हसदेव अरण्य के पेड़ों की पतवार से चुनावी वैतरणी पार करेगी कांग्रेस



लोकसभा चुनाव के लिए बिछ गई अब नई बिसात

जगदलपुर(अर्जुन झा ):-लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की नई बिसात बिछ गई है। हसदेव के जंगलों के कटे पेड़ों से पतवार बनाकर चुनावी वैतरणी पार करने की योजना कांग्रेस ने बना ली है। हसदेव अरण्य के मसले को बस्तर और छत्तीसगढ़ से जोड़कर इसे छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की अस्मिता एवं अस्तित्व का सवाल बनाया जा रहा है। अब देखना होगा कि हसदेव अरण्य के दावानल की लपटें भाजपा को कितना झुलसा पाएंगी और कांग्रेस के पक्ष में किस हद तक माहौल बना पाएंगी ?
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल सरगुजा जिले के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल माइंस के लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई लंबे समय से सुर्खियों में है। प्रभावित हरिहरपुर, परसा, केते समेत दर्जनों गांवों के ग्रामीण आंदोलन पर उतर आए हैं। पूरे राज्य के पर्यावरण प्रेमी जंगलों की बेतहाशा कटाई के खिलाफ मुखर हो गए हैं। प्रदेशभर का आदिवासी समुदाय तथा अन्य सामाजिक संगठनों के लोग भी हसदेव के लोगों के साथ खड़े हो गए हैं। ऐसे में फिर भला राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस भला क्यों कर पीछे रह सकती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज दो दिन पहले तक हसदेव के जंगलों की अवैध कटाई के खिलाफ बयानबाजी करते आ रहे थे। रविवार 7 जनवरी को श्री बैज हसदेव अरण्य के दावानल में खुलकर कूद गए। पुलिस और प्रशासन की लाख बंदिशों एवं कोशिशों के बावजूद बस्तर के मुखर सांसद हसदेव अरण्य क्षेत्र के प्रभावित गांवों तक पहुंचने में कामयाब हो गए। श्री बैज ने हसदेव के जंगल के बीच खड़े होकर खूब दहाड़ते रहे। उन्होंने हसदेव अरण्य क्षेत्र में पेड़ों की कटाई, कोल ब्लॉक आवंटन, बस्तर के नंदराज पहाड़, नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने एकबार फिर भाजपा को आदिवासी विरोधी करार देते हुए कहा कि मोदी सरकार और राज्य की विष्णुदेव सरकार आदिवासियों की भावनाओं को दरकिनार करते हुए आदिवासियों का हक छीनने वाले फैसले ले रही हैं। छत्तीसगढ़ के जल, जंगल, जमीन और अकूत खनिज संपदा को बड़े उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है। सरगुजा के लेमरू एलीफेंट रिजर्व एरिया के जंगलों का भी सफाया किया जा रहा है। जंगलों की बेतहाशा कटाई से मनुष्यों और वन्य प्राणियों के बीच अघोषित युद्ध छिड़ गया है। जंगली हाथियों के हमले में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कोरवा जनजाति के लोग और अन्य निर्दोष ग्रामीण मारे जा रहे हैं।


चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी
दीपक बैज ने जंगलों की कटाई और लौह अयस्क एवं कोयला खदानें उद्योगपतियों के हवाले की जाने को छत्तीसगढ़ की अस्मिता पर हमला निरुपित करते हुए इसके खिलाफ राज्य स्तर पर आंदोलन छेड़ने पर जोर दिया। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के छत्तीसगढ़ आगमन के पूर्व प्रदेश कांग्रेस द्वारा शुरू की गई इस कवायद को इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस हसदेव अरण्य क्षेत्र में वनों की कटाई, कोल ब्लॉक आवंटन, नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण को लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बना सकती है। इसके अलावा भाजपा के चुनावी घोषणा के अनुरूप खरीदे गए धान का 3100 रू. प्रति क्विंटल की दर से भुगतान न किए जाने, बस्तर के नारायणपुर जिले में आदिवासी किसान की खुदकुशी, बीजापुर जिले में पुलिस – नक्सली मुठभेड़ के दौरान क्रास फायरिंग में एक बच्ची की मौत और बच्ची की मां को गोली लगने की घटना को भी चुनाव में जोरशोर से उठा सकती है। इस तरह भाजपा को चारों तरफ से घेरने के लिए कांग्रेस ने अभी से मोर्चाबंदी शुरू कर दी है।

भाजपा है आदिवासी विरोधी
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा घोर आदिवासी विरोधी है। भाजपा छत्तीसगढ़ को आदिवासी मुख्यमंत्री देकर मुख्यमंत्री को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रही है। आदिवासी मुख्यमंत्री के कंधे पर बंदूक रखकर आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है। बैज का कहना है कि मुख्यमंत्री निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं। उन्हें वैसा ही कदम उठाना पड़ता है, जैसा भाजपा मुख्यालय से निर्देश आता है। श्री बैज ने इसका उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि विष्णु देव साय सरकार की पहली केबिनेट बैठक में हसदेव के जंगलों की कटाई का फैसला दिल्ली के दबाव में लिया गया था। इससे जाहिर होता है कि भाजपा आदिवासियों का अधिकार छीनने का काम करती है।

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