आमजनों में बेहद लोकप्रिय विवेक ढांड हुए 65 के, सबसे लंबे समय तक प्रशासनिक मुखिया रहने का बनाया रिकार्ड
जन्मदिन पर ढांड को बधाईयां देने पहुंचे चाहने वाले, संपर्क में रहने वाले को सबसे पहले जन्मदिन की देते हैं बधाईयां
रायपुर :- (आरएनएस)। अविभाजित मध्यप्रदेश में जब छत्तीसगढ़ जुड़ा हुआ था उस समय के 1981 बैच के आईएएस विवेक ढांड ने अपनी लंबी पारी में प्रशासनिक क्षमता का उत्कृष्ठ प्रदर्शन कर हर मुख्यमंत्री के साथ काम कर अपनी प्रशासनिक दृष्टि से आम समस्याओं का जबर्दस्त समाधान कर आम लोगों को राहत पहुंचाने में रिकॉर्ड बनाया है। श्री ढांड मध्यप्रदेश आईएएस अधिकारियों में से उन चुनिंदा अधिकारियों में शुमार किये जाते हैं जो संवेदनशीलता के साथ विनम्र रहकर हर किसी से मिलकर उसके दर्द को बांटने में समस्या के तत्काल निराकरण के लिए जाने जाते हैं। छोटा बड़ा कोई भी व्यक्ति कभी भी उनसे घर कार्यालय में मिलकर अपनी समस्याओं का जहां समाधान पाता रहा है वहीं सरल व्यवहार के कारण आज प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी विद्यार्थी जीवन से ही उनके अनुभवों का लाभ लेते रहे हैं। छत्तीसगढ़ की आम जनता के बीच विवेक ढांड छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा की कहावत को देश विदेश में प्रमाणित करने में अव्वल रहे हैं। उनके 65 वें जन्मदिवस के अवसर पर प्रदेश के प्रशासनिक अमले के साथ ही हर आम ओ खास सुबह से ही उनके घर पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से बधाई देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहा है।
छत्तीसगढ़ के कद्दावर ब्यूरोक्रेट विवेक ढांड आज 65 साल के हो गये। 1981 बैच के आईएएस रहे ढांड के नाम सूबे के सबसे लंबे समय तक प्रशासनिक मुखिया रहने का रिकॉर्ड है। 2018 में अपनी मुख्य धारा की प्रशासनिक पारी से रिटायरमेंट लेने वाले विवेक ढांड , आज भी उतने ही चुस्त-दुरुस्त हैं, जितने की वो 2018 के पहले थे। प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहद लोकप्रिय ढांड , जब आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं, तो उन्हें बधाई और शुभकामनाएं देने की होड़ लगी है। जन्मदिन मनाने और विश करने को लेकर उनकी एक बेहद ही प्यारी आदत है, जिसे उन्होंने वर्षों से संभाल रखा है। वो ढ्ढ्रस् के ग्रुप में सबसे हर किसी के जन्मदिन को सबसे पहले विश करते हैं। कई ब्यूरोक्रेट तो कहते हैं, कि ढांड सर के मैसेज से ही पता चलता है कि आज किनका जन्मदिन है।
2014 में रमन कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक मुखिया की कमान संभालने वाले विवेक ढांड करीब पौने चार साल तक चीफ सिकरेट्री रहे। ढांड के नाम पर सबसे लंबे समय तक चीफ सिकरेट्री रहने का रिकार्ड है। यही नहीं कीर्तिमान के नजरिये से विवेक ढांड के नाम और भी उपलब्धियां दर्ज हैं। 2018 में उन्होंने ङ्कक्रस् अप्लाई किया और फिर रेरा के वो पहले चेयरमैन बने। रेरा चेयरमैन से रिटायरमेंट के बाद अब उन्हें नवाचार आयोग का पहला चेयरमैन बनाया गया है। इससे पहले की बात करें तो छत्तीसगढ़ के वो पहले आईएएस थे, जो माटीपुत्र से प्रशासनिक मुखिया के पद तक पहुंचे। 2014 में पहली बार ऐसा हुआ, जब मुख्य सचिव के पद पर रायपुर के ही किसी छात्र की ताजपोशी हुई है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रहे हैं शिक्षक:-
विवेक ढांड की छवि अनुशासित अफसर की रही है। श्री ढांड ने रायपुर स्थित साइंस कॉलेज से पढ़ाई की है। गणित विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए साइंस कॉलेज में अध्यापन कार्य भी किया। जिस वक्त ढांड साइंस कॉलेज में पढ़ाते थे, उस वक्त मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वहां के स्टूडेंट थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब अपने कॉलेजे के दिनों को याद करते हैं, तो अपने शिक्षक रहे विवेक ढांड का भी जिक्र जरूर करते हैं। वर्ष 1979 से 1980 तक शासकीय विज्ञान महाविद्यालय, रायपुर में सहायक प्राध्यापक (गणित) के रूप में रहे। साल 1981 में पहले ही प्रयास में ही उनका सेलेक्शन ढ्ढ्रस् में हो गया। गणित और रसायन शास्त्र विषय के साथ ढ्ढ्रस् में पूरे देश में उन्हें 14वां स्थान मिला था। अविभाजित मध्यप्रदेश में अपने बैच में उस वक्त वो सबसे युवा थे। श्री ढांड को अविभाजित सरगुजा जिला में बतौर कलेक्टर वर्ष 1986-87 में पहली पोस्टिंग मिली।
65 की उम्र में भी कमाल की फिटनेस
65 साल की उम्र में भी विवेक ढांड में कमाल की फिटनेस हैं। उनकी नियमित दिनचर्या और फिटनेस रूटिन आज भी मेंटन है। वो आज भी नियमित रूप से सुबह 5-6 बजे उठ जाते हैं। पिछले दिनों ही उनका एक कार्यक्रम में डांस वीडियो जब सामने आया, तो उनकी फिटनेस देख लोगों ने दांतों तले अंगुली दबा ली। आज भी वो हर दिन जिम जाते हैं। विवेक ढांड को आज भी किताब पढऩे का उन्हें खूब शौक है। फुर्सत मिलते ही वो किताबों की दुनिया में खो जाते हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होने के बाद अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान भी श्री ढांड कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। दुर्ग कलेक्टर के रूप में उनके कार्यकाल को आज भी याद किया जाता है। तब संपूर्ण साक्षरता कार्यक्रम के क्रियान्वयन में दुर्ग की पूरे देश में पहचान बनी थी। दुर्ग के अलावा वे सरगुजा, उज्जैन व जबलपुर जिले में कलेक्टर और बस्तर संभाग के कमिश्नर भी रहे हैं।
बाबरी विध्वंस के वक्त थे जबलपुर कलेक्टर
साल 1992 से 1994 तक ढांड अविभाजित जबलपुर के कलेक्टर थे। 6 दिसम्बर, 1992 को राम-जन्मभूमि बाबरी-मस्जिद की घटना के बाद जब पूरा देश सांप्रदायिकता की आग में था, तो उन्होंने अपनी प्रशानिक दक्षता को पेश करते हुए बहुत की सतर्कता से जबलपुर में शांति स्थापित की, यहां कोई भी हिंसा नहीं भड़कने दी। 2003 से 2009 तक वो तात्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के सचिव/ प्रमुख सचिव तथा सचिव/ प्रमुख सचिव, जनसंपर्क, विमानन, ऊर्जा एवं जल संसाधन विभाग के साथ-साथ कई अहम जिम्मेदारी संभाली।
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