सच्चाई को झूठ के पहरेदारों से नहीं दबाया जा सकता:- नवीन विश्वकर्मा
गीदम:- “गीदम बस स्टैंड वार्ड क्रमांक 12 को लेकर जो बाते ओर अफवाह फैलाने का काम किया जा रहा है उसकी सच्चाई कुछ ओर है ओर दिखाया कुछ ओर जा रहा है ।दर असल गीदम बस स्टैंड के पीछे बना कला मंच और वहां उसके बंगाल में स्थित पीपल के वृक्ष की पवित्रता को लेकर मैंने जो प्रश्न उठाए हैं, वे मेरी निजी लड़ाई नहीं, बल्कि नगर की महिलाओं की आस्था और जनहित की लड़ाई है। दुर्भाग्य है कि जब मैंने महिलाओं की पीड़ा और कला मंच के व्यावसायिक दुरुपयोग को लेकर सीएमओ के सामने सच्चाई रखी, तो मेरे तर्कों का जवाब देने के बजाय मेरी छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया गया । असल हकीकत यह है की
कुछ लोग मेरी बढ़ती राजनैतिक प्रतिष्ठा और मेरे जन-सरोकार से इतने भयभीत हैं कि वे आज अनैतिकता की सीमाएं लांघ रहे हैं। कभी मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचने के लिए आदिवासियों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की कोशिश की तो जिसकी सच्चाई सबके सामने चंद घंटों में आ गई, इसी तरह वार्ड नम्बर 12 के मामले में असली मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए मुझ पर झूठे आरोप गढ़े गए। लेकिन, मुझे खुशी है कि उन लोगों के झूठ के गुब्बारे की हवा खुद आदिवासी समाज के प्रबुद्ध जनों ने निकाल दी है। जनता अब जान चुकी है कि कौन उनकी आस्था का रक्षक है और कौन अतिक्रमणकारियों का संरक्षक।
मैं प्रशासन से पूछना चाहता हू कि जो कला मंच, सार्वजनिक उपयोग के लिए था, उसे दुकानों में किसने बदला? उस पर तीन दिन पहले लगा बोर्ड जिस पर ‘राजेश इलेक्ट्रिकल’ का बोर्ड लगा था उसे किसने उतारा जब मैने महिलाओं की आस्था पीपल के पेड़ की पूजा की ओर सारे रास्ते बंद किए जाने की बात पर सीएमओ से सवाल किया ओर कला मंच का तत्काल का फोटू दिखाकर सवाल किए इसके बाद अचानक उसके ऊपर लगा बोर्ड क्यों गायब हो गया? हालांकि फोटू के दिनांक ओर समय मेरे पास दर्ज है। अगर वहां सब कुछ वैध था, तो सच्चाई छिपाने की इतनी जल्दीबाजी क्यों दिखाई गई?
मैं 15 साल पहले गीदम नगर पंचायत का अध्यक्ष रहा, आज भी जब लोग अपनी समस्याओ को लेकर मेरे पास आते हैं, तो उनका विश्वास मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं इस प्रकार के ओछे प्रयासों से न तो कभी डरा हूं और न ही रुकूंगा। जब तक महिलाओं की आस्था का मार्ग अवरुद्ध रहेगा और सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध कब्जा बना रहेगा, मैं अपनी आवाज बुलंद करता रहूंगा।
झूठ के पहरेदार चाहे कितनी भी दीवारें खड़ी कर लें, लेकिन सच्चाई के सूरज को वे अधिक समय तक नहीं छुपा पाएंगे।”
नवीन विश्वकर्मा, सांसद प्रतिनिधि
