स्वयंभू स्थापित हैं बगदाई देवी, पत्थर चढाने से होती है भक्तों की मनोकामना पूरी

बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर शहर से सटे ग्राम खमतराई-अशोक नगर में बगदाई देवी का मंदिर है। इस मंदिर में नवरात्र के समय श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती हैं । बगदाई माता का यह मंदिर अनूठा है, इसका निर्माण तो अभी हाल के वर्षों में शुरू हुआ है, लेकिन इस स्थान पर लोगों की श्रद्धा काफी पुरानी है।

सैकड़ों वर्षों से बिराजमान है माँ :–

माँ बगदाई 100 साल से भी ज्यादा सम्ह से यहां विराजमान है । जब यहां जंगल हुआ करता था, और जंगली जानवर घुमा करते थे. तब यहां से आने-जाने वाले लोग अपने घर या गंतव्य तक सकुशल पहुंचने के लिए पांच पत्थर रखकर मनोकामना मांगते हुए आगे बढ़ जाते थे । इसके बाद सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचते थे. धीरे-धीरे लोगों को बगदाई वनदेवी के विषय में जानकारी हुई । वर्षों बाद जब यहां बस्ती बसी तो यहां पेड़ के नीचे रखी प्रतिमा के लिए आसपास के लोगों ने छोटे मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर से जुड़े लोग और श्रद्धालुओं ने बताया कि 100 साल पहले से बगदाई वनदेवी यहां स्थापित हैं।
तब से परंपरा चली आ रही है.लोगों ने 5 पत्थर रखकर अपनी मनोकामना की और यह परम्परा आज भी जारी है।

स्वयंभू स्थापित है देवी :

बगदाई वनदेवी के विषय में कहा जाता है कि वह स्वयंभू स्थापित हैं .क्योंकि लगभग 100 साल से लोग यहां आ रहे हैं. लेकिन किसी को यह नहीं मालूम है कि देवी की प्रतिमा कौन लेकर आया है और यहां कैसे पहुंची. कहते हैं कि पेड़ के नीचे ही लोगों को देवी की प्रतिमा दिखी थी. शुरुआती दौर पर तो कोई ऐसे ही प्रतिमा होने की सोच देवी की ओर ध्यान नहीं देता था. लेकिन बाद में एक जमीदार को देवी ने स्वप्न देकर खुद के होने की जानकारी दी.धीरे-धीरे लोगों को देवी की चमत्कार की जानकारी लगने लगी. छोटे से मंदिर के रूप में निर्माण कराकर देवी को स्थापित कर दिया।

मंदिर आने वाले एक भक्त ने बताया कि ”देवी के चमत्कार की जानकारी होने पर वे यहां आए हैं. जब इन्हें देवी के दैवीय चमत्कारों की जानकारी लगी तो वह यहां आकर देवी से प्रार्थना करने लगे. उन्होंने कहा कि अब जो भी हो देवी उनका उद्धार करेगी तो वो वापस आएंगे. उन्होंने देवी की प्रतिमा के सामने पांच पत्थर रखे और अब उनकी मनोकामना पूरी होने पर वे दोबारा यहां पत्थर चढ़ाने आएंगे।मंदिर आने वाले एक भक्त ने बताया कि देवी के चमत्कार का जीता जागता सबूत वह स्वयं है, क्योंकि जब उसको बीमारी हुई थी और डॉक्टरों ने यह कह दिया था कि उनकी बीमारी लाइलाज है.लेकिन इन्हें देवी के दैवीय चमत्कारों की जानकारी लगी तो वह यहां आकर देवी से प्रार्थना करने लगे. उन्होंने कहा कि अब जो भी हो देवी ही उन्हें ठीक करेगी. उन्होंने देवी की प्रतिमा के सामने पांच पत्थर रखे और कहा कि मुझे जल्दी ठीक कर दें, और धीरे-धीरे उनकी बीमारी ठीक होने लगी है।

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