छ. ग. में आदिवासी आरक्षण यथावत रखने को लेकर सीपीआई ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को सौंप ज्ञापन
कांग्रेस, भाजपा नही चाहते ST SC OBC को आरक्षण का लाभ मिले,आरक्षण विरोधी है सूबे कीभूपेश सरकार -कमलेश झाड़ी
बीजापुर:- भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी जिला कमेटी बीजापुर के द्वारा अनुसुचित जनजाति वर्ग का 32% आरक्षण को मौजूदा सरकार में कम किए जाने को लेकर राज्यपाल के नाम कलेक्टर बीजापुर को ज्ञापन सौंपा है।

सीपीआई के जिला सचिव कमलेश झाड़ी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि। आदिवासी समाज देश में आज भी पिछड़ा हुआ है जो अपनी मूलभूत आवश्यकता भोजन शिक्षा चिकित्सा से वंचित है वर्षों से आदिवासी समाज जल जंगल जमीन को बचाने संरक्षित करने की मांग को लेकर संघर्षरत रहा हैं आदिवासी वनवासियों के अधिकार को संरक्षित करने के लिए भारतीय संविधान में पेशा कानून बना रखा है, परंतु देश की राज्य सरकारें मनमाने ढंग से शासन कर आदिवासियों को मिले संवैधानिक अधिकारों को कुचलती, रही हैं विगत वर्षों में छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज के लोगों पर नक्सली के नाम से प्रताड़ना व प्रशासनिक अत्याचार बड़े हुए हैं पेशा कानून का पांचवी अनुसूची का उल्लंघन राज्य में बड़े पैमाने पर बढ़ा हुआ है । छत्तीसगढ़ की आदिवासी समाज अपने हक अधिकार के मांगों को लेकर लगातार लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रही है खासतौर से बस्तर संभाग में यह संघर्ष जोरों पर है राज्य में कांग्रेस की भूपेश बघेल की सरकार व पूर्व में भारतीय जनता पार्टी की रमन सिंह की सरकार ने अनुसूचित जनजाति के बीच अपने राजनीतिक पैट बढ़ाने के लिए कई तरह के तत्कालिक जनविरोधी फैसले लेते रहे हैं जिससे आदिवासी समाज को गंभीर नुकसान सहने पड़े हैं परिणाम स्वरूप गंभीर रहने वाले आदिवासी समाज अब मुखर होते जा रहे हैं।
वहीं 19 सितंबर 2022 को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के दिए गए फैसले में राज्य के अनुसूचित जनजाति को 2012 से प्राप्त 32 % आरक्षण को कम करके 20% कर दिया गया है। इस फैसले से राज्य की अनुसूचित जनजाति के हक अधिकार में कमी आई है ।जिससे आदिवासी समाज काफी आक्रोशित व आंदोलित है ।
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की आदिवासी समाज 15 नवंबर 2022 को छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ व 32% आरक्षण को यथावत रखने की मांग को लेकर राज्य में आर्थिक नाकेबंदी करने आंदोलन करने की घोषणा की है। जिसका समर्थन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला कमेटी बीजापुर करती है।
और महामहिम राज्यपाल महोदया से सीपीआई मांग करती है की राज्य की अनुसूचित जनजाति समुदाय के जन भावनाओं को गंभीरता से ध्यान में लेते हुए प्राप्त 32%आरक्षण को यथावत रख आदिवासी समाज के सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक विकास के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
अन्यता आनेवाले दिनों में सीपीआई भी बड़ी अंदोलन की ओर कदम बढ़ाएगी।
