मुनि संघ का कवर्धा नगर प्रवेश
कवर्धा :- राष्ट्र संत 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक निर्यापक मुनि 108 श्री समता सागर महाराज ससन्घ डोंगरगढ़ चंद्रगिरी के प्रवास पर हैं। इसी मार्ग में धर्म नगरी कवर्धा में दिनांक 5 फरवरी निर्धारित समय प्रातः 7:00 बजे मिनीमाता चौक से मुनीश संघ का प्रवेश कवर्धा नगर में हुआ। इस अवसर पर सुबह की कड़कती ठंड की परवाह न करते हुए सकल जैन समाज एवं अन्य गणमान्य नागरिक मुनि संघ की अगवानी के लिए चौक पर उपस्थित थे, सभी ने जय कारे के साथ मुनि संघ की चरण वंदना की एवं मुख्य मार्ग से ऋषभदेव चौक महावीर स्वामी चौक गुरु गोविंद सिंह चौक पधारे जहां नगर के वरिष्ठ नागरिक समाजसेवी श्री भंवर लाल की लुनिया ने सपरिवार गुरु के पाद प्रक्षालन की एवं वंदन की, नवीन बाजार चौक ठाकुर देव चौक होते हुए श्री दिगंबर जैन मंदिर में पधारे जहां समाज के सभी सदस्यों ने तीनों मुनि महाराज के
प्रक्षालन एवं चरण वंदना कर मंदिर में प्रवेश कराया जहां निर्यापक मुनि 108 श्री समता सागर महाराज द्वारा श्री महावीर जी की प्रतिमा का अभिषेक पाठ द्वारा शांति धारा कराई गई एवं मुनि श्री ने स्वयं गन्दोतक लिया एवं शांति धारा कर्ताओं को गन्दोतक दिया। इस अवसर पर मंदिर में अभिषेक की व्यवस्था का उत्तरदायित्व समाज के ललित जैन एवं आकलंक जैन ने पूर्ण रूप से निर्वाहन किया।
इसके पश्चात मुनि संघ जैन मंदिर के निर्माण स्थल पर भी जाकर निर्माण स्थिति का अवलोकन कर मंत्र जाप कर जयकारो के साथ प्रस्थान कर ग्राम महाराजपुर पहुंचे जहां मुझे संघ के आहार की व्यवस्था समाज द्वारा की गई थी जिसमें समाज के सभी सदस्यों ने मुनि सन्घ को आहार देकर पुण्य अर्जित किया , इस अवसर पर कवर्धा जैन समाज के सदस्य श्री प्रेमचंद श्रीमाल श्री महावीर जैन एवं अन्य सदस्यों ने मुनि सन्घ केआहार देखने का पुण्य अर्जित किया। उक्त अवसर पर ही लोहारा के जैन समाज एवं छुही खदान के जैन समाज के भी सभी सदस्यों उपस्थित होकर मुनि संघ के दर्शन का लाभ लिया एवं चर्चा की।
शाला के प्रधान अध्यापक द्वारा निवेदन करने पर निर्यापक मुनि 108 श्री समता सागर महाराज जी ने छात्रों को उपदेश देते हुए कहा कि आप सबको अपने पढ़ाई के प्रति पूर्ण रूप से लगे रहना चाहिए ताकि आपको परीक्षा के समय परीक्षा का कोई बुखार ना हो कोई तनाव न हो। गुरुओं का एवं माता पिता का सम्मान करना चाहिए, इस बीच मुनि श्री द्वारा बच्चों से देश के प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के नाम पूछे गए बच्चों ने नाम तो बताएं परंतु नाम के आगे जो आदर्श सूचक शब्द लगाए जाते हैं वह नहीं लगाये, जिस पर मुनि श्री ने कहा कि हमें हमेशा बड़ों को आदर्श सूचक शब्दों से संबोधित करना चाहिए। बच्चों को अपने व्यवहार में भी बहुत ही कुशलता होनी चाहिए व्यर्थ खर्च नहीं करना चाहिए और शाला आते जाते समय बड़ी सावधानी रखनी चाहिए जिससे कि उन रास्ते में कोई दुर्घटना ना हो, माता-पिता के पैसों का व्यर्थ खर्च नहीं करना चाहिए, गुरु का आदर करना चाहिए। अच्छी तरह से पढ़ कर आप जनप्रतिनिधि बन सकते हैं, शिक्षक बन सकते हैं और बड़े पद पर भी जा सकते हैं।
आगमन पश्चात शाला के प्रधान पाठक, संकुल समन्वयक शाला समिति के सदस्यों ने भी मुनि श्री के चरणों में नमन किया एवं श्रद्धा अर्पित की। मुनि श्री के प्रवचन के पश्चात बच्चों को एवं समस्त उपस्थित जनों को संघ पति द्वारा प्रसाद वितरण किया गया।
