जन मुक्ति मोर्चा की पदयात्रा को प्रशासन ने रोका


दल्ली राजहरा। हसदेव जंगल की कटाई, जंगली जीव जंतु को बेघर करने और वहां के आदिवासियों को विस्थापित करने के खिलाफ जन मुक्ति मोर्चा द्वारा दल्ली राजहरा से राजधानी रायपुर निकाली जा रही पदयात्रा के दौरान दूसरे दिन भी तनातनी हो गई। रसद ले जाने से रोकने पर पुलिस और मोर्चा कार्यकर्ताओं में जमकर बहस हुई। लगभग 600 लोग पदयात्रा में शामिल हैं और राज्यपाल को ज्ञापन सौपने रायपुर कूच कर रहे हैं।जिला प्रशासन बालोद व दल्ली राजहरा प्रशासन द्वारा जन मुक्ति मोर्चा को राशन सामान नहीं ले जाने दे रहे थे। मोर्चा के लोग राशन साथ ले जाने की जिद पर अड़े रहे। वे इसका कारण पूछते हुए अपनी गिरफ्तारी देने पर अड़ गए। अरमुरकसा के पास पुलिस प्रशासन द्वारा रैली को एकबार फिर बल पूर्वक रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जन मुक्ति मोर्चा के हौसले के आगे प्रशासन की एक नही चली और पदयात्रा आगे बढ़ती रही। कुसुमकसा में आदिवासी नेता रत्तीराम कोसमा पदयात्रा का हिस्सा बने। कुसुमकसा के आगे करियाटोला के पुल के पास पुलिस ने बेरिकेट लगाकर रोड को बंद कर दिया था और आम जनता को भी आने जाने नही दिया जा रहा था। प्रशासन यह कहता रहा कि आप को आगे जाने की अनुमति हम नही दे सकते। जबकि मोर्चा ने 8 जनवरी को बालोद जिला कलेक्टर को और 12 जनवरी को जिला कलेक्टर दुर्ग व जिला कलेक्टर रायपुर को अनुमति हेतु आवेदन पत्र दिया था, जिसकी पावती भी है। फिर भी प्रशासन द्वारा पदयात्रा को रोकने की कोशिश की जाने लगी। जन मुक्ति मोर्चा के लोगों और पुलिस प्रशासन के बीच नोकझोंक हुई और कार्यकर्ता आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे। लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया। इससे गुस्साए जन मुक्ति मोर्चा के लोग वहीं धरने पर बैठ गए।लगभग एक घंटे बाद मोर्चा के प्रतिनिधियों ने धरना स्थगित किया।

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