सात वर्षों बाद “हजोर भूमकाल” तीन दिवसीय महासभा का मुसालूर चौक में किया गया आयोजन
14,15,16 मई तीन दिनों तक चलेगा सभा, आयोजन में बस्तर संभाग के सातों जिलों के हजारों आदिवासी समुदाय के लोग हुए शामिल
समाज प्रमुखों ने अपनी संस्कृति ,बर -बिहाव ,छठी मरनी जैसे अन्य सामाजिक काम के साथ दैनिक जीवन से जुड़े विषयों पर दी जानकारी
बीजापुर :- गोंडवाना समाज समन्वय समिति बस्तर संभाग छत्तीसगढ़ द्वारा हजोर भूमकल महासभा मुसालूर चौक बीजापुर मैं दिनांक 14, 15 ,16 मई को आयोजित किया जा रहा है।
इस महासभा के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि विक्रम शाह मंडावी बस्तर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक बीजापुर विशिष्ट अतिथि-शंकर कुड़ियम अध्यक्ष जिला पंचायत बीजापुर, कमलेश कारम उपाध्यक्ष जिला पंचायत बीजापुर, नीना रावातिया उद्दे बस्तर विकास प्राधिकरण के सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य, कार्यक्रम की अध्यक्षता मानक लाल दर पट्टी कार्यवाहक महासभा अध्यक्ष, सोहन पोटाई सर्व आदिवासी समाज अध्यक्ष अरविंद नेताम, अकबर कोर्राम, सातों जिले के जिला अध्यक्ष एवं बीजापुर जिले से कामेश्वर दुब्बा कोषाध्यक्ष, अमित कोरसा प्रवक्ता, सुशील हेमला
विनय उईके जिला एवं विकासखंड स्तर के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम मुख्य रूप से समाजिक परिचर्चा है। जिसमें जन्म से लेकर मृत्यु संस्कार गोंडवाना समाज मैं क्या बदलाव लाना है इस पर कोर कमेटी के द्वारा चर्चा कर एक बायलज, गोंडवाना संविधान एक बुक तैयार किया जाना है, इस अवसर पर सातो जिले से हजारों की संख्या में समाज प्रमुखों के साथ सगा जन उपस्थित रहे हैं ।

समाज के रीति रिवाज, देवी देवताओं के महत्व सहित आर्थिक उत्थान विषयों पर की गई चर्चा –
सामाज प्रमुखों के द्वारा सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक और अपने देव गुड़ी देवी देवताओं के संबंध में परिचर्चा भी की जा रही है । जिसमें लगातार आज के परिवेश से जुड़ते विषयों को लेकर भी चिंतन मनन किया गया इस दौरान समाज प्रमुखों के द्वारा कई प्रमुख विषयों पर बातचीत की गई मंच के माध्यम से समाज के प्रमुखों ने बताया कि किस तरह आज के परिवेश में नव युवक युवतियां भी शामिल हो रही हैं । उन्हें हमारी संस्कृति समाज के रीति रिवाज से अवगत कराना है यह सम्मेलन कोरोनावायरस से रुका हुआ था, सात वर्षों बाद इस तरह के सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है । इस सम्मेलन में दूर-दूर से देवी देवता लेकर भी पेग पहुंचे हुए हैं वही सामाजिक और आर्थिक विषयों पर भी बातचीत की जा रही है समाज के प्रमुखों के द्वारा मंच के माध्यम से आदिवासी संस्कृति को किस तरह बचाने की आवश्यकता है इस पर भी चिंतन मनन किया गया कैसे अपने रीति-रिवाजों को नई पीढ़ी को बताना है इस पर परिचर्चा की गई वहीं आर्थिक रूप से मजबूती के लिए भी कई समाज प्रमुखों ने अपनी बातें रखें मिली जानकारी के मुताबिक अलग-अलग जगहों से हजारों की संख्या में विभिन्न आदिवासी समाज के समाज प्रमुखों के सहित अन्य और लोग भी शामिल हुए हैं ।
