सड़कों पर मवेशियों का जमघट, लाखों रुपए का काऊ कैचर बेकार
दल्ली राजहरा। नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण शहर की सड़कों पर देखने को मिल रहा है। लाखों रुपए की लागत से खरीदा गया काऊ कैचर वाहन नगर पालिका कार्यालय में धूल खा रहा है, जबकि लावारिस मवेशियों ने पूरे शहर की सड़कों पर कब्जा कर रखा है।
ताजा तस्वीरें वार्ड नंबर के मुख्य मार्ग की हैं, जहां रात के समय सड़क पर 20 से 25 लावारिस मवेशी बीच सड़क पर बैठे रहे। इससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रात के अंधेरे में मवेशियों के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही गाय और बैलों के झुंड सड़कों पर आकर बैठ जाते हैं। वाहन चालकों को अपनी गाड़ी की लाइट से और हार्न बजाकर उन्हें हटाने का प्रयास करते हैं। कई बार तो बाइक सवार इन मवेशियों से टकराकर घायल भी हो चुके हैं। लेकिन नगर पालिका इस ओर ध्यान नहीं दे रही।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर पालिका के पास मवेशियों को पकड़ने के लिए लाखों रुपए का काऊ कैचर मौजूद है तो उसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा? क्या सिर्फ शो-पीस बनाकर खड़े रखने के लिए उसे खरीदा गया है? जनता के टैक्स के पैसे की ऎसी बर्बादी पर लोग आक्रोशित हैं। मुख्य नगर पालिका अधिकारी की कार्यशैली पर भी जनता सवाल उठा रही है। लोगों का आरोप है कि सीएमओ को जनता की जान की कोई परवाह नहीं है। शहर में मवेशियों की समस्या, गंदगी, टूटी सड़कों को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रात के समय मवेशियों के सड़क पर बैठने से सबसे ज्यादा खतरा दो पहिया वाहन चालकों, कमजोर नजर वालों और बुजुर्गों को होती है। अचानक सामने मवेशी आ जाने से ब्रेक लगाने पर वाहन फिसल जाता है और गंभीर दुर्घटना हो जाती है। नगर पालिका क्या किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रही है? स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार मवेशी नुकसान पहुंचा रहे हैं और बाजार क्षेत्र में दुकानों के सामने गंदगी फैला रहे हैं। इसके बावजूद नगर पालिका का अमला मूकदर्शक बना हुआ है। जनता ने मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन तुरंत काऊ कैचर को सड़कों पर उतारे और मवेशियों को पकड़कर गौशाला भेजा जाए। साथ ही जो मवेशी मालिक अपने मवेशियों को खुला छोड़ रहे हैं, उन पर भी जुर्माना लगाया जाए। अब देखना होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका प्रशासन की नींद टूटती है या फिर इसी तरह जनता अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर चलने को मजबूर रहेगी।
