कमिश्नर के आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं एसडीएम और तहसीलदार
दल्ली राजहरा। जमीन सीमांकन के एक मामले में स्थानीय तहसीलदार द्वारा संभाग आयुक्त के आदेश का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर किस अदृश्य शक्ति के दबाव या फिर डर के कारण तहसीलदार संभाग के अपने सबसे बड़े अधिकारी तक को कुछ भी नहीं समझ रहे हैं?तहसीलदार के इस रवैए ने मुख्यमंत्री श्री साय के सुशासन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अपनी जमीन का सीमांकन कराने में अगर किसी को तहसीलदार या एसडीएम से न्याय नहीं मिले तो वह कलेक्टर और कमिश्नर के पास जाकर गुहार लगा सकता है।इसके पश्चात जब कमिश्नर ऑफिस से सीमांकन का आदेश मिलने के बाद भी स्थानीय तहसीलदार अगर उस आदेश की अवहेलना करे तब सुशासन सरकार में प्रशासन का निरंकुश होने का इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है? नगर के आशा टॉकीज के समीप में वृंदा शर्मा से खरीदी गई जमीन पर जब क्रेता प्रवीण जैन ने जब कुछ निर्माण कार्य करना चाहा तो बीएसपी की जमीन पर अतिक्रमण कर काबिज लोगों ने प्रवीण जैन को धमकाना और जान से मारने जैसी धमकी देनी शुरू कर दिया। इससे परेशान होकर प्रवीण जैन ने खरीदी गई जमीन का सीमांकन कराना चाहा और उसने विधिवत तहसीलदार को आवेदन देकर उक्त कार्य हेतु अनुरोध किया, किंतु बार बार निवेदन पश्चात जब वह सीमांकन करने राजी नहीं हुए तो प्रवीण जैन द्वारा कमिश्नर कार्यालय की ओर रुख किया। उन्होंने सीमांकन के लिए कमिश्नर कार्यालय में आवेदन किया। कमिश्नर ने सीमांकन करने का निर्देश जारी कर दिया, मगर तहसीलदार द्वारा कमिश्नर के आदेश की लगातार अवहेलना करते हुए सीमांकन नहीं कराया जा रहा है। विदित हो कि इसी भूमि विवाद के कारण उक्त भूमि की ओर जाने वाले मेन गेट पर एसडीएम के आदेश से तालाबंदी भी की गई है। नगर के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि आखिर किसके दवाब में तहसीलदार व्यापारी प्रवीण जैन द्वारा खरीदी गई जमीन का सीमांकन नहीं करा रहे हैं? क्या जमीन को हड़पने देने के सीमांकन नहीं कराया जा है? एसडीएम और तहसीदार के माध्यम से व्यापारी प्रवीण जैन को उनका व्यापार चौपट कर देने और मकान तोड़ने की धमकी किसके दबाव में दी जा रही है?
