रहस्यमयी है मैलबेड़ा का घना जंगल, 15 किमी के दायरे में हैं कुल्लू फल और दुर्लभ जानवर
बकावंड। आधुनिकता की चकाचौंध से दूर, बस्तर जिले के बकावंड ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला मैलबेड़ा गांव आज भी प्रकृति के एक ऐसे अनमोल और रहस्यमयी खजाने को अपने दामन में समेटे हुए है, जिसे स्थानीय लोग घने जंगल’ के नाम से जानते हैं। इस जंगल का विशाल दायरा लगभग 15 किलोमीटर हिस्से में करपावंड से लेकर उड़ीसा कनकी धनपुर मोखागांव तोरेंगा उड़ीसा मुंडागुड़ा पाथरी चलानगुड़ा तक फैला हुआ है।
यह घना जंगल न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां रहने वाले ग्रामीणों की आजीविका और जीवन की धड़कन भी है। यहां के ग्रामीणों की पूरी जिंदगी इसी जंगल पर निर्भर है।इस जंगल की सबसे बड़ी खासियत यहां पाया जाने वाला कुल्लू का पेड़ और उसका फल है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सदियों से यह जंगल उन्हें कुल्लू फल जिसका वानस्पतिक नाम गार्डनिया गम्मीफेरा है और बहुमूल्य कुल्लू गोंद देता आ रहा है। यह न सिर्फ उनकी परंपरा का हिस्सा है, बल्कि आर्थिक रूप से भी ग्रामीणों के लिए एक बड़ा सहारा है। इसके अलावा, यहां मौसम के अनुसार तरह-तरह के जंगली फल-फूल प्रचुर मात्रा में मिलते हैं, जो पोषण और स्वाद दोनों में बेजोड़ हैं।
जड़ी-बूटियों का है खजाना
मैलबेड़ा का यह जंगल औषधीय पौधों का एक बहुत बड़ा गढ़ है। गांव के बुजुर्गों और पारंपरिक वैद्यों के माध्यम से आज भी यहां ऐसी दुर्लभ जड़ी-बूटियों की पहचान की जाती है, जो कई तरह की असाध्य बीमारियों को ठीक करने की क्षमता रखती हैं। पुरानी पीढ़ी का यह ज्ञान आज भी नई पीढ़ी के लिए एक अनमोल धरोहर है।
रहस्यमयी जीवों का बसेरा
घना और इंसानी दखल से दूर होने के कारण यह जंगल वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह है। ग्रामीणों का कहना है कि इस जंगल के भीतर कई रहस्यमयी और दुर्लभ प्रजाति के जानवर पाए जाते हैं, जिन्हें घने जंगलों के बीच अक्सर देखा जाता है। जंगल का एक बड़ा हिस्सा इतना घना है कि वहां दिन में भी अंधेरा छाया रहता है, जिससे इस रहस्यमयी दुनिया का रहस्य और भी गहरा हो जाता है। मैलबेड़ा गांव इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे इंसान और प्रकृति एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यहां के ग्रामीण न केवल जंगल से संसाधन लेते हैं, बल्कि अपनी पारंपरिक मान्यताओं और ‘देवगुड़ी’ व्यवस्था के माध्यम से इस 15 किलोमीटर के जंगल की रक्षा भी करते हैं। प्रशासन को जरूरत है कि जैव विविधता से भरपूर इस क्षेत्र को संरक्षित करने और यहां के पारंपरिक ज्ञान को सहेजने के लिए विशेष कदम उठाए।
