बीजापुर DMF में नान से बड़ा घोटाला, अमित जोगी ने कहा-ईडी, सीबीआई से करेंगे जांच की मांग,

सरकार पर पक्ष पात का आरोप-शहीद कांग्रेसियों के परिजनों को डीसी की नौकरी, तो शिक्षको की विधवाओं को अनुकम्पा का हक क्यों नही

बीजापुर :- शहीद कांग्रेसी नेताओं के परिजनों को भूपेश सरकार डिप्टी कलेक्टर की नौकरी दे सकती है तो मृत शिक्षको की बेवाओ को अनुकम्पा के रूप में भृत्य जैसी मामूली नौकरी देने में असमर्थ क्यों है? यह कहना है छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी का, जो पांच सूत्रीय मांगो को लेकर कलेक्ट्रेट घेराव का नेतृत्व करने बीजापुर पहुँचे थे।

पत्रकारों से चर्चा में अमित ने अनुकम्पा नियुक्ति की मांग को लेकर विधवाओं के मुंडन पर मुख्यमंत्री पर कटाक्ष किया। अमित ने कहा कि सीएम चाहे तो विधवाओं के लिए नियम शिथिल कर नियुक्ति दे सकते है। जब शहीद कांग्रेस नेताओं के परिजनों को राज्य प्रशासनिक पदों पर नौकरी दे सकते है तो इन्हें क्यो नहीं, ऐसा भेदभाव इनके साथ क्यों।

घेराव के दौरान अमित ने बीजापुर में डीएमएफ में नान से बड़ा घोटाला का आरोप लगाया।
उनका कहना था कि जिले को 700 करोड़ प्रतिवर्ष डीएमएफ के तहत मद प्राप्त है, लेकिन यह पैसा जिले के विकास पर खर्च ना होकर पहले भाजपा और अब कांग्रेस विधायक के लिए लूट का जरिया बना हुआ है, 20 सालों में यहां लगभग 14 हजार करोड़ का घोटाला डीएमएफ में हुआ है, जिसकी शिकायत वे जल्द ही ईडी, सीबीआई से करेंगे।

बीजापुर अब बना आन्दोलनपुर

अमित ने कहा कि सरकार की वादा खिलाफी के चलते बीजापुर में कर्मचारी वर्ग उद्वेलित है। जगह जगह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक आन्दोलन पर है। बीजापुर की पहचान अब आन्दोलनपुर के रूप में हो चली है।

भूपेश सरकार ने सत्तासीन होते 10 दिनों के भीतर नियमितीकरण का वायदा किया था, जो साढ़े चार साल बाद भी पूरे नही हुए। उधर यूपी में प्रियंका गांधी संविदा नही सम्मान का नारा दे रही है।

सिलगेर गोलीकांड की जांच क्यों नहीं?

बेरिकेड्स तोड़ अंदर घुसे कार्यकर्ता
पांच सूत्रीय मांग को लेकर कलेक्ट्रेट घेराव करने निकले जनता कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बेरिकेडिंग के नजदीक गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन किया, लेकिन थोड़ी देर बाद ही नारेबाजी करते बेरिकेड्स पर चढ़ाई कर दी और सुरक्षा घेरा तोड़ अंदर दाखिल हो गए, इस दौरान कार्यकर्ताओ की पुलिस के साथ जमकर झूमा झटकी हुई।

अनुकम्पा, नियमितीकरण के अलावा सिलेगर गोलीकांड को लेकर भी अमित सरकार पर बरसे। उनका कहना था जब सारकेगुड़ा, एड्समेटा गोलीकांड की न्यायिक जांच हो सकती है तो सिलगेर की क्यों नहीं, क्या वजह है कि मारे गए निहत्ते आदिवासियों को सरकार न्याय देंना नही चाहती, मुख्यमंत्री जब लखीमपुर जाकर वहांपीड़ित किसानों के परिवारों को मुआवजा बांट सकते है तो सिलगेर में मारे गए आदिवासी भाई-बहनों परिवारों को मुआवजा देने में देरी क्यों हो रही है।

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