भगवान भक्त के हृदय में कथा के माध्यम से आते हैं -स्वामी सदानंद सरस्वती

कवर्धा :- परमहंसी गङ्गा आश्रम झोतेश्वर गोटेगांव (मध्यप्रदेश),,,,
भगवान जब भक्तों के हृदय में आकर विराजमान होना चाहते हैं तो वे कथा को माध्यम बनाते हैं और कानों के क्षेत्र से प्रवेश कर ह्रदय देश में विराजमान हो जाते हैं । उनके प्रवेश करते ही हृदय में विद्यमान अनादि आविद्या नष्ट हो जाती है और भक्ति कृत कृत्य हो जाता है । उक्त उद्गार ज्योतिष पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने आज परमहंसी गंगा आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन की कथा कहते हुए व्यक्त किए । पूज्य स्वामी जी ने आगे कहा कि कथा एक बहुत बड़ा माध्यम है । भक्तों के हृदय की व्यथा का हरण करने में कथा का बहुत ही बड़ा योगदान है । हृदय में जब तक संसार बसा रहेगा, तब तक ह्रदय व्यभित रहेगा, इसीलिए ह्रदय में भगवान आए तो संसार हरे, संसार के हरते ही व्यथा भी हर जाती हैं |

श्री कृष्ण जन्मोत्सव की रही धूम

परमहंसी गंगा का दिव्य प्रांगण आज श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन उत्साह और उल्लास से भरा हुआ था, जैसे ही पूज्य स्वामी जी ने श्री कृष्ण के प्रादुर्भाव की कथा सुनाई, सुन कर भक्त भाव विभोर होते रहे, श्रीकृष्ण का गोकूल पहुंचना और दूसरे दिन प्रातः नंदोत्सव को मनाए जाने का कथा में उल्लेख किया, वैसे ही बाजे बजने लगे ज्योतिष पीठ पंडित आचार्य रवि शंकर द्विवेदी जी के द्वारा “नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की” पंक्तियां उदघोषित हुई, पुष्पों और खाद्य पदार्थों खिलौनों की वर्षा होने लगी, लोग नाचने लगे और विद्वान जन एक दूसरे को बधाई देने लगे ।

ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद जी की रही विशेष उपस्थिति

नंदोत्सव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चतुर्मास्य से स्वागत समिति के अध्यक्ष एवं पूज्यपाद शंकराचार्य जी के निजी सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद जी इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे। भागवत के मुख्य यजमान नीलेश भाई पंड्या एवं उनकी पत्नी मयूरी पंड्या ने पुष्प हार और साल दक्षिणा से ब्रह्मचारी जी का स्वागत किया ।

सर्व श्री को वसुदेव और चिरंजीव को श्री कृष्ण बनने का अवसर मिला, नंद बाबा के रूप में सनतकुमार उपाध्याय जी ने उत्सव मनाया ।

कार्यक्रम का संचालन अंकित अवस्थी एवं संयोजन अरविंद मिश्रा ने किया पूज्य स्वामि: जी के प्रवचन के पूर्व स्वामि: श्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के भी प्रवचन हुए ।

आज होगा रुकमणी विवाह –
श्रीमद् भागवत कथा में जहां आज श्री कृष्ण जन्मोत्सव की धूम रही, वही कल रुक्मणी विवाह के साथ श्री कृष्ण परमात्मा के विवाह की कथा पूज्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज (कथा व्यास) द्वारा कही जायेगी । उक्ताशय की जानकारी
पण्डित देव दत्त दुबे ने दी

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