अब दिल से होही दिल के गोठ अपन बोली भाखा में

अर्जुन झा-
*जगदलपुर।* अपने छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा भी अजब गजब अंदाज वाले हैं। कभी वे अपनी जान की परवाह न करते हुए सीधे नक्सलियों की मांद में घुस
जाते हैं, तो कभी धुर नक्सल प्रभावित किसी गांव में जाकर वहां के लोगों के साथ बैठ उनका दुख दर्द साझा करने लग जाते हैं और कभी नक्सलियों के समक्ष वार्ता की भी पेशकश रख देते हैं। उनका यह अजब गजब अंदाज सभी को भाने लगा है। अब तो शर्मा जी से जुड़ी एक और बड़ी ही निराली खबर सामने आई है कि वे गोंडी हल्बी बोली में पारंगत होने जा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने बस्तर से ट्यूटर भी बुलवाए हैं। ऐसे में आपके मन में यह विचार उठ रहे होंगे कि शर्मा जी के निर्वाचन क्षेत्र कवर्धा में तो बैगा आदिवासी ज्यादा हैं, फिर भला उन्हें हल्बा गोंड़ आदिवासियों की बोली सीखने की क्या जरूरत? तो हम आपको बता दें कि विजय शर्मा गृहमंत्री के साथ साथ बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। बस्तर संभाग नक्सल समस्या से सर्वाधिक प्रभावित है और यहां हल्बा, गोंड़, भतरा आदिवासी ज्यादा हैं। दरअसल विजय शर्मा इन आदिवासियों के दिल की बात को उनकी ही बोली भाषा में दिल से समझना चाहते हैं।
आदिवासियों का दर्द समझने के लिए बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री व छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने गोंडी भाषा सीखने के लिए बस्तर से एक गोंडी भाषा सिखाने वाले शिक्षक को हायर किया है। यह शिक्षक राजधानी रायपुर में रहकर गृहमंत्री विजय शर्मा को गोंडी भाषा की बारीकियों से अवगत कराएंगे। प्रभारी मंत्री विजय शर्मा तब सुर्खियों में आ गए थे जब उन्होंने गृहमंत्री का कार्यभार सम्हालते ही सीधे बस्तर संभाग के अति नक्सल प्रभावित बीजापुर और सुकमा जिलों के अंदरूनी इलाकों में अपने कदम रखे थे। नक्सली हमले के बाद सुरक्षा बलों के कैंप में पहुंचकर गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवानों की हौसला अफजाई की, उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ पूरी शिद्दत से खड़ी है। यही नहीं विजय शर्मा धुर नक्सलग्रस्त गांव में भी जा धमके और एक ग्रामीण की झोपड़ी के द्वार पर बैठकर उन्होंने गांव वालों के दुख दर्द को करीब से देखने, सुनने और समझने की कोशिश की थी। तब कुछ भाषागत कठिनाई उनके समक्ष आई थी। उस दौरान श्री शर्मा गांव के लोगों को अपना निजी मोबइल फोन नंबर देकर आए थे और कहा था कि किसी भी तरह की दिक्कत या समस्या आए तो मुझे फोन करना। श्री शर्मा के रायपुर लौटने के चंद घंटे बाद उस गांव के किसी युवक ने विजय शर्मा को फोन कर बिजली की समस्या से अवगत कराया था। तब श्री शर्मा ने तुरंत विद्युत कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर गांव की बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने निर्देश दिए थे। दो दिन बाद गृहमंत्री विजय शर्मा ने उस युवक को खुद फोन लगाकर बिजली बहाली होने या न होने बाबत जानकारी ली थी। गृहमंत्री विजय शर्मा की इस संवेदनशीलता ने पूरे गांव का दिल जीत लिया। अब श्री शर्मा पूरे बस्तर का दिल जीतने की कवायद में लग गए हैं और यह तभी संभव है जब आम बस्तरिहा बोली भाषा में बस्तर के लोगों का दिल टटोला जाए। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए विजय शर्मा गोंडी हल्बी बोली सीख रहे हैं। बस्तरवासियों के दर्द को समझने के लिए खालिस बस्तरिहा रंग में रंग जाने की जरूरत है और इसके लिए प्रभारी मंत्री विजय शर्मा गोंडी भाषा सीखने की कोशिश कर रहें हैं जिसे सीधे तौर पर उनका सराहनीय प्रयास ही कहा जाना चाहिए। ज्ञात हो कि बस्तर माओवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित है और इसमें आदिवासी ही पिस रहे हैं और आदिवासियों की बड़ी आबादी कोया जिसे गोंड भी कहा जाता है वह कुछ ज्यादा ही प्रताड़ित है। माओवादियों का शिकार कोया समुदाय के लोग हो रहे हैं। कोया समाज के नेता भी दो भागों में विभक्त हैं, जिनके अपने -अपने दावे प्रतिदावे हैं। लेकिन कोया आदिवासियों की भावनाओं को जमीनी स्तर पर समझने की कोशिश नहीं की जा रही है। सरल शब्दों में उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं की जा रही है। जिससे सात दशकों से यह मामला अब तक सुलझ नहीं पाया है।

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