“फर्जी का बोलबाला, असली के मुंह पर ताला”

भोपालपटनम (जरखांन) :- विगत 29/5/2022 को पहले भृत्य से बाबू बना, अब बाबू से भृत्य ” शीर्षक से खबर छपा था. जिसमें भृत्य ने अपने काले कारनामे द्वारा और फर्जी अंक सूची के आधार पर नौकरी प्राप्त किया था. उस खबर का असर हुआ. प्रशासन ने तत्काल सेवा से बर्खास्त कर दिया. लेकिन इसके बर्खास्तगी के बाद अन्य फर्जी अंक सूची के आधार पर भृत्य बनेऔर भृत्य से बाबू बने शासकीय लोगों में हड़कंप मचा है. उसका खुलासा भी जल्द होगा. बेचारे नियमित छात्रों को दरकिनार कर प्रशासन ने भी घोर भ्रष्टाचार करते हुए, नव साक्षरता प्राप्त करने वाले को शासकीय सेवा में प्राथमिकता दी. जिससे नियमित छात्र बेरोजगारी का दंश आज भी भोग रहे हैं. इस जिले की हकीकत यह है कि यहाँ ” फर्जी का बोलबाला, असली के मुंह पर ताला ” है.

जिले में कलेक्टर के पास एक लिखित शिकायत रवि रापर्ती के विरुद्ध किया गया था. जिसमें शिकायतकर्ता ने पुख्ता प्रमाण पत्र के साथ आरोप लगाया कि रवि ने नव साक्षरता अभियान के तहत नौकरी पाया है, जबकि वह पहले से ही नियमित छात्र रह चुका है. कक्षा 5,8,10,12 वी उतीर्ण कर लिया है. कनिष्ठ भृत्य होने के बाद भी कुट रचना कर वरिष्ठता के आधार पर भृत्य से बाबू के पद पर पदोन्नति पा लिया है. शिकायत सही पाये जाने के बाद प्रशासन ने तत्काल भृत्य बना दिया. इसके बाद प्रशासन ने जांच में पाया कि भृत्य पहले से ही नियमित छात्र रह कर 12 वी उतीर्ण है. नव साक्षरता का फर्जी 5-8 वी का अंक सूची बनवाया है तो कलेक्टर राजेन्द्र कटारा ने कार्यालय, कलेक्टर जिला- बीजापुर ( छ. ग. ) ( स्कूल शिक्षा विभाग) आदेश क्रमांक/2953 जि. शि. अ. / स्थापना/स्था.-03/2022-23 बीजापुर दिनांक 30/12/2022 छ. ग. सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 25 में निर्धारित विभागीय जांच प्रतिवेदन में आरोप सिद्ध होने पर तत्काल सेवा समाप्त किया जाता है.

रवि रापर्ती के बर्खास्तगी से फर्जी तरीके से नव साक्षरता अभियान के तहत 5 वी ,8 वी का अंक सूची प्राप्त कर जिला पंचायत, शिक्षा, लोक निर्माण ,तहसील आदि विभागों में नौकरी करने वालों में हड़कंप मचा है. क्योंकि ये पहले से ही 12 वी और स्नातक उतीर्ण कर चुके हैं.

सूत्रों के अनुसार जिले में एक तिहाई चतुर्थ श्रेणी में पदस्थ शासकीय कर्मचारी नव साक्षरता की 5 वी, 8 वी फर्जी अंक सूची हासिल की है.

यह मामला लगभग 2014 में उठा था किन्तु उस समय कार्यावाही होना था कि तत्कालीन जांच अधिकारी गजेन्द्र ठाकुर का आनन फानन में स्थान्तरण कर दिया गया.

आखिर इन कर्मचारियों के साथ ही उन लोगों पर भी कार्यवाही होना चाहिए. जिन्होंने इस फर्जी अंक सूची बनवाने में मदद की. मजेदार तथ्य यह है कि माना कि छात्र को 400 में से 292 अंक प्राप्त हुआ है जिसका प्रतिशत 73 है किन्तु उसे 93 प्रतिशत किया गया. नव साक्षरो के अंक कम है और प्रतिशत अंको से अधिक है. यह भी जांच का विषय है. साथ ही रोजगार कार्यालय के कर्मचारियों पर भी कार्यवाई होना चाहिए क्योकि उन्होंने भी पहले 5,8,10,12 वी और स्नातक का नामांकन कर लिया. लेकिन चंद कागजी टुकड़े के लिए अपना जमीर बेच कर पुनः फर्जी आधार पर नामांकन किया है.

बाजार में चर्चा का विषय है कि खंड चिकित्सालय में पदस्थ में फार्मासिस्ट ने फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाया था. उसे बर्खास्त कर एफआईआर कर जेल भेजा गया. क्या इन पर भी इसी तरह का कार्यवाई की जायेगी? यक्ष प्रश्न बना हुआ है.

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