सुप्रीम कोर्ट में तकनीकी शिक्षा सचिव ने पेश किया झूठा हलफनामा?
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। क्या छत्तीसगढ़ के सीनियर ऑफिसर्स अब कोर्ट को भी गुमराह करने लगे हैं? वे झूठा हलफनामा देकर सुप्रीम कोर्ट तक की आंखों में धूल झोंकने लगे हैं। यह हमारा दावा नहीं, बल्कि छग शासन के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विकास विभाग के एक शीर्ष अधिकारी का हलफनामा इस बात की तस्दीक कर रहा है। आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में इस विभाग के सचिव ने देश की शीर्ष अदालत में झूठा हलफनामा पेश किया है।
छग शासन के कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव ने याचिकाकर्ता 105 व्याख्याताओं के नियमितीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश किया था। कोर्ट को दिए गए शपथ पत्र के अनुसार 105 लोगों को नियुक्त किया जाना था, लेकिन 73 लोगों को ही नियुक्त किया गया है शेष 32 याचिकाकर्ता अफसरों के चक्कर लगाते फिर रहे है। देश के सर्वोच्च न्यायालय को दिए गए हलफनामा को समयसीमा में पालन नहीं किया जाना कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। खबर है कि एक बार फिर याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बस्तर संभाग सहित प्रदेश के शासकीय इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्नीक कॉलेजों में वर्ष 2011-12 में 105 व्याख्याताओं की डेली वेज कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया गया था। जानकारी के अनुसार नियमित व्याख्याताओं की भर्ती किए जाने का हवाला देकर वर्ष 2016 में इन सभी को काम से हटा दिया गया था। निकाले जाने पर सभी व्याख्याताओं ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी, जहां से कथित संतोषजनक निर्णय नहीं आने के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में याचिका दायर कीगई। डिवीजन बेंच ने 7 दिसबर 2018 को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में निर्णय देते हुए 73 व्याख्याताओं की नियुक्ति का आदेश जारी करने के निर्देश शासन को दिए थे। हाईकोर्ट के आदेश के विरूद्ध विभागीय सचिव द्वारा 2018 में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 22 अगस्त 2024 को जारी आदेश में राज्य शासन को आदेश दिया गया था कि वर्ष 2016 में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के याचिकाकर्ता सभी 105 व्याख्याताओं को नियमित किया जाए।
सभी को नियमित करने का दावा
तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव डॉ. बसवराजू एस. ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश सितंबर 2026 के अनुपालन में शपथ पत्र दिया गया है। इसमें उल्लेख किया गया है कि याचिकाकर्ता उम्मीदवारों को 7 दिसंबर 2018 से नियमित किया जा रहा है और उपयुक्त शर्तों के अनुसार उक्त तिथि से उन्हे काल्पनिक लाभ दिया जा रहा है, उनकी परिविक्षा की निर्धारित अवधि पूर्ण मान ली जाएगी। सभी 105 व्याख्याताओं को छग राज्य द्वारा नियमित किए जाने का शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था।शपथ पत्र में सभी 105 व्याख्याताओं को नियमित किए जाने का जिक्र है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा सका है। व्याख्याताओं से मिली जानकारी के अनुसार शपथ पत्र के अनुसार 73 लोगों को ही नियुक्ति दी गई है, शेष 32 व्याखाता आज भी नियुक्ति पाने अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं। इस तरह छत्तीसगढ़ के अफसर सुप्रीम कोर्ट को भी गुमराह करने लगे हैं।
अबसाध ली चुप्पी
इस मामले में विभागीय सचिव से दूरभाष पर संपर्क कर प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया तब उन्होंने फोन तो रिसीव किया, मगर जैसे ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संबंध में पूछा गया तो फोन डिसकनेक्ट कर दिया। इस मामले में जवाब देने से जिम्मेदार अफसर भी बचते रहे।
