केरलापाल एरिया कमेटी की नागारम एलओएस महिला कमांडर ने किया समर्पण, पांच लाख रुपये का था इनाम
बीजापुर :- पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज पी सुंदरराज, उप पुलिस महानिरीक्षक कमलोचन कश्यप के निर्देशन में क्षेत्र में चलाए जा रहे माओवादी उन्मूलन अभियान के तहत केरलापाल एरिया कमेटी की एलओएस कमांडर सोमली सोढ़ी उर्फ वनिता उम्र 32 वर्ष, निवासी सावनार जिला बीजापुर ने शनिवार 4 जून को उप पुलिस महानिरीक्षक सीआरपीएफ कोमल सिंह, पुलिस अधीक्षक आंजनेय वार्ष्णेय, अति0 पुलिस अधीक्षक डॉ पंकज शुक्ला, द्वितीय कमान अधिकारी 85 बटालियन सतीश कुमार दुबे, प्रेम मकान, सहायक कमांडेंट 85 बटालियन सुनील कुमार सिंह के समक्ष माओवादियों की खोखली विचारधारा, जीवन शैली, भेदभाव पूर्ण व्यवहार एवं प्रताड़ना से परेशान होकर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया । सोमली सोढ़ी उर्फ वनिता पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था ।
सोमली सोढ़ी उर्फ वनिता को वर्ष 2003 में गंगालूर एरिया कमेटी एलओएस कमांडर हरिराम माड़वी द्वारा पीएलजीए सदस्य के रूप में भर्ती किया था , जिसे 2004 में मद्देड एरिया कमेटी इंचार्ज डीव्हीसीएम प्रसाद की टीम में काम करने के लिए भेज दिया गया , वहां एरिया कमेटी इंचार्ज मोहन द्वारा पार्टी सदस्य के रूप में पदोन्नत किया गया ।वर्ष 2005 में मद्देड एरिया कमेटी सचिव ज्योतिक्का के द्वारा पेद्दा कोवाली एलओएस डिप्टी कमांडर के पद पर पदोन्नत कियक गया । वर्ष 2006 में मद्देड एरिया कमेटी डॉक्टर टीम अध्यक्ष के पद पर संगठन में काम किया । वर्ष 2007 में जनवरी से मार्च तक 11 नम्बर प्लाटून बी सेक्शन डिप्टी कमांडर के रूप में कार्य किया । अप्रेल 2007 में कम्पनी नम्बर 2 का पीपीसी सदस्य के रूप में भी काम किया था । वर्ष 2014 से 2018 तक बासागुड़ा एलओएस कमांडर के पद पर संगठन में कार्य करने के बाद 2018 से 2021 तक नागारम एलओएस कमांडर के पद पर कार्यरत थी ।
माओवादी संगठन में कार्य करने के दौरान वनिता 2004 में आवापल्ली से इलमिडी सड़क सुरक्षा में लगे जवानों पर फायरिंग करने, 2005 में बीजापुर से आवापल्ली टी पॉइंट में बाइक सवार पार्टी पर फायरिंग करने , 2007 में रानी बादली केम्प पर हमला, 2008 में गंगालूर के कोरचोली में पुलिस पार्टी पर हमला, 2017 में कोंटा के चिंतागुफा में सीआरपीएफ पार्टी पर हमले जैसे कई गम्भीर अपराधों में शामिल रही ।
वनिता ने माओवादी जीवन शैली से त्रस्त होकर भारत के संविधान में विश्वास करते हुए छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए माओवादी गतिविधियों से तौबा कर लिया । समर्पण के पश्चात उत्साहवर्धन हेतु शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत 10000 (दस हजार रुपये) प्रोत्साहन राशि प्रदान किया गया ।
