अतिसंवेदनशील गांव गोरना में एमसीसीआर मीडिया कलेक्टिव फॉर चाइल्ड राइट्स ने स्कूली छात्रों के लिए विभिन्न खेलों का कराया आयोजन
बीजापुर — जिले के अतिसंवेदनशील गांव गोरना में विश्व बाल दिवस के अवसर पर (mccr) मीडिया कलेक्टिव फ़ॉर चाइल्ड राइट्स की टीम ने खेल कुद का आयोजन कराया व( go biue) गो ब्लू भी किया ।

विश्व बाल दिवस के अवसर पर यह कार्यक्रम 14 नवंबर से 20 नवंबर तक चलेगा, जिसमे विभिन्न प्रकार के आयोजन भी आयोजित किए जाएंगे ।

जिले के अलग-अलग ग्रामीण एरिया में mccr टीम के द्वारा विभिन्न प्रकार के आयोजन किया जाता रहा है, पहली बार गोरना स्कुल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।
इस आयोजन में बीजापुर के बीईओ जाकिर खान स्वयं उपस्थित रहे, वही पहली से पांचवी के बच्चों के द्वारा जलेबी दौड़, रेस ,मेंढक दौड़ , ऊची कूद ,जैसे खेल में भाग लिया ।
इस तरह के आयोजन से बच्चों में एक्टिविटी बढ़ती है और बुद्धि का विकास भी होता है । बच्चों को प्रोत्साहन के लिए इनाम के रूप में टिफिन वाटर बैग कंपास बॉक्स दिया गया । इस दौरान गोरना स्कूल के टीचर सुरेश ,सोनू ,राजेश मिश्रा ,गटैया यादव,पत्रकार नितिन रोकड़े ,सिरोंज विश्वकर्मा, सतीस अल्लूर ,अभिलाष बघेल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता साहिका व स्वास्थ्य अमला ग्रामीण व परिजन भी उपस्थित रहे ।
गोरना स्कूल आज से 3 साल पहले झोपड़ी में संचालित हो रहा था उस समय बच्चों को तलाशने जाने की आवश्यकता पड़ती थी, किंतु आज इस स्कूल में 40 बच्चे अध्ययनरत हैं । यहां कक्षा पहली से पांचवी तक स्कूल लगती है । जहां गांव का ही एक पढ़ा लिखा बेरोजगार युवक टीचर के रूप में काम कर रहा है । सुरेश जो काफी होनहार है और पूरी मेहनत के साथ बच्चों को अपना समय देता है ।
बीईओ मो. जाकिर खान ने बताया कि बाल दिवस के अवसर पर चाचा नेहरू की याद में हम सब गोरना गांव पहुंचकर बाल दिवस पर एमसीसी आर की टीम के माध्य्म से कार्यक्रम रखा गया । छोटे-छोटे बच्चों के लिए प्रोत्साहन के रूप में गिफ्ट भी दिए गए । खास बात यह है कि गोरना गांव शासन-प्रशासन की पहुंच से दूर था । तीन साल पहले यहां स्कूल खोला गया था । ग्रामीण वातावरण को अच्छा करने के लिए एक अच्छी पहल है कि आज शिक्षा विभाग की टीम भी सहयोगी बनी अच्छा पहल व सराहनीय पहल थी कि बच्चे इस आयोजन को लेकर काफी उत्साहित दिखे इस तरह के मोटिवेशन बच्चों का बढ़ता है । स्वास्थ्य सुविधा का भी पत्रकारों ने ध्यान रखा और स्वास्थ्य अमला भी बुला रखा था, जहां बीमार ग्रामीण आकर दवाइयां ले रहे हैं ।
