कच्ची सड़कों, मोटर बोट और 25-30 किलोमीटर पैदल सफर तय कर गांव पहुंचा स्वास्थ्य अमला 405 मरीजों को मिली उपचार की सुविधा
बीजापुर – कलेक्टर विश्वदीप के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.आर. पुजारी के मार्गदर्शन में ग्राम बोड़गा और ताकिलोड में दो दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन आवागमन के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के अपने संकल्प को पूरा किया।

स्वास्थ्य अमले को गांव तक पहुंचने के लिए कच्ची और दुर्गम सड़कों से गुजरना पड़ा। इंद्रावती नदी को मोटर बोट के जरिए पार करने के बाद स्वास्थ्य टीम ने करीब 25 से 30 किलोमीटर का सफर पैदल तय किया। दो दिनों तक कठिन और दुर्गम रास्तों पर पैदल चलकर स्वास्थ्यकर्मी गांव तक पहुंचे और ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया। कई स्थानों पर रात के अंधेरे में भी टीम ग्रामीणों की सेवा में जुटी रही।
दो दिवसीय शिविर में कुल 405 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। जांच के दौरान 21 मलेरिया, 70 बुखार, 2 टीबी, 2 कुष्ठ रोग, 5 मोतियाबिंद और 10 खुजली के मरीज पाए गए। वहीं 179 लोगों की बीपी एवं शुगर की जांच की गई तथा 53 अन्य मरीजों को भी उपचार एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा 8 गर्भवती माताओं और 12 बच्चों का टीकाकरण किया गया।
रात 2 बजे सर्पदंश की सूचना, तत्काल अस्पताल पहुंचाकर कराया उपचार
स्वास्थ्य अमले की तत्परता उस समय भी देखने को मिली, जब रात करीब 2 बजे ग्राम झिल्ली में एक व्यक्ति के सर्पदंश की सूचना मिली। बताया गया कि सर्पदंश के बाद पीड़ित को झाड़-फूंक कराया जा रहा था। सूचना मिलते ही सीएमएचओ डॉ. बी.आर. पुजारी एवं बीएमओ की उपस्थिति में स्वास्थ्य टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़ित को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार शुरू किया गया। समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से मरीज को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सका।
शिविर में डॉ. आदित्य साहू, डॉ. रमेश, BETO बी.आर. कोर्राम, CHO लोकेश, चिरंजीव, सोहन, निशा, पायल, फील्ड कोऑर्डिनेटर सुलोचना, RHO रमेश, रेणुका, बलराम, अतुल, नीलम तथा MT अजय सहित स्वास्थ्य विभाग का अमला मौजूद रहा।दुर्गम रास्तों, नदी पार करने और करीब 25-30 किलोमीटर पैदल सफर जैसी चुनौतियों के बावजूद स्वास्थ्य टीम का गांव तक पहुंचना और ग्रामीणों को उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। स्वास्थ्य अमले की इस पहल ने यह संदेश दिया कि भौगोलिक कठिनाइयां स्वास्थ्य सेवाओं की राह में बाधा नहीं बन सकतीं।
