक्ति गीतों के बीच भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में सुकमा राजपरिवार के दोनों सदस्यों के साथ मां दंतेश्वरी मंदिर जगदलपुर के पुजारी प्रेम कृष्ण पाढ़ी, मावली माता मंदिर के पुजारी अनिल ठाकुर भी शामिल हुए। धाकड़, क्षत्रिय समाज, बंजारा समाज, कलार समाज, यादव समाज समेत विभिन्न समाजों के सैकड़ों प्रतिनिधि और श्रद्धालु भी शोभायात्रा का हिस्सा बने। यह शोभायात्रा मां दंतेश्वरी मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के मुख्य मार्ग स्टेट बैंक चौक से गुजरते हुए पातररास स्थित सिद्धेश्वर धाम पहुंची। वहां आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई।इस पावन अवसर पर दंतेवाड़ा के विधायक चैतराम अटामी और जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी भी विशेष रूप से मौजूद रहे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने मंदिर में पहुंचकर प्रभु जगन्नाथ के दर्शन किए, पूजा अर्चना की और क्षेत्र की उन्नति की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर दर्शन लाभ लिया और प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

मंदिर के पंडित विभूति मिश्रा ने जानकारी दी कि आगामी 16 जुलाई को श्री गोंचा महापर्व के अवसर पर मंदिर से भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे और दुर्गा मंडप स्थित मौसी मंदिर में नौ दिनों तक विश्राम करेंगे। इसके बाद 24 जुलाई को बाहुड़ा गोंचा के दिन भगवान की वापसी रथयात्रा निकाली जाएगी और वे पुनः मुख्य मंदिर में विराजमान होंगे। रथयात्रा की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
मंदिर का निर्माण कराने वाले मिश्रा परिवार के सदस्य सत्यनारायण मिश्रा ने बताया कि उनका परिवार पिछले सात पीढ़ियों से पातररास में निवास कर रहा है। उनके पिता स्वर्गीय सिद्धेश्वर मिश्रा की अंतिम इच्छा थी कि गांव में भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर बने। पिता की इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उनके छह पुत्रों ने आपसी सहयोग से सिद्धेश्वर धाम प्रभु जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया है। उन्होंने बताया कि मंदिर में स्थापित तीनों विग्रह विशेष रूप से ओडिशा के पवित्र धाम जगन्नाथ पुरी से लाए गए हैं। प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर पूरे क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का माहौल है।

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