जिला बीजापुर की धरातल पर फैला चिटफंड कंपनियों का मकड़जाल, पीड़ित निवेशकों को चिटफंड कानून के तहत कोई राहत नहीं

बीजापुर। छत्तीसगढ़ में संचालित कई चिटफंड कंपनियों- सहारा इंडिया लिमिटेड, साईं प्रसाद प्रॉपर्टीज लिमिटेड, साईं प्रसाद ग्लोबल लिमिटेड, पीएसीएल लिमिटेड, आरोग्य धनवर्षा सहित कई चिटफंड कंपनियों के एजेंटों ने अनुसूचित जनजाति बहुल जिला बीजापुर के भोले-भाले ग्रामीण निवेशकों को कम अवधि में अधिकतम ब्याज, रकम दोगुनी करने जैसे कई आश्वासन देकर चिटफंड कंपनियों में करोड़ों की रकम निवेश कराया। आरोप है कि निवेशकों की राशि परिपक्वता अवधि पूर्ण होने पर इन चिटफंड कंपनियों के पदाधिकारी निवेशकों की मूल राशि तक लौटाने में असमर्थ रहे। इन चिट फण्ड कंपनियों के द्वारा लोक लुभावने वायदे कर एजेंटों के माध्यम से आमजन की खून पसीने की कमाई को जमा कर लूटा गया। सहारा इंडिया परिवार / सहारा समूह की कंपनियों- सहारा इंडिया लिमिटेड़, सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट्स रेंज लिमिटेड, सहारा क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, स्टार्स मल्टीपरपज को ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपरपज को ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड में स्थानीय एजेंटों के द्वारा बीजापुर जिले के भोले-भाले ग्रामीण अंचल के निवेशकों को कम अवधि में अधिकतम ब्याज, रकम दोगुनी करने एवं सहारा इंडिया को बैंक बताकर जैसे कई आश्वासन देकर आमजन की खून पसीने की कमाई को निवेश कराकर लूटा गया। जबकि वास्तविकता यह है कि सहारा कोई बैंक नही है। यह न तो राष्ट्रीयकृत बैंक है और न ही निजी अथवा सहकारी बैंक। बताया जा रहा है की असल में यह एक विशुद्ध चिट फंड कंपनी है। सहारा इंडिया परिवार / सहारा समूह के द्वारा सहारा इंडिया लिमिटेड़, सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट्स रेंज लिमिटेड, सहारा इंडिया कमर्शियल कारपोरेशन लिमिटेड, सहारा क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, स्टार्स मल्टीपरपज को ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपरपज को ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड़, सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड, सहारा हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, सहारा क्यू गोल्ड मार्ट लिमिटेड़, सहारा प्योर इटेबल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड़, सहारा इंडिया टूरिज्म डेवलपमेन्ट कॉर्पोरेशन, एम्बी वैली यूके लिमिटेड़ एवं हमारा इंडिया क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड देश के अनेक स्थानों में संचालित किया जा रहा है। सहारा इंडिया परिवार / सहारा समूह में जमा रकम की परिपक्वता अवधि पर रकम देने की बारी आई तो सहारा इंडिया लिमिटेड के पदाधिकारी निवेशकों को गुमराह करने लगे एवं सहारा-सेबी विवाद माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने का हवाला देते हुए निवेशकों की मूल राशि भी वापस भुगतान करने से साफ इंकार कर दिए। पीड़ित निवेशक अपनी जमा मूल रकम पाने के लिए सहारा इंडिया शाखा कार्यालय- दंतेवाड़ा, रीजनल सह सेक्टर कार्यालय- जगदलपुर के चक्कर लगाकर निराश हो चुके हैं। पीड़ित निवेशकों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

विदित हो कि सहारा-सेबी विवाद की जड़ सहारा इंडिया परिवार / सहारा समूह की कंपनी- सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड़ एवं सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड़ से संबंधित है, न कि सहारा समूह की अन्य कंपनियों से संबंधित है। जैसा कि सहारा समूह के वकील के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में यह दावा किया गया था कि सहारा इंडिया परिवार ने निवेशकों की रियल इस्टेट बांड व सहारा हाउसिंग बांड का पैसा अपने स्तर पर आम निवेशकों को लौटा दिया है यह सच नहीं है?असल में सहारा इंडिया परिवार ने सहारा सेबी विवाद शुरू होने के बाद एक खेल खेला है? एक ओर उसने सेबी के आदेश को चुनौती दी तो दूसरी ओर सहारा रियल इस्टेट बांड तथा सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन की स्कीमों के तहत जुटाए गए रकम को आम निवेशकों को लौटाने के बजाए सहारा Q शॉप नाम की नयी कम्पनी खोलकर सहारा Q शॉप फिक्स डिपॉजिट बांड में तब्दील कर दिया। अर्थात निवेशकों को किसी भी प्रकार की कोई नगद रकम सहारा समूह की ओर से नही दी गयी थी। निवेशकों के हाथ सिर्फ Q शॉप बांड लगे थे। निवेशकों के पास उपलब्ध Q शॉप बांड इसके साक्ष्य के रूप में मौजूद हैं। चूंकि वर्तमान में Q शॉप बांड भी परिपक्व हो चुके हैं। लेकिन इन Q शॉप बांड की रकम भी अभी तक सहारा ने आम निवेशकों को नही लौटाया है। सबसे आश्चर्यजनक धोखाधडी वाली बात यह है कि सहारा Q शॉप बॉन्ड में मैच्यूरिटी राशि का उल्लेख भी नही है। इतना ही नही बल्कि सहारा समूह के द्वारा कई कंपनियां खोलकर कई बचत योजनाओं के द्वारा रकम जुटाई गई है। लेकिन सहारा समूह के द्वारा किसी भी योजनाओं की परिपक्वता रकम पीड़ित निवेशकों को भुगतान नही की गई है। जिसकी वजह से निवेशक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

सहारा ने किया बेसहारा, चिट फंड कानून से न मिला सहारा-
अधिकारिक जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ में चिटफंड का जाल फैला कर निवेशकों को ठगने और लूटने वाले चिटफंड और गैर बैंकिंग कंपनियों की गैर कानूनी गतिविधियों पर कार्रवाई करने के लिए विधानसभा में पारित छत्तीसगढ़ निक्षेपको के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 को राज्यपाल व राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी। इस अधिनियम के तहत प्रदेश में कार्यरत वित्तीय कंपनियों को अपनी गतिविधियों, दस्तावेजों और जमाकर्ताओं से जमा कराई गई राशि की पूरी जानकारी संबंधित जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को 2 महीने के भीतर उपलब्ध करानी थी। इस कानून के तहत लोगों से पैसे जमा करा कर भागने या धोखाधड़ी करने वाली चिट फण्ड कंपनियों और उसके संचालकों के बैंक खाते तथा संपत्ति सीज करने, जुर्माना और कैद की सजा देने के व्यापक अधिकार कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को दिए गए हैं।

इस चिट फंड एक्ट के प्रावधान- निवेशको की जमा रकम नहीं लौटाए जाने पर उस कंपनी या उसके विभिन्न पदाधिकारियों की संपत्ति जिला कलेक्टर द्वारा कुर्क की जा सकती है। कपट पूर्ण कार्य करने के दोष सिद्ध होने पर कंपनी पर 3 लाख से 5 लाख तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा और कंपनी के डायरेक्टर से लेकर लोकल स्टाफ को 3 साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक की कैद का भी प्रावधान है।
विदित हो कि सहारा समूह की कंपनियों के द्वारा निवेशकों के साथ की गई धोखाधड़ी के मामलों में देश की कई पुलिस थानों, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में सहारा फाउंडर सह चेयरमैन सुब्रत राय, डायरेक्टर्स सीमांतो राय, सुशांतो राय, चांदनी राय, रिचा राय सहित रीजनल मैनेजर, सेक्टर मैनेजर एवं शाखा प्रबंधकों पर अपराधिक प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। देश की कई उपभोक्ता आयोगों ने भी आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए गिरफ्तारी वारंट भेजते हुए सुब्रत राय को गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया है। छत्तीसगढ़ में भी कुछ जिलों के कलेक्टरों के द्वारा छत्तीसगढ़ निक्षेपको के हितों का संरक्षण अधिनियम के तहत चिट फंड कंपनियों के पदाधिकारियों की संपत्ति कुर्क हेतु आदेश जारी किए गए हैं। अत्यंत दुख की बात है कि पीड़ित निवेशकों के द्वारा विगत वर्षों में जिला कलेक्टर कार्यालय बीजापुर में आवेदन देने के बावजूद भी छत्तीसगढ़ निक्षेपको के हितों का संरक्षण अधिनियम के तहत बीजापुर पुलिस प्रशासन एवं जिला प्रशासन के द्वारा पीड़ित निवेशकों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दिलाई गई है। ऐसी स्थिति में बीजापुर जिले में चिट फंड कंपनियों की ठगी से पीड़ित निवेशकों के लिए छत्तीसगढ़ निक्षेपको के हितों का संरक्षण अधिनियम का कोई औचित्य नहीं है। बीजापुर जिले में चिट फंड कंपनियों की ठगी से पीड़ित निवेशकों का दुर्भाग्य है कि उनके लिए बीजापुर जिला उपभोक्ता आयोग में अध्यक्ष व सदस्य के पद रिक्तता की वजह से उपभोक्ता न्यायालय का सहारा भी नही रहा। पीड़ित गरीब निवेशक जिला उपभोक्ता आयोग, दंतेवाड़ा में परिवाद दायर करने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है। पीड़ित निवेशकों ने मीडिया के माध्यम से माननीय विधायक महोदय का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए छत्तीसगढ़ निक्षेपको के हितों का संरक्षण अधिनियम के तहत राहत दिलाने का निवेदन किया है। जिला उपभोक्ता आयोग, बीजापुर में अध्यक्ष व सदस्यगणों की पदस्थापना कराकर कार्य रूप में परिणित कराने की मांग आम जनों ने की है।

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