आपसी खींचतान में पिस रही है राजहरा की जनता
दल्लीराजहरा। नगर में सत्ता परिवर्तन के बाद जिस तेजी से विकास की उम्मीद जनता ने की थी, आज करीब डेढ़ वर्ष बाद वही उम्मीद सवालों में बदलती दिखाई दे रही है। नगर पालिका में भाजपा की सरकार बनने के बाद जनता ने इसे ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ के रूप में विकास की नई शुरुआत माना था, लेकिन डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी शहर की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होना नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
शहर में चर्चा है कि नगर पालिका के भीतर ‘सत्ता बनाम संगठन’ की खींचतान का असर अब सीधे नगर के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। सूत्रों के अनुसार, सत्ता और संगठन से जुड़े लोगों के बीच मतभेदों के कारण कई मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। यदि यह स्थिति वास्तव में है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में जनता को क्यों भुगतना पड़ रहा है?
वार्ड 27 और समस्याएं बेशुमार
दल्लीराजहरा नगर पालिका के 27 वार्डों का दौरा किया जाए तो सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, सफाई, आवारा पशु, उद्यान और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं बड़े पैमाने पर सामने आती हैं। कई स्थानों पर नागरिक लंबे समय से समस्याओं के निराकरण की मांग कर रहे हैं। डेढ़ वर्ष में नगर पालिका ने ऐसा कौन-सा बड़ा कार्य किया, जिसे शहर की जनता उल्लेखनीय विकास कार्य के रूप में गिना सके? क्या नगर पालिका के पास अगले तीन या पांच वर्षों का कोई स्पष्ट विकास रोडमैप है?
विकास पर भारी आपसी मतभेद
नगर के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में इन दिनों सत्ता और संगठन के बीच कथित खींचतान चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया और विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में भी इसे लेकर चर्चाएं सामने आती रही हैं। सूत्रों की मानें तो नगर पालिका के भीतर कुछ निर्वाचित प्रतिनिधियों के असंतोष को भी संगठनात्मक दबाव के माध्यम से नियंत्रित किए जाने की चर्चा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। लेकिन यदि नगर पालिका के निर्वाचित प्रतिनिधि भी स्वतंत्र रूप से अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं, तो फिर सवाल यह है कि जनता की समस्याएं आखिर किस मंच पर और किसके माध्यम से उठेंगी?नगर में यह चर्चा भी है कि राज्य शासन से मिलने वाली विकास राशि को लेकर अंदरूनी मतभेदों के कारण प्रक्रिया प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह बेहद गंभीर विषय होगा, क्योंकि किसी भी राजनीतिक मतभेद का असर सरकारी राशि और विकास कार्यों पर नहीं पड़ना चाहिए। जनता के लिए आया पैसा राजनीतिक वर्चस्व का विषय कैसे बन सकता है। नगर के अलग-अलग वार्डों में विकास कार्यों को लेकर भी असमानता की शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं काम हो रहा है तो कहीं लंबे समय से नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए इंतजार कर रहे हैं।
आवारा पशु, कचरा और ठप सिस्टम
दल्लीराजहरा की सड़कों पर आवारा पशुओं की समस्या लगातार बनी हुई है। विशेष बात यह है कि नगर पालिका द्वारा शासन की राशि से दो पशु कैचर वाहन खरीदे जाने की बात सामने आती रही है। इसके बावजूद यदि सड़कों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा बना हुआ है तो सवाल उठता है। शहर के कई हिस्सों में कचरे के उठाव और सफाई व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें हैं। स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की स्थिति भी कई स्थानों पर संतोषजनक नहीं होने की बात नागरिकों द्वारा कही जाती है। पिछली गर्मियों में दल्लीराजहरा के कई वार्डों में पेयजल संकट की स्थिति सामने आई थी। नागरिकों ने विरोध और शिकायतें कीं। उस समय आश्वासन दिए गए, लेकिन सवाल यह है कि क्या स्थायी समाधान निकला? सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं किसी भी नगर की प्राथमिक जरूरत होती हैं। फिर दल्लीराजहरा की जनता को इन सुविधाओं के लिए बार-बार आवाज क्यों उठानी पड़ रही है?
इंतजारकब तक, विपक्ष मौन
नगर पालिका अध्यक्ष तोरण लाल साहू द्वारा जल आवर्धन योजना और केंद्रीय विद्यालय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर प्रयास करने की बात कही जाती रही है। लेकिन जनता का सवाल है कि इन योजनाओं की वर्तमान स्थिति क्या है? बताया जा रहा है कि केंद्रीय विद्यालय से संबंधित फाइल रायपुर स्थित संबंधित कार्यालय में लंबित है और जल आवर्धन योजना की प्रक्रिया के भी आगे बढ़ने का इंतजार है। जनता को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं कि फाइल चल रही है। जनता जानना चाहती है कि फाइल किस टेबल पर है, कितनी प्रगति हुई है और धरातल पर काम कब शुरू होगा? मामला केवल सत्ता पक्ष तक सीमित नहीं है। नगर पालिका में विपक्ष की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। कांग्रेस विपक्ष में है, लेकिन जनता का सवाल है कि क्या विपक्ष नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर लगातार और प्रभावी तरीके से सवाल उठा रहा है? डेढ़ वर्ष का समय किसी भी स्थानीय सरकार के लिए अपनी कार्यप्रणाली दिखाने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है। अब जनता केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहती है। दल्लीराजहरा की जनता ने भाजपा को बदलाव और विकास की उम्मीद में जनादेश दिया था। अब उस जनादेश का हिसाब भी जनता ही मांग रही है। अब समय आ गया है कि नगर पालिका के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता के सामने अपनी कार्ययोजना, उपलब्धियां और आगामी विकास का रोडमैप स्पष्ट करें। क्योंकि सवाल अब सिर्फ सत्ता बनाम संगठन का नहीं है, सवाल दल्लीराजहरा के भविष्य का है।
