राम की `शबरी’ का सीना छलनी करने वाले रेत माफिया पर खनिज विभाग पूरी तरह है मेहरबान

अर्जुन झा-
जगदलपुर :- रेत माफिया बस्तर संभाग के सुकमा जिले की जीवनदायिनी शबरी नदी का सीना छलनी कर रहे हैं। शबरी नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकाल कर उसका अवैध भंडारण एवं परिवहन करने वाले रेत माफिया पर खनिज विभाग मेहरबान है। अवैध भंडारण मामले को लेकर कई बार विभाग को संज्ञान में लाने के बाद भी खनिज विभाग नहीं जाग रहा है।
जिला प्रशासन पूर्व में खनिज विभाग को फटकार भी लगा चुका है। रेत माफिया को प्राप्त राजनीतिक संरक्षण के कारण उनका हौसला बुलंद है। समय पर खनिज विभाग ने कार्रवाई की होती, तो पत्रकार साजिश का शिकार नहीं होते। खबर है कि बिना बिल के रोजाना दर्जन भर ट्रकों के जरिए रेत कोंटा से हैदराबाद भेजी जा रही है। जिसमें अधिकांश ट्रकों का माइनिंग क्लीयरेंस तक जारी नहीं किया गया है। सारे नियमों को दरकिनार कर फंदीगुड़ा से रेत के अवैध परिवहन का खेल लंबे समय से जारी है। जिसमें माफियाओं का राजनीतिक संरक्षण मिलने की खबर है। ज्ञातव्य हो कि सुकमा जिले के कोटा विकासखंड की इंजरम पंचायत के आश्रित गांव फंदीगुड़ा में शबरी नदी से रेत का उत्खनन कर अवैध भंडारण एवं परिवहन का खेल लंबे समय से चला आ रहा है। लेकिन प्रशासन अवैध भंडारण एवं परिवहन पर नकेल कसने में अब तक नाकाम साबित हुआ है। कई बार औपचारिकता दिखाते हुए लोकल स्तर पर खनिज विभाग के अधिकारी कार्रवाई कर अफसरों की नजरों में हीरो बनने का दिखावा भी कर चुके हैं। जब बड़े माफिया की बारी आती है तो आपसी समझौता कर रजामंदी के साथ रेत का अवैध कारोबार का खेल चलने दिया जाता है। आज आलम यह है कि फंदीगुड़ा में भंडारित सैकड़ों ट्रक रेत की पड़ताल करने वाला कोई नहीं है। भंडारण की अनुमति नहीं है, फिर भी कारोबारी को रेत उत्खनन का ठेका दिया जाता है। उसे रेत भंडारित करने का परमिशन लेना अनिवार्य है। फंदीगुड़ा में रेत डंप करने पंचायत से एनओसी तक नहीं ली गई है। बिना अनुमति के रेत डंप कर अवैध परिवहन का खेल चल रहा है। ऐसा करके शासन को मिलने वाली रायल्टी के लाखों रुपयों की सेंधमारी करने का खेला किया जा रहा है। शासन को मिलने वाले टैक्स का खनिज विभाग के अधिकारी कर्मचारी आपस में बंटवारा कर रेत माफिया को लाभ पहुंचाने में जुटे हैं।

थाने से छोड़ दिया वाहन
रेत के अवैध परिवहन को लेकर हुए विवाद के बाद रेत से भरे दो ट्रकों को कोंटा थाना लाया गया था, लेकिन आनन फानन में उक्त ट्रकों को छोड़ दिया गया। यह जांच का विषय है कि बिना जांच पड़ताल किए कोंटा थाने से ट्रक को क्यों छोड़ा गया और ट्रक छोड़ने के लिए किस राजनीतिक दल के नेता द्वारा दबाव बनाया गया था? खबर है कि पूर्व की कांग्रेस सरकार के कुछ स्थानीय स्तर के नेताओं के संरक्षण में रेत का खेल कर शासन को करोड़ों काी चपत लगाई जा रही जा रही है। सत्ता परिवर्तन के बाद भी ऐसे माफियाओं पर भाजपा की सरकार नकेल कसने में नाकाम साबित हुई है।

पंचायत से एनओसी नहीं
इंजरम पंचायत सचिव रवि सिंह ने बताया कि पंचायत से किसी प्रकार की कोई एनओसी रेत भंडारण और परिवहन के लिए जारी ही नहीं की गई है। पंचायत सचिव ने भी माना है कि रेत का अवैध ढंग से भंडारण एवं परिवहन किया जा रहा है। रेत के अवैध भंडारण को लेकर जिले के खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। अधिकारियों की चुप्पी रेत माफिया को उनकी मौन स्वीकृति की ओर इशारों कर रही है।

ई -वे बिल भी नहीं
बिलः- कार्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक राज्य से दूसरे राज्य तक रेत परिवहन के लिए ई- वे बिल होना अनिवार्य है। इसके साथ ही रायल्टी के अतिरिक्त जीएसटी का प्रावधान भी है। इन सभी नियमों और प्रावधानों का कोंटा से दीगर राज्य में रेत परिवहन को लेकर पालन नहीं किया जा रहा है। जिस वाहन से रेत का परिवहन कराया जा रहा है उस वाहन का खनिज विभाग से परमिशन भी होना चाहिए। उक्त खदान स्थल के चारों ओर सीसीटीवी लगाने का भी प्रावधान करने नियमों में निर्देशित किया गया है। कमीशन के खेल में सारे नियमों का दरकिनार कर दिया गया है।

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