बच्चों से बेगारी करवा रहे हैं गोटीगुड़ा प्राथमिक शाला के शिक्षक
शिक्षक स्कूल में आराम फरमाते हैं, या गायब रहते हैं
बकावंड (अर्जुन झा) :- विकासखंड बकावंड की कुछ शालाओं में बच्चों से पूरे समय बेगारी कराई जा रही है। बच्चों को पढ़ाई के अलावा दीगर काम में लगाना जहां नियम विरुद्ध है, वहीं अल्पवय बच्चों से श्रम कराना बालश्रम कानून के विपरीत है। बावजूद ग्राम पंचायत सतोषा -2 की उच्च प्राथमिक शाला गोटीगुड़ा के बच्चों को पढ़ाना लिखाना छोड़ शिक्षक उनसे बाहर से ढो कर मिट्टी लाने, पौधों में पानी डालने जैसे मेहनत भरे काम करा रहे हैं। शिक्षक या तो शाला भवन के अंदर आराम फरमाते रहते हैं या फिर विभागीय कार्य से बाहर होने की दुहाई देकर बचने की फिराक में रहते हैं।

ग्राम पंचायत सतोषा -2 के आश्रित गोटागुड़ा की शासकीय प्राथमिक शाला को शिक्षकों ने बच्चों के शोषण का अड्डा बना लिया है। शाला की पहली से लेकर पांचवी तक की कक्षाओं में 6 से 11 साल तक की आयु वाले अनुसूचित जाति जनजाति व पिछड़े वर्गों के बच्चे अध्ययनरत हैं। शाला के प्रधान पाठक ओमकार पांडे व शिक्षक खेमेश्वर पांडे की मनमानी चरम पर है। प्रधान पाठक व शिक्षक कभी समय पर शाला नहीं पहुंचते और समय से पहले अपने घरों के लिए रवाना हो जाते हैं। जब वे शाला में रहते हैं, तब बच्चों से पूरे समय मेहनत वाला काम कराते हैं। कुछ दिन पहले स्कूल के बच्चे बाहर सड़क किनारे की जमीन खोदकर वहां से घमेला भर भरकर मिट्टी ले जाते दिखाई देते रहे हैं। मिट्टी से भरे घमेलों को सिर पर रखकर बच्चे स्कूल के अंदर ले जा रहे थे। स्कूल कैंपस के अंदर का जायजा लेने पर पता चला कि बच्चे मिट्टी से बाउंड्री के अंदर की भराई कर रहे हैं। वहीं कई बच्चे पौधों में पानी डालने का काम कर रहे थे। उस समय मौजूद शिक्षकों से जब इस संवाददात ने बच्चों से मेहनत वाला काम कराए जाने के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि छोटे- मोटे काम बच्चों से कराना पड़ता है। शिक्षकद्वय ओमकार पांडे व खामेश्वर पांडे से जब यह कहा गया कि पढ़ाई के समय छोटे छोटे बच्चों को फावड़ा पकड़ा कर और मिट्टी भरे घमेलों को सिर पर रखवाकर मिट्टी की ढुलाई कराना और पौधों की सिंचाई बच्चों से कराना क्या अमानवीय कृत्य नहीं है, उनका कहना था कि शाला परिसर का रख रखाव, पौधों को पानी पिलाना और मिट्टी डालना बच्चों का काम है। दीपावली के कारण यह काम कराया जा रहा है। इस मामले में जब विकासखंड शिक्षा अधिकारी से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी आपसे मिल रही है। मामले को संज्ञान में लेकर मैं उचित कार्रवाई करूंगा।
बच्चे हाजिर, शिक्षक नदारद
कुछ इसी तरह की भर्राशाही सतोषा -2 की शासकीय उच्च माध्यमिक शाला गौराबाहर में भी चल रही है। शाला के दोनों शिक्षक अक्सर नदारद रहते हैं जबकि बच्चे स्कूल में बराबर उपस्थिति दर्ज कराते हैं। जिस दिन प्राथमिक शाला गोटागुड़ा में बच्चों से बेतहाशा श्रम कराया जा रहा था, उसी दिन उच्च माध्यमिक शाला से दोनों शिक्षक लामाराम बघेल अधीक्षक और रमेश बोले सीएसी गायब थे। शिक्षकों के उपस्थित नहीं रहने से इस मिडिल स्कूल के बच्चे खेलने कूदने में मगन नजर आ रहे थे। बताते हैं कि यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं थी, बल्कि अक्सर ऐसा होता है। इसके कारण बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा है। सीएसी रमेश बेले को संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि मैं डाक छोड़ने निकला हूं। एक शिक्षक स्कूल में होगा। सीएससी और अधीक्षक दोनों के गायब रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पा रही है। शिक्षकों के न आने के कारण बच्चे इधर उधर घूमते रहते हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी की जानकारी में यह बात लाई गई तो इस मामले में भी उन्होंने कार्रवाई की बात कही।
