ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्रियों का कामकाज प्रभावित
दल्ली राजहरा। त्योहारों के सीजन में अंतागढ़-दल्ली राजहरा से दुर्ग-रायपुर रेल मार्ग पर चलने वाली लोकल डेमू और मेमू ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। यात्रियों का कहना है कि कुछ दिन ट्रेन लेट होना अलग बात है, लेकिन अब कई ट्रेनों का निर्धारित समय से लगातार विलंब से चलना रोज की बात हो रही है। अंतागढ से लेकर दल्लीराजहरा, बालोद, गुंडरदेही होते हुए दुर्ग और रायपुर तक रोजाना बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग, विद्यार्थी, व्यापारी, मरीज तथा अन्य जरूरी काम से यात्रा करने वाले लोग इन ट्रेनों पर निर्भर हैं। ऐसे में ट्रेन के एक-दो घंटे तक विलंब से चलने का सीधा असर यात्रियों के पूरे दिन के कार्यक्रम पर पड़ रहा है।
रेलवे टाइम टेबल के अनुसार ट्रेन नंबर 78816 अंतागढ़-रायपुर डेमू अंतागढ़ से सुबह 4:45 बजे रवाना होकर दल्ली राजहरा लगभग 5.50 बजे और निर्धारित रायपुर करीब 8:55 बजे पहुंचती है। यह ट्रेन दुर्ग जाने वाले यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी देती है। लेकिन यात्रियों का आरोप है कि कई मौकों पर यही सुबह की ट्रेन भी निर्धारित समय से काफी देर से चलती है। सुबह जल्दी रायपुर या दुर्ग पहुंचकर नौकरी, व्यवसाय, अस्पताल, परीक्षा अथवा अन्य जरूरी कार्य करने वाले यात्रियों के लिए थोड़ी सी देरी भी आगे की पूरी यात्रा को प्रभावित कर देती है।
राजहरा से दुर्ग जाने ट्रेनें
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार दल्ली राजहरा से दुर्ग की ओर जाने वाली प्रमुख सेवाओं में 78826 दल्ली राजहरा-दुर्ग डेमू दल्लीराजहरा से लगभग 6:25 बजे, दुर्ग 8:25 बजे, 78818 अंतागढ़ दुर्ग डेमू दल्लीराजहरा से लगभग 14:33 बजे, दुर्ग 16:40 बजे, 78825 दल्ली राजहरा-दुर्ग डेमू दल्लीराजहरा से लगभग 18:55 बजे, दुर्ग 20:50 बजे, इसके अलावा 68765 ताड़ोकी-रायपुर मेमू दल्ली राजहरा से लगभग 11:45 बजे रवाना होकर रायपुर करीब 15:30 बजे पहुंचती है। वहीं 78818 अंतागढ़ दुर्ग डेमू अंतागढ़ से 13:35 बजे चलकर दल्ली राजहरा करीब 14:31 बजे और दुर्ग करीब 16:40 बजे पहुंचने के लिए निर्धारित है। इस रेल मार्ग की खास बात यह है कि अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, केवटी, दल्ली राजहरा, कुसुमकसा, बालोद, गुंडरदेही सहित अनेक क्षेत्रों के यात्री इन सेवाओं के माध्यम से दुर्ग और रायपुर तक पहुंचते हैं। इसलिए किसी एक ट्रेन की देरी का प्रभाव केवल दल्ली राजहरा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे रेल कॉरिडोर के यात्रियों पर पड़ता है।सबसे गंभीर चिंता रात में चलने वाली सेवाओं को लेकर सामने आ रही है। यात्रियों के अनुसार कई बार ट्रेन इतनी देरी से वापस लौटती है कि रात 1-2 बजे तक यात्रियों को अपने गंतव्य या स्टेशन तक पहुंचना पड़ता है। इसमें महिला यात्रियों, बच्चों, बुजुर्गों और अकेले सफर करने वालों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। यात्रियों का कहना है कि रात के समय सार्वजनिक परिवहन की अनुपलब्धता के कारण ट्रेन में होने वाली देरी उनकी परेशानी और बढ़ा देती है।
रक्षाबंधन पर भी यात्री रहे परेशान
हाल ही में रक्षाबंधन के अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों और रिश्तेदारों तक पहुंचने के लिए ट्रेन से यात्रा करने की योजना बनाई थी। लेकिन यात्रियों के अनुसार ट्रेनों में हुई देरी के कारण कई लोगों को अपनी आगे की यात्रा की कनेक्टिंग ट्रेन पकड़ने में परेशानी हुई। दुर्ग से आगे भिलाई, रायपुर और अन्य शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है। लोकल ट्रेन के निर्धारित समय से पीछे होने पर दुर्ग या रायपुर से पकड़ने वाली दूसरी ट्रेन छूटने का खतरा बना रहता है। अब नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, दल्ली राजहरा, बालोद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से दुर्ग-रायपुर की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में यात्रियों की मांग है कि रेलवे लोकल डेमू मेमू ट्रेनों के संचालन की नियमित निगरानी करे और उन्हें निर्धारित समय पर चलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करे। त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि अंतागढ़-दल्ली राजहरा-दुर्ग-रायपुर रेल मार्ग की ट्रैन सेवाओं की समयबद्धता सुनिश्चित की जाए, देरी के कारणों की जानकारी सार्वजनिक की जाए और रात में अत्यधिक विलंब से पहुंचने वाली ट्रेनों की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए।
